CHAAND DEKHNE KA MASLA OR BAYAN (चाँद देखने का शरीई बयान व रुइयत-ए-हिलाल के मसायल): इस्लामी कैलेंडर (हिजरी साल) के तमाम महीनों, ख़ास तौर पर रमज़ानुल मुबारक, ईदुल फ़ित्र और ईदुल अज़हा की शुरुआत नए चाँद (हिलाल) के देखने पर मुनहसिर है। अहादीस-ए-मुबारका और सुन्नी हनफ़ी फ़िक़्ह (बहारे शरीअत, हिस्सा 5) के मुताबिक़ चाँद देखना, चाँद देखने की मसनून दुआ पढ़ना और शरई गवाही (शहादत) के क्या उसूल हैं, यहाँ मुकम्मल तफ़सील दी गई है।
क़ुरआन मजीद में चाँद के औक़ात की अहमियत
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त क़ुरआन मजीद की सूरह अल-बक़रह में इरशाद फ़रमाता है:
يَسْأَلُونَكَ عَنِ الْأَهِلَّةِ ۖ قُلْ هِيَ مَوَاقِيتُ لِلنَّاسِ وَالْحَجِّ
तर्जुमा: ऐ महबूब! वे आपसे नए चाँद (हिलाल) के बारे में दरयाफ़्त करते हैं, आप फ़रमा दीजिए कि वे लोगों (के रोज़-मर्रा के मामलात) और हज के लिए वक़्त की निशानियाँ हैं।
📖 हवाला: सूरह अल-बक़रह (2), आयत: 189
चाँद देखकर रोज़ा रखने और इफ़्तार करने की हदीस
सहीह बुख़ारी और सहीह मुस्लिम में अमीरुल मोमिनीन हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर और हज़रत अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया:
“चाँद देखकर रोज़ा रखना शुरू करो और चाँद देखकर ही इफ़्तार (ईद) करो। और अगर आसमान पर बादल (अब्र या ग़ुबार) छा जाए तो तीस दिन की गिनती पूरी कर लो।”
📚 हवाला: सहीह बुख़ारी, हदीस: 1909; सहीह मुस्लिम, हदीस: 1081।
नया चाँद देखने की मसनून दुआ
जब भी किसी महीने का नया चाँद नज़र आए, तो जामिअ तिरमिज़ी की यह मुबारक मसनून दुआ पढ़ना सुन्नत है:
اللَّهُمَّ أَهِلَّهُ عَلَيْنَا بِالْيُمْنِ وَالإِيمَانِ وَالسَّلَامَةِ وَالإِسْلَامِ، رَبِّي وَرَبُّكَ اللَّهُ
हिंदी उच्चारण: “अल्लाहुम्मा अहिल्लहू अलैना बिल-युम्नि वल-ईमान, वस-सलामति वल-इस्लाम, रब्बी व रब्बुकल्लाहु।”
तर्जुमा: ऐ अल्लाह! इस चाँद को हम पर बरकत, ईमान, सलामती और इस्लाम के साथ तुलू फ़रमा। (ऐ चाँद!) मेरा और तेरा रब अल्लाह ही है।
📚 हवाला: जामिअ तिर्मिज़ी, हदीस: 3451; मुसनद अहमद।
पाँच महीनों का चाँद देखना वाजिबे किफ़ाया है
इमाम-ए-अहले सुन्नत आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ाँ फ़ाज़िले बरेलवी फ़तावा रज़विया में इरशाद फ़रमाते हैं कि साल में पाँच महीनों का चाँद देखना मुसलमानों पर वाजिबे किफ़ाया है:
- शाबान का चाँद: ताकि रमज़ान के रोज़ों की सही तारीख़ तय की जा सके।
- रमज़ान का चाँद: ताकि फ़र्ज़ रोज़ों की शुरुआत की जा सके।
- शव्वाल का चाँद: ताकि ईदुल फ़ित्र और रोज़ों की मुकम्मल तादाद तय हो।
- ज़ुल-क़ादा का चाँद: ताकि हज और बक़रईद के दिनों का हिसाब सही रहे।
- ज़ुल-हिज्जा का चाँद: ताकि ईदुल अज़हा (क़ुरबानी) और अरफ़ा के दिन मुक़र्रर हों।
चाँद की शरई गवाही (शहादत) के फ़िक़्ही क़वाइद
| हालात | रमज़ान का चाँद | ईदुल फ़ित्र (शव्वाल) व अन्य महीने |
|---|---|---|
| आसमान पर बादल या ग़ुबार हो (अब्र) | सिर्फ़ 1 आदिल मुसलमान (मर्द या औरत) की गवाही काफ़ी है। | कम से कम 2 आदिल मर्द, या 1 मर्द और 2 औरतें गवाही दें। |
| आसमान बिल्कुल साफ़ हो (मतला साफ़) | जमाअत-ए-कसीरा (बड़ी तादाद में लोगों का देखना) शर्त है। | जमाअत-ए-कसीरा (इतने लोग जिनसे क़ाज़ी को यक़ीन हो जाए)। |
📚 हवाला: बहारे शरीअत, हिस्सा 5, सफ़ा 111-117; फ़तावा रज़विया, जिल्द 10; व दुर्रे मुख़्तार।
अफ़वाह और सोशल मीडिया की ख़बरों की शरई हैसियत
फ़ुक़हा-ए-किराम फ़रमाते हैं कि सिर्फ़ अफ़वाहों, सोशल मीडिया मैसेजों या बिना शरई तस्दीक़ के फ़ोन/तार की ख़बरों से ईद या रमज़ान साबित नहीं होता जब तक कि मोतबर दारुल क़ज़ा या सुन्नी रुइयत-ए-हिलाल कमेटी द्वारा शरई गवाही की बुनियाद पर बाक़ायदा एलान न किया जाए।
ईद की नमाज़ के अहकाम के लिए हमारा लेख EID Ki Namaz Ka Tarika और रोज़े के फ़राइज़ के लिए Roze Ke Jaruri Masail ज़रूर पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: CHAAND DEKHNE KA MASLA OR BAYAN में नया चाँद देखकर उँगली से इशारा करना कैसा है?
दुर्रे मुख़्तार और आलमगीरी के मुताबिक़ हिलाल (नए चाँद) को देखकर उसकी तरफ़ उँगली से इशारा करना मकरूह है, चाहे किसी दूसरे को बताने के लिए ही क्यों न हो।
Q2: अगर 29 शाबान को चाँद न दिखे तो क्या करें?
हदीस-ए-पाक के मुताबिक़ अगर 29 शाबान की शाम को चाँद नज़र न आए या बादल छाए हों, तो शाबान के 30 दिन पूरे किए जाएँगे और उसके अगले दिन से रमज़ान के रोज़े शुरू होंगे।
Q3: क्या साइंस और खगोलीय गणना (Astronomy) से चाँद का फ़ैसला हो सकता है?
इस्लामी शरीअत में इल्म-ए-हैअत या कंप्यूटर कैलकुलेशन का कोई एतिबार नहीं है। शरीअत का दारोमदार आँखों से चाँद देखने (रुइयत) या शरई गवाही (शहादत) पर है।
Q4: चाँद देखने पर क्या दुआ पढ़नी चाहिए?
चाँद देखकर पढ़ना चाहिए: “अल्लाहुम्मा अहिल्लहू अलैना बिल-युम्नि वल-ईमान, वस-सलामति वल-इस्लाम, रब्बी व रब्बुकल्लाहु।” (तिर्मिज़ी: 3451)
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