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रोज़ा खोलने की दुआ हिंदी में: इफ़्तार की मसनून दुआ, अरबी टेक्स्ट और तर्जुमा
Bahar E Shariat

रोज़ा खोलने की दुआ हिंदी में: इफ़्तार की मसनून दुआ, अरबी टेक्स्ट और तर्जुमा

admin
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रोज़ा खोलने की दुआ हिंदी में पढ़ना और इफ़्तार के वक़्त अल्लाह तआला से अपने दिल की मुरादें माँगना हर रोज़ेदार के लिए बहुत बड़ी सआदत है। रमज़ानुल मुबारक के मुक़द्दस महीने में या नफ़्ल रोज़ों में, दिन भर भूख और प्यास बर्दाश्त करने के बाद जब ग़ुरूब-ए-आफ़ताब (सूरज डूबने) का वक़्त होता है, तो वह वक़्त दुआ की क़बूलियत का सबसे ख़ास लम्हा होता है। हदीस शरीफ़ में फ़रमाया गया है कि इफ़्तार के वक़्त रोज़ेदार की दुआ कभी रद्द नहीं होती। सुन्नी हनफ़ी शरीअत और सहीह अहादीस की रोशनी में यहाँ रोज़ा खोलने की मशहूर दुआ, हिंदी उच्चारण और इफ़्तार के मसनून आदाब पेश किए गए हैं।

🌙 दुआ की क़बूलियत का वक़्त: रसूलुल्लाह ‎ﷺ‎ ने इरशाद फ़रमाया: “तीन लोगों की दुआ कभी रद्द नहीं की जाती: 1. आदिल (इंसाफ़ पसंद) हाकिम की, 2. रोज़ेदार की जब तक वह इफ़्तार न कर ले, और 3. मज़लूम की दुआ।”
📚 हवाला: जामेअ तिर्मिज़ी, किताबुद दावात, हदीस: 3598

रोज़ा खोलने की मशहूर मसनून दुआ (इफ़्तार की दुआ)

اَللّٰهُمَّ اِنِّیْ لَکَ صُمْتُ وَبِکَ اٰمَنْتُ وَعَلَیْکَ تَوَکَّلْتُ وَعَلٰی رِزْقِکَ اَفْطَرْتُ ۝

हिंदी उच्चारण (Transliteration):

“अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुम्तु व बिका आमन्तु व अलैका तवक्कल्तु व अला रिज़्क़िका अफ़्तरतु।”

हिंदी तर्जुमा (अर्थ):

“ऐ अल्लाह! मैंने तेरे ही लिए रोज़ा रखा, और तुझ पर ही ईमान लाया, और तुझ पर ही भरोसा किया, और तेरे ही दिए हुए रिज़्क़ से इफ़्तार किया।”

📚 हवाला: सुनन अबू दाऊद, किताबुस सियाम, हदीस: 2358; बहारे शरीअत, हिस्सा 5, सफ़ा 998

इफ़्तार के बाद की दूसरी मसनून दुआ (प्यास बुझने पर)

जब खजूर या पानी से इफ़्तार कर लें, तो यह प्यारी मसनून दुआ पढ़ना भी हुज़ूर की सुन्नत है:

ذَهَبَ الظَّمَاُ وَابْتَلَّتِ الْعُرُوْقُ وَثَبَتَ الْاَجْرُ اِنْ شَآءَ اللّٰهُ ۝

हिंदी उच्चारण: “ज़हबाज़ ज़म-उ वब्तल्लतिल उरूक़ु व सबतल अज्रु इन शा-अल्लाह।”

तर्जुमा: “प्यास बुझ गई, नसें तर हो गईं और सवाब पक्का हो गया अगर अल्लाह ने चाहा।”

📚 हवाला: सुनन अबू दाऊद, हदीस: 2357

इफ़्तार करने के 5 मसनून आदाब

  • इफ़्तार में जल्दी करना: जैसे ही सूरज पूरी तरह डूब जाए और मग़रिब की अज़ान हो, तुरंत इफ़्तार करना सुन्नत है। जानबूझकर देरी करना मकरूह है।
  • ताज़ा या सूखी खजूर से इफ़्तार: खजूर से रोज़ा खोलना अफ़ज़ल है। अगर खजूर न हो तो सादे पानी से रोज़ा खोलना सुन्नत है।
  • इफ़्तार कराने का सवाब: किसी रोज़ेदार को इफ़्तार कराने वाले को रोज़ेदार के बराबर सवाब मिलता है बिना रोज़ेदार का सवाब कम हुए।

तरावीह की नमाज़ के लिए तरावीह की नमाज़ का तरीक़ा, और मग़रिब की नमाज़ के लिए नमाज़ का सही तरीक़ा हिंदी में पढ़ें।

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