Roza kab Nahi tutata he (किन चीज़ों से रोज़ा नहीं टूटता): रोज़े की हालत में कई बार इंसान ऐसे हालात या वहम का शिकार हो जाता है जहाँ वह समझता है कि उसका रोज़ा टूट गया, जबकि शरीअत में उन चीज़ों से रोज़ा बिल्कुल नहीं टूटता। सुन्नी हनफ़ी फ़िक़्ह और बहारे शरीअत (हिस्सा 5) के मुताबिक़ भूलकर खाना-पीना, सुरमा लगाना, तेल लगाना, मिस्वाक करना, एहतलाम होना और इंजेक्शन लगवाने जैसे तमाम मामलों के शरई अहकाम यहाँ विस्तार से बयान किए गए हैं।
Table of Contents
- 1. वे अहम हदीसें जिनमें रोज़ा न टूटने की वज़ाहत है
- 2. वे 15 चीज़ें जिनसे रोज़ा बिल्कुल नहीं टूटता (मुकम्मल सूची)
- 3. भूलकर खाने वाले को देखकर क्या हुक्म है?
- 4. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- 4.1 Q1: Roza kab Nahi tutata he – क्या रोज़े में ब्रश या पेस्ट कर सकते हैं?
- 4.2 Q2: क्या रोज़े की हालत में ग़ुस्ल करने से रोज़ा टूटता है?
- 4.3 Q3: क्या बलग़म निगलने से रोज़ा टूट जाता है?
- 4.4 Q4: अगर दिन में सोते हुए नापाकी (एहतलाम) हो जाए तो क्या रोज़ा बाक़ी रहेगा?
वे अहम हदीसें जिनमें रोज़ा न टूटने की वज़ाहत है
रसूलुल्लाह ﷺ ने अपनी उम्मत पर आसानी फ़रमाते हुए इरशाद फ़रमाया:
सहीह बुख़ारी व मुस्लिम की हदीस:
“हज़रत अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया: ‘अगर कोई रोज़ेदार भूलकर कुछ खा या पी ले, तो वह अपना रोज़ा पूरा करे, क्योंकि उसे अल्लाह ने खिलाया और पिलाया है।'”
📚 हवाला: सहीह बुख़ारी, किताबुस्सौम, हदीस: 1933; सहीह मुस्लिम, हदीस: 1155।
जामिअ तिर्मिज़ी में हज़रत अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी-ए-करीम ﷺ ने फ़रमाया: “तीन चीज़ें रोज़ादार का रोज़ा नहीं तोड़तीं—पछना लगवाना (ख़ून निकलवाना / Hijama), ख़ुद-ब-ख़ुद उल्टी (क़ै) आना, और एहतलाम (स्वप्नदोष) होना।” (जामिअ तिर्मिज़ी: 719)
वे 15 चीज़ें जिनसे रोज़ा बिल्कुल नहीं टूटता (मुकम्मल सूची)
सुन्नी हनफ़ी फ़िक़्ह और बहारे शरीअत (हिस्सा 5, सफ़ा 118-121) के मुताबिक़ दर्ज ज़ैल चीज़ों से रोज़ा बिल्कुल नहीं टूटता:
- भूलकर खाना, पीना या हमबिस्तरी करना: अगर रोज़ादार होना बिल्कुल याद न रहा और भूलकर पेट भर खाना खा लिया या पानी पी लिया, तो रोज़ा नहीं टूटा। याद आते ही फ़ौरन लुक़मा बाहर थूक दे।
- मक्खी या धूल-ग़ुबार हलक़ में जाना: रास्ते की धूल, आटे की चक्की का आटा, अनाज का ग़ुबार या उड़ती हुई मक्खी बिला-इरादा हलक़ में चली जाए तो रोज़ा नहीं टूटता।
- आँखों में सुरमा या दवा डालना: सुरमा लगाने या आँखों में ड्रॉप डालने से रोज़ा नहीं टूटता, चाहे हलक़ में सुरमे का रंग या मज़ा ही क्यों न महसूस हो।
- सर या बदन पर तेल लगाना: बालों में तेल लगाने या मालिश करने से रोज़ा नहीं टूटता।
- मिस्वाक करना: सूखी या ताज़ा मिस्वाक करने से रोज़ा नहीं टूटता, चाहे सुबह करे या अस्र के बाद।
- ख़ुद-ब-ख़ुद उल्टी (क़ै) आना: अगर बिना अपने इख़्तियार के अचानक उल्टी आ जाए, चाहे कितनी ही ज़्यादा हो और ख़ुद ही हलक़ में वापस लौट जाए, रोज़ा नहीं टूटता।
- एहतलाम (Nightfall / स्वप्नदोष) होना: दिन में सोते हुए अगर एहतलाम हो जाए तो रोज़ा नहीं टूटता। फ़ौरन ग़ुस्ल करके पाकी हासिल करें।
- जनाबत (नापाकी) की हालत में सुब्ह होना: अगर रात में ग़ुस्ल फ़र्ज़ हुआ था और सुब्ह सादिक़ तक ग़ुस्ल न कर सका, तो भी रोज़ा सही हो जाएगा। अलबत्ता नमाज़ क़ज़ा होने से पहले ग़ुस्ल करना फ़र्ज़ है।
- गर्मी में नहाना या गीला कपड़ा लपेटना: प्यास व गर्मी की शिद्दत कम करने के लिए नहाना या मुँह पर पानी छिड़कना जाइज़ है और इससे रोज़ा नहीं टूटता।
- मुँह का थूक या बलग़म निगलना: मुँह में जमा हुआ अपना थूक या सीने का बलग़म निगल जाने से रोज़ा नहीं टूटता (अलबत्ता थूक हाथ पर लेकर दोबारा निगलना मना है)।
- दाँत से ख़ून निकलना: अगर दाँत से ख़ून निकला लेकिन वह थूक में कम था और उसका मज़ा हलक़ में महसूस नहीं हुआ, तो रोज़ा नहीं टूटेगा।
- इंजेक्शन व इंसुलिन: नस (IV) या गोश्त (IM) में दवा या इंसुलिन का इंजेक्शन लगवाने से रोज़ा नहीं टूटता।
- ख़ून टेस्ट करवाना: टेस्ट के लिए सिरिंज से ख़ून निकलवाने से रोज़ा नहीं टूटता।
- कान में पानी चले जाना: नहाते वक़्त कान में ख़ुद पानी चला जाए तो रोज़ा नहीं टूटता।
- इत्र या ख़ुशबू सूँघना: गुलाब, इत्र या फूलों की महक सूँघने से रोज़ा नहीं टूटता।
📚 हवाला: बहारे शरीअत, हिस्सा 5, सफ़ा 118-121; दुर्रे मुख़्तार व रद्दुल मुहतार; व फ़तहुल क़दीर।
भूलकर खाने वाले को देखकर क्या हुक्म है?
अगर आप किसी रोज़ेदार को भूलकर खाते-पीते देखें तो शरीअत का हुक्म यह है:
- अगर वह रोज़ेदार तंदुरुस्त और ताक़तवर है, तो उसे फ़ौरन याद दिलाना आप पर वाजिब है। अगर नहीं याद दिलाएँगे तो आप गुनहगार होंगे।
- अगर वह रोज़ेदार बहुत बूढ़ा, कमज़ोर या बीमार है कि याद दिलाने पर वह खाना छोड़ देगा और कमज़ोरी की वजह से रोज़ा पूरा करना मुश्किल हो जाएगा, तो उसे याद न दिलाना बेहतर है ताकि वह अल्लाह की दी हुई नेमत से ताक़त हासिल कर ले।
रोज़ा किन चीज़ों से टूट जाता है, यह जानने के लिए हमारा मक़ाला Roza Kis chij Se Toot Jata Hai और Roze Ke Jaruri Masail ज़रूर पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: Roza kab Nahi tutata he – क्या रोज़े में ब्रश या पेस्ट कर सकते हैं?
टूथपेस्ट या मंजन इस्तेमाल करने से रोज़ा मकरूह होता है। अगर उसका कोई ज़रा सा हिस्सा भी हलक़ में उतर गया तो रोज़ा टूट जाएगा। रोज़े में सबसे अफ़ज़ल अमल साफ़ मिस्वाक का इस्तेमाल है जिससे रोज़ा मकरूह भी नहीं होता और सवाब भी मिलता है।
Q2: क्या रोज़े की हालत में ग़ुस्ल करने से रोज़ा टूटता है?
नहीं, रोज़े में नहाना पूरी तरह जाइज़ है। अलबत्ता ग़ुस्ल करते वक़्त हलक़ में पानी न जाए, इसलिए गरगरा न करें और नाक में बहुत ऊपर तक पानी न चढ़ाएँ।
Q3: क्या बलग़म निगलने से रोज़ा टूट जाता है?
नहीं, सुन्नी हनफ़ी फ़िक़्ह के मुताबिक़ बलग़म या खंखार निगलने से रोज़ा नहीं टूटता, चाहे वह हलक़ से मुँह में आया हो। अलबत्ता नफ़ासत और सफ़ाई का तक़ाज़ा यह है कि उसे थूक दिया जाए।
Q4: अगर दिन में सोते हुए नापाकी (एहतलाम) हो जाए तो क्या रोज़ा बाक़ी रहेगा?
हाँ, एहतलाम इंसान के इख़्तियार में नहीं होता, इसलिए इससे रोज़ा बिल्कुल नहीं टूटता। बेदार होते ही फ़ौरन ग़ुस्ल कर लेना चाहिए ताकि नमाज़ अदा की जा सके।
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