40 हदीस-ए-नबवी (40 Hadees In Hindi) को याद करना और उन पर अमल करना हर मुसलमान के लिए दुनिया व आख़िरत की अज़ीम सआदत है। हदीस शरीफ़ में आया है कि जो शख़्स मेरी उम्मत की दीनी भलाई के लिए चालीस हदीसें याद रखेगा, अल्लाह तआला क़यामत के दिन उसे फ़क़ीह और आलिम के तौर पर उठाएगा और हुज़ूर उसकी शफ़ाअत फ़रमाएँगे (शुअबुल ईमान लिल-बैहक़ी)। सहीह बुख़ारी और सहीह मुस्लिम की मुस्तनद किताबों से रोज़मर्रा की ज़िंदगी में काम आने वाली 40 मुख़्तसर और जामेअ हदीसें हिंदी तर्जुमे के साथ यहाँ दर्ज हैं।
Table of Contents
अक़ीदा, ईमान और नीयत की हदीसें (1 से 8)
- अमल का दारोमदार नीयत पर है: “इन्नमल आमालु बिन्-नियात” — बेशक आमाल का बदला नीयतों पर है।
📚 सहीह बुख़ारी, हदीस: 1 - दीन सरासर ख़ैरख़्वाही है: “अद्दीनुन नसीहा” — दीन लोगों का भला चाहने और वफ़ादारी का नाम है।
📚 सहीह मुस्लिम, हदीस: 55 - इस्लाम की बुनियाद 5 चीज़ों पर है: गवाही देना कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और मुहम्मद ﷺ उसके रसूल हैं, नमाज़ क़ायम करना, ज़कात देना, हज करना और रमज़ान के रोज़े रखना।
📚 सहीह बुख़ारी, हदीस: 8 - पाकी आधा ईमान है: “अत्तहूरु शत्रुल ईमान” — सफ़ाई और पाकीज़गी ईमान का आधा हिस्सा है।
📚 सहीह मुस्लिम, हदीस: 223 - नमाज़ दीन का सुतून है: “अस्सलातु इमादुद्दीन” — नमाज़ दीन का खंभा है, जिसने इसे क़ायम किया उसने दीन को क़ायम रखा।
📚 बैहक़ी, शुअबुल ईमान: 2550 - नमाज़ मेरी आँखों की ठंडक है: रसूलुल्लाह ने फ़रमाया: “और मेरी आँखों की ठंडक नमाज़ में रखी गई है।”
📚 सुनन नसाई, हदीस: 3939 - तौबा गुनाहों को धो देती है: “अत्ताइबु मिनज़ ज़म्बि कमन ला ज़म्बा लह” — गुनाह से सच्ची तौबा करने वाला ऐसा है जैसे उसने कोई गुनाह किया ही न हो।
📚 सुनन इब्ने माजा, हदीस: 4250 - दुआ इबादत का मग़्ज़ (निचोड़) है: “अद्दुआ-उ मुख्ख़ुल इबादा” — दुआ ही इबादत की रूह है।
📚 जामेअ तिर्मिज़ी, हदीस: 3371
अख़लाक़ और हुस्ने सुलूक की हदीसें (9 से 24)
- मुसलमान की पहचान: मुसलमान वह है जिसकी ज़बान और हाथ से दूसरे मुसलमान महफ़ूज़ रहें। (बुख़ारी: 10)
- मोमिन की मुहब्बत: तुममें कोई कामिल मोमिन नहीं हो सकता जब तक अपने भाई के लिए वही पसंद न करे जो अपने लिए पसंद करता है। (बुख़ारी: 13)
- पड़ोसी का हक़: जो अल्लाह और आख़िरत पर ईमान रखता है, उसे चाहिए कि अपने पड़ोसी को तकलीफ़ न दे। (बुख़ारी: 6018)
- मेहमान नवाज़ी: जो अल्लाह और आख़िरत पर ईमान रखता है, उसे चाहिए कि अपने मेहमान की इज़्ज़त करे। (मुस्लिम: 48)
- मुस्कुराना सदक़ा है: अपने भाई के सामने मुस्कुराना भी सदक़ा है। (तिर्मिज़ी: 1956)
- अच्छी बात कहना सदक़ा है: “अल-कलिमतुत तय्यिबतु सदक़ा” — अच्छी और मीठी बात कहना भी सदक़ा है। (बुख़ारी: 2989)
- ग़ुस्सा न करो: “ला तग़ज़ब” — ग़ुस्सा मत करो। (बुख़ारी: 6116)
- पहलवान कौन है?: सच्चा पहलवान वह नहीं जो पछाड़ दे, बल्कि पहलवान वह है जो ग़ुस्से के वक़्त अपने नफ़्स पर क़ाबू रखे। (बुख़ारी: 6114)
- रहमत का कानून: “मल्ला यरहम ला युरहम” — जो रहम नहीं करता उस पर रहम नहीं किया जाता। (बुख़ारी: 5997)
- चुग़लख़ोर की वईद: “ला यदख़ुलुल जन्नता क़त्तातुन” — चुग़लख़ोर जन्नत में दाख़िल न होगा। (बुख़ारी: 6056)
- हसद (जलन) से बचो: हसद नेकियों को इस तरह खा जाती है जैसे आग सूखी लकड़ी को। (अबू दाऊद: 4903)
- रिश्तेदारी जोड़ना: रिश्तेदारी तोड़ने वाला जन्नत में न जाएगा। (मुस्लिम: 2556)
- माँ-बाप की अज़मत: जन्नत माँ के क़दमों तले है। (नसाई: 3104)
- बाप की रज़ा: रब की रज़ा बाप की रज़ा में है, और रब की नाराज़गी बाप की नाराज़गी में है। (तिर्मिज़ी: 1899)
- बीवी के साथ हुस्ने सुलूक: तुममें बेहतरीन वह है जो अपनी बीवियों के लिए सबसे अच्छा हो। (तिर्मिज़ी: 3895)
- यतीम की कफ़ालत: मैं और यतीम की परवरिश करने वाला जन्नत में दो उंगलियों की तरह साथ होंगे। (बुख़ारी: 5304)
रोज़मर्रा की ज़िंदगी व दुनियावी आदाब (25 से 40)
- हलाल कमाई: अपने हाथ की कमाई से बेहतर किसी ने खाना नहीं खाया। (बुख़ारी: 2072)
- धोखाधड़ी की मनाही: “मन ग़श-शना फ़लैसा मिन्ना” — जिसने धोखा दिया वह हममें से नहीं। (मुस्लिम: 102)
- सौदा तय करने में नरमी: अल्लाह उस शख़्स पर रहम फ़रमाता है जो बेचते, ख़रीदते और तक़ाज़ा करते वक़्त नरमी बरते। (बुख़ारी: 2076)
- कर्ज़दार को मोहलत: जो किसी तंगदस्त क़र्ज़दार को मोहलत दे, अल्लाह उसे अर्श का साया अता फ़रमाएगा। (मुस्लिम: 3006)
- जुल्म से परहेज़: ज़ुल्म से बचो, क्योंकि ज़ुल्म क़यामत के दिन अंधेरों का सबब होगा। (मुस्लिम: 2578)
- रास्ते से तकलीफ़देह चीज़ हटाना: रास्ते से पत्थर, काँटा या गंदगी हटाना भी सदक़ा है। (बुख़ारी: 2989)
- सलाम की इशाअत: आपस में सलाम को आम करो, आपस में मोहब्बत बढ़ेगी। (मुस्लिम: 54)
- दाहिने हाथ से खाना: अल्लाह का नाम लो और अपने दाहिने हाथ से खाओ और अपनी तरफ़ से खाओ। (बुख़ारी: 5376)
- फ़िज़ूलख़र्ची से बचना: सादगी इख़्तियार करना ईमान का हिस्सा है। (अबू दाऊद: 4161)
- इल्म की तलब: इल्म हासिल करना हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है। (इब्ने माजा: 224)
- क़ुरआन की तालीम: तुममें सबसे बेहतर वह है जो क़ुरआन सीखे और सिखाए। (बुख़ारी: 5027)
- वक़्त की क़द्र: दो नेमतें ऐसी हैं जिनमें अक्सर लोग घाटे में रहते हैं: सेहत और फ़ुर्सत। (बुख़ारी: 6412)
- मोमिन की फ़िरासत: मोमिन एक बिल से दो बार नहीं डसा जाता। (बुख़ारी: 6133)
- नेक साथी की मिसाल: नेक साथी की मिसाल अत्तर बेचने वाले जैसी है (ख़ुशबू मिलती है)। (बुख़ारी: 5534)
- सच्चाई की राह: सच बोलो, चाहे वह कड़वा ही क्यों न हो। (इब्ने हिब्बान: 361)
- दरूद शरीफ़ की फ़ज़ीलत: जो मुझ पर एक बार दरूद भेजेगा, अल्लाह उस पर दस रहमतें नाज़िल फ़रमाएगा। (मुस्लिम: 408)
नमाज़ की पाबंदी के लिए नमाज़ का सही तरीक़ा हिंदी में, और तौबा के लिए अस्तग़फ़ार की दुआ पढ़ें।
Leave a Comment