Astagfirullah Ki Fazilat Aur Dua

Astagfirullah Ki Fazilat Aur Dua

☆ अस्तगफिरुल्लाह की फजीलत वा दुआ

तौबा का वुजूब

तौबा का वुजूब आयाते . कुरआनी और अहादीस से साबित है, फ़रमाने इलाही है इस आयत में अल्लाह तआला ने मोमिनों को हुक्म दिया है कि वह तौबा करें ताकि उनको कामयाबी मिले। दूसरी आयत में हैं लफ़्ज़ेनसूह ‘नसह’ से बना है जिसके माना हैं खालिसतन अल्लाह तआला के लिए तौबा करना जो तमाम ऐबों से पाक हो। Astag Firullah Ki Fazilat Aur Dua अल्लाह तआला के इस फ़रमान से साबित होती है-

-बेशक अल्लाह तआला तौबा करने वालों और पाक रहने वालों को महबूब रखता|

और फ़माने नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम है, तौबा करने वाला अल्लाह का दोस्त है और तौबा करने वाला उस इन्सान की तरह है जिस ने कोई गुनाह न किया हो ।

तौबा के बारे में इरशादाते नबवीया

फ़रमाने नबवी है कि रहमते खुदावन्दी को उस इन्सान की तौबा से ज्यादा खुशी होती है जो हलाकत खेज़ ज़मीन में अपनी सवारी पर खाने पीने के सामान लादें सफ़र कर रहा हो और वहां आराम की गरज से रुक जाए, वह सर रखे तो उसे नींद आ जाये. जब सो कर उठे तो उस की सवारी सामान के साथ गाइब हो और वह उस की तलाश में निकले यहां तक कि सख्त गर्मी और प्यास से बदहाल होकर उसी जगह वापस आ जाये जहां वह पहले सोया था और मौत के इन्तेज़ार में अपने बाज़ू का तकिया बना कर लेट जाये, अब जो वह जागा तो उसने देखा उस की सवारी सामान के साथ उस के क़रीब मौजूद है। अल्लाह तआला को बन्दे की तौबा से उस सवारी वाले शख़्स से भी ज्यादा खुशी होती है जिस का सामान जागने के बाद उस को मिल गया है।

हज़रते हसन रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि जब अल्लाह तआला ने हज़रते आदम अलैहिस्सलाम की तौबा कबूल फरमाई तो फरिश्तों ने उन्हें मुबारकबाद पेश की। जिबरील व मीकाईल अलैहिमुस्सलाम हाज़िर हुए और कहा, ऐ आदम अलैहिस्सलाम ! आपने तौबा कर के अपनी आँखों को ठन्डा कर लिया। आदम अलैहिस्सलाम ने फरमाया अगर इस तौबा की कबूलियत के बाद अल्लाह तआला से फिर सवाल करना पड़ा तो क्या होगा? अल्लाह तआला ने आदम अलैहिस्सलाम पर वही नाज़िल फ़रमाई कि ऐ आदम! तू ने अपनी औलाद को मेहनत और दुख तकलीफ का वारिस बनाया और हम ने उन्हें तौबा बख़्शी, जो भी मुझे पुकारेगा मैं तेरी तरह उस की पुकार को सुनूंगा, जो मुझ से मगफिरत का सवाल करेगा मैं उसे नाउम्मीद नहीं करूंगा, क्यों कि मैं करीब हूं दुआओं को कबूल करने वाला हूं, मैं तौबा करने वालों को उन की कब्रों से इस तरह उठाऊंगा कि वह हंसते मुस्कराते हुए आयेंगे, उन की दुआयें मकबूल होंगी।

फ़रमाने नबवी (अला साहेबिहिस्सलातु वस्सलाम) है, अल्लाह तआला का दस्ते रहमत रात के गुनहगारों के लिए सुबह तक और दिन के गुनहगारों के लिए रात तक फैला रहता है उस वक़्त तक कि जब पच्छिम से सूरज निकलेगा और तौबा का दरवाज़ा बन्द हो जाएगा (यानी क़ियामत तक अल्लाह तआला बन्दों की तौबा कबूल फरमाएगा)

रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशादे गिरामी है कि अगर तुम ने आसमान के बराबर गुनाह कर लिए और फिर शर्मिन्दा होकर तौबा कर ली तो अल्लाह तआला तुम्हारी तौबा क़बूल कर लेगा ।

फ़रमाने नबवी है- आदमी गुनाह करता है फिर उसी गुनाह की वजह से जन्नत में दाखिल होता है। पूछा गया हुज़ूर वह कैसे ? आपने फ़रमाया गुनाह के बाद फ़ौरन उस की आँखें अल्लाह तआला के दरबार में आंसू बहाती हैं।

फ़रमाने हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम है कि नदामत गुनाहों का कफ्फारा है । नबीए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशादे गिरामी है, गुनाहों से तौबा करने वाला ऐसा है जैसे उस ने कोई गुनाह न किया हो ।

हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की खिदमत में एक हबशी हाज़िर हुआ और अर्ज़ की या रसूलल्लाह मैं खतायें करता हूं, क्या मेरी तौबा कबूल होगी ? आपने फ़रमाया हाँ! वह कुछ दूर जाकर वापस लौट आया और दरियाफ्त किया कि जब मैं गुनाह करता हूं तो अल्लाह तआला देखता है? आपने इरशाद फ़रमाया हाँ! हबशी ने इतना सुनते ही एक चीख मारी और उस की रूह परवाज़ कर गई।

ज़िन्दगी की आखिरी सांस तक तौबा कुबूल होगी

रिवायत है कि जब अल्लाह तआला ने इबलीस को मलऊन करार दिया तो उस ने कियामत तक के लिए मुहलत मांगी, अल्लाह ने उसे मुहलत दे दी तो वह कहने लगा मुझे तेरे इज़्ज़त व जलाल की कसम जब तक इन्सान की ज़िन्दगी का रिश्ता काइम रहेगा मैं उसे गुनाहों पर उकसाता रहूंगा। रब्बुल इज़्ज़त ने फरमाया मुझे अपने इज़्ज़त व जलाल की कसम ! मैं उन की ज़िन्दगी की आखिरी सांसों तक उन के गुनाहों पर तौबा का पर्दा डालता रहूंगा।

फरमाने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम है, नेकियां गुनाहों को इस तरह दूर ले जाती हैं जैसे पानी मैल को बहा ले जाता है। (यानी दूर कर देता है) जनाब सईद बिन मुसैइब रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि यह आयत उस शख़्स के बारे में नाज़िल हुई जो गुनाह करता फिर तौबा कर लेता फिर गुनाह करता और फिर तौबा कर लेता. था ।

जनाबे फ़ुज़ैल रहमतुल्लाह अलैह का कौल है – रब्बे ज़ुल जलाल का इरशाद है, गुनहगारों को बशारत दे दो, अगर वह तौबा करें तो मैं कबूल कर लूंगा। सिद्दीक़ीन को आगाह कर दीजिए अगर मैं ने आमाल का वज़न किया तो उन्हें अज़ाब से कोई नहीं बचा सकता।

हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हुमा का इरशाद है जो गुनाहों की याद में शर्मिन्दा हो गया और उस का दिल ख़ौफे खुदा से काँप गया, उस के गुनाहों को मिटा दिया जाता है।

गुनाहों से बचाने वाला सिर्फ़ रब्बे जुलजलाल है

रिवायत है कि अल्लाह तआला के एक नबी से ख़ता सरज़द हुई, अल्लाह तआला वही की कि अगर तुम से दोबारा कोताही हुई तो मेरे अज़ाब से नहीं बच सकोगे! नबी ने अर्ज़ की ऐ अल्लाह! तू, तू है और मैं मैं! मुझे तेरे इज्ज़त व जलाल की क़सम ! अगर तू मुझे गुनाहों से न बचाए तो मैं नहीं बच सकूंगा। इस पर अल्लाह तआला ने उन्हें गुनाहों के ख्यालात से भी महफ़ूज़ कर दिया।

तौबा का दरवाज़ा कभी बन्द नहीं होता

हज़रते इब्ने मसऊद रज़ियल्लाहु अन्हुमा से एक शख़्स ने दरियाफ़्त किया मैं गुनाह कर के बहुत ज़्यादा शर्मिन्दा हूं, मेरे लिए तौबा है? आपने मुँह फेर लिया, जब दोबारा उस शख़्स की तरफ देखा तो आप की आँखों से आँसू बह रहे थे । फ़रमाया • जन्नत के आठ दरवाज़े हैं, खोले भी जाते हैं और बन्द भी किये जाते हैं सिवाए तौबा के दरवाज़े के, वह कभी भी बन्द नहीं होता। अमल करता रह और रब की रहमत से मायूस न हो ।

रिवायत है कि बनी इस्राईल में से एक जवान शख़्स ने बीस साल लगातार अल्लाह तआला की इबादत की, फिर बीस साल गुनाहों में गुज़ारे, एक बार आईना देखा तो उसे दाढ़ी में बुढ़ापे के आसार नज़र आये, वह बहुत ही गमगीन हुआ और बारगाहे रब्बुल इज्ज़त में गुज़ारिश की, ऐ रब्बे ज़ुलजलाल! मैं ने बीस साल तेरी इबादत की, फिर बीस साल गुनाहों में गुज़ारे, अब अगर मैं तेरी तरफ लौट आऊं तो मुझे क़बूल कर लेगा? उसने हाति गैबी की आवाज़ सुनी, वह कह रहा था तू ने हम से मुहब्बत की, हम ने तुझे महबूब बनाया। तू ने हमें छोड़ दिया, हम ने तुम्हें छोड़ दिया, तू ने गुनाह किये हम मौका दे दिया, अब अगर तू हमारी बारगाह में लौटेगा तो हम तुझे शरफे कबूलियत बख़्शेंगे।

तौबा के बारे में सरवरे कौनैन सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशादे गिरामी

हज़रते इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया जब बन्दा तौबा करता है, अल्लाह तआला उस की तौबा कबूल कर लेता है। मुहाफ़िज़ फ़रिश्ते उस के पिछले गुनाहों को भूल जाते हैं। उस के आज़ाए जिस्मानी उस की ग़लतियों को भूल जाते हैं, ज़मीन का वह टुकड़ा जिस पर उस ने गुनाह किया है और आसमान का वह हिस्सा जिस के नीचे उसने गुनाह किया है उस के गुनाहों को भूल जाते हैं। जब वह कियामत के दिन आएगा तो उस के गुनाहों पर गवाही देने वाला कोई नहीं होगा ।

हज़रते अली कर्रमल्लाहु वजहू से मरवी है हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि मख़्लूक की पैदाइश से चार हज़ार साल पहले अर्श के चारों तरफ़ लिख दिया गया था कि-जिसने तौबा की और ईमान लाया और नेक अमल किये, मैं उसे बख़्शने वाला हूं। छोटे और बड़े तमाम गुनाहों से तौबा फ़र्ज़े ऐन है क्यों कि छोटे गुनाहों पर इसरार उन्हे बड़े गुनाह बना देता है ।

तौब नसूह यह है कि इन्सान जाहिर व बातिन से तौबा करे और आइन्दा गुनाह न करने का पुख्ता इरादा करे, जो शख़्स जाहिरी तौर पर तौबा करता है उस की मिसाल ऐसे मुर्दार की तरह है जिस पर रेशम व ज़री की चादरें डाल दी गई हों और लोग उसे हैरत और तअज्जुब से देख रहे हों, जब उस से चादरें हटा ली जायें तो लोग मुँह फेर कर चल दें। इसी तरह देखावे की इबादत करने वालों को लोग तअज्जुब की निगाह से देखते रहते हैं लेकिन क़ियामत का दिन होगा तो उनके धोके का पर्दा चाक कर दिया जाएगा और फ़रिश्ते मुँह फेर कर चल देंगे। चुनान्चे रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया अल्लाह तआला तुम्हारी सूरतों को नहीं देखता बल्कि तुम्हारे दिलों को देखता है।

हज़रते इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से मरवी है क़ियामत के दिन बहुत से लोग ऐसे होंगे जो खुद को ताइब समझ कर आयेंगे मगर उन की तौबा कबूल नहीं हुई होगी, इस लिए कि उन्होंने तौबा के दरवाज़े को शर्मिन्दगी से मुस्तहकम (मज़बूत) नहीं किया होगा, तौबा के बाद गुनाह न करने का पक्का इरादा नहीं किया होगा । गुनाहों को अपनी इमकानी ताक़त तक दूर नहीं किया होगा और आसान चीज़ों के जवाज़ के सिलसिले में जो काम उन्होंने किये हैं और उन से बख्शिश चाहने में उन्होंने कोई तैयारी नहीं किया और उन के लिए यह बात आसान है कि अल्लाह तआला उस से राज़ी होजाये। गुनाहों को भूल जाना बहुत ख़तरनाक बात है, हर अक्लमन्द के लिए ज़रूरी है कि वह अपने नफ़्स का मुहासबा करता रहे और अपने गुनाहों को न भूले ।

• ऐ गुनाहों को शुमार करने वाले मुजरिम । अपने गुनाहों को मत भूल और गुज़री हुई गलतियों को याद करता रह ।
• मौत से पहले अल्लाह तआला की तरफ रुजूअ कर ले, गुनाहों से रुक जा और गलतियों को मान ले।

फ़क़ीह अबुल्लैस रहमतुल्लाह अलैह से मरवी है, हज़रते उमर रज़ियल्लाहु अन्हु एक मर्तबा हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की खिदमत में रोते हुए हाज़िर हुए। आप ने दरियाफ़्त फ़रमाया कि ऐ उमर! क्यों रोते हो? अर्ज़ किया हुजूर! दरवाज़े पर खड़े हुए जवान के गिरया (रोने) व ज़ारी ने मेरा जिगर जला दिया है। आप ने फ़रमाया उसे अन्दर लाओ! जब जवान खिदमत में हाज़िर हुआ तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने पूछा ऐ जवान तुम किस लिए रो रहे हो? अर्ज़ किया हुज़ूर मैं अपने गुनाहों की ज्यादती और रब्बे ज़ुलजलाल की नाराज़गी के ख़ौफ़ से रो रहा हूं। आप ने पूछा, क्या तू ने शिर्क किया है? कहा नहीं, या रसूलल्लाह ! (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम), क्या तू ने किसी को नाहक कत्ल किया है? अर्ज़ किया नहीं या रसूलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) आप ने दोबारा पूछा, अर्ज़ किया नहीं या रसूलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम), आप ने इरशाद फ़माया अगर तेरे गुनाह “सातों आसमानों, ज़मीनों और पहाड़ों के बराबर हों तब भी अल्लाह तआला अपनी रहमत से बख़्श देगा।

जवान बोला या रसूलल्लाह ! मेरा गुनाह उन से भी बड़ा है। । आपने फ़रमाया, तेरा गुनाह बड़ा है या कुर्सी? अर्ज़ किया मेरा गुनाह, आपने फ़रमाया, तेरा गुनाह बड़ा है या अर्शे इलाही? अर्ज़ किया मेरा गुनाह, आपने फ़रमाया, तेरा गुनाह बड़ा है या रब्बे ज़ुलजलाल! अर्ज़ कि रब्बे जुलजलाल बहुत ही अज़ीम है! हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया बिला शुब्हा जुर्मे अज़ीम को रब्बे अज़ीम ही माफ़ फ़रमाता है फिर आप ने फरमाया तुम मुझे अपने गुनाह तो बतलाओ । अर्ज़ की, हुज़ूर मुझे आप के सामने अर्ज़ करते हुए शर्म आती है। आप ने फरमाया कोई बात नहीं, तुम बताओ! अर्ज़ किया, हुज़ूर मैं सात साल से कफ़न चोरी कर रहा हूं। अन्सार की एक लड़की मर गई तो मैं उस का कफ़न चुराने जा पहुंचा, मैंने कब्र खोद कर कफ़न ले लिया और चल पड़ा, कुछ ही दूर गया था कि मुझ पर शैतान ग़ालिब आ गया और मैं उलटे क़दम वापस पहुंचा और लड़की से बद-कारी की, मैं गुनाह कर के अभी चन्द ही क़दम चला था कि लड़की खड़ी हो गई और कहने लगी, ऐ जवान ख़ुदा तुझे गारत करे तुझे उस निगहबान का ख़ौफ़ नहीं आया जो हर मज़लूम को ज़ालिम से उस का हक दिलाता है, तू ने मुझे मुर्दों की जमाअत से बरहना कर दिया और दरबारे खुदावन्दी में नापाक कर दिया है। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जब यह सुना तो फ़रमाया दूर होजा ऐ बदख़्त! तू जहन्नम की आग का मुस्तहिक है।

जवान वहां से रोता हुआ अल्लाह तआला से इस्तिगफार करता हुआ निकल गया । जब उसे इसी हालत में चालीस दिन गुज़र गये तो उस ने आसमान की तरफ़ निगाह की और कहा ऐ मुहम्मद व आदम व इब्राहीम (अलैहिमुस्सलाम) के रब ! अगर तू ने मेरे गुनाह को बख़्श दिया है तो हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और उनके सहाबा को मुत्तलअ फ़रमा और अगर ऐसा न हो तो आसमान से आग भेज कर मुझे जला दे और जहन्नम के अज़ाब से बचा ले उसी वक़्त हज़रते जिबरील अलैहिस्सलाम हुज़ूर की ख़िदमत में हाज़िर हुए और कहा, आप का रब आप को सलाम कहता है और पूछता है कि मख़्लूक को किसने पैदा किया है? आप ने फ़रमाया तमाम मख़्लूक को अल्लाह ने पैदा किया है और उसी ने सबको रिज़्क दिया है, तब जिबरील ने कहा अल्लाह तआला फ़रमाता है मैं ने जवान की तौबा क़बूल कर ली है। पस हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवान को बुला कर उसे तौबा की कबूलियत की खुशखबरी सुनाई ।

एक दर्दअंगेज़ तौबा

हज़रते मूसा अलैहिस्सलाम के ज़माने में एक शख़्स ऐसा था जो अपनी तौबा पर कभी क़ाइम नहीं रहता था, जब भी वह तौबा करता उसे तोड़ देता यहां तक कि उसे इस हाल में बीस साल गुज़र गये। अल्लाह तआला ने हज़रते मूसा अलैहिस्सलाम की तरफ वही की, मेरे उस बन्दे को कह दो मैं तुझ से सख्त नाराज़ हूं। जब हज़रते मूसा अलैहिस्सलाम ने उस आदमी को अल्लाह का पैगाम दिया तो बहुत गमगीन हुआ और जंगलों की तरफ निकल गया, वहां जाकर अल्लाह तआला के दरबार में अर्ज़ किया ऐ रब्बे ज़ुलजलाल! तेरी रहमत जाती रही या मेरे गुनाहों ने तुझे दुख दिया? तेर बख़्श के ख़ज़ाने ख़त्म हो गये या बन्दों पर तेरी निगाहे करम नहीं रही? तेरे माफी दरगुज़र से कौन सा गुनाह बड़ा है? तू करीम है, मैं बखील हूं। क्या मेरा बुख़्ल तेरे करम पर ग़ालिब आ गया है? अगर तू ने अपने बन्दों को अपनी रहमत से महरूम कर दिया तो वह किस के दरवाज़े पर जायेंगे? अगर तू ने उन्हें दरबार से निकाल दिया तो वह कहां जायेंगे? ऐ रब्बे कादिर व कहार! अगर तेरी बख्शिश जाती रही और मेरे लिए अज़ाब ही रह गया है तो तमाम गुनाहगारों का अज़ाब मुझे दे दे, मैं उन पर अपनी जान कुर्बान करता हूं । अल्लाह तआला ने मूसा अलैहिस्सलाम से फ़रमाया जाओ और मेरे बन्दे से कह दो कि तू ने मेरे कमाले कुदरत और अफ़्व व दरगुज़र की हकीकत को समझ लिया है । अगर तेरे गुनाहों से ज़मीन भर जाये तब भी मैं बख़्श दूंगा ।

रसूले करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद है कि अल्लाह तआला को गुनहगार तौबा करने वाले की आवाज़ से ज़्यादा महबूब और कोई आवाज़ नहीं है, जब वह अल्लाह को बुलाता है तो अल्लाह तआला फ़रमाता है, मैं मौजूद हूं, जो चाहे मांग! मेरी बारगाह में तेरा रुतबा मेरे बाज़ फ़रिश्तों के बराबर है। मैं तेरे दायें बायें ऊपर हूं और तेरी दिली धड़कन से ज्यादा करीब हूं, ऐ फ़रिश्तों! तुम गवाह हो जाओ कि मैं ने इसे बख़्श दिया है।

हज़रते जुन्नून मिस्री रहमतुल्लाह अलैह ने कहा है, अल्लाह तआला के बहुत से ऐसे बन्दे हैं जिन्हों ने ग़लतियों के पौदे लगाये, उन्हें तौबा का पानी दिया और हसरत व नदामत का फल खाया। वह दीवानगी के बग़ैर दीवाने कहलाये और बगैर किसी मशक्कत के लज्ज़तें हासिल कीं। यह लोग अल्लाह और उस के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की मअरेफ्त रखने वाले फ़सीह व बलीग़ हज़रात हैं और बेमिसाल हैं, इन्हों ने मुहब्बत के जाम पिये और मुसीबतों पर सब्र करने की दौलत से माला माल. हुए फिर आलमे मलकूत में उनके दिल ग़मज़दा हो गए और आलमे जबरूत हिजाबात की सैर ने उनके अफकार को जिला बख़्शी, उन्हों ने शर्मिन्दगी के खेमों में बसेरा किया, अपनी ख़ताओं के सहीफों को पढ़ा और गिरया व ज़ारी (रोने गिड़गिड़ाने) में मशगूल हो गये, यहां तक कि वह अपनी परहेज़गारी की बदौलत जुहद के ऊँचे मरातिब पर फ़ाइज़ हुए, उन्होंने दुनिया को छोड़ने की कड़वाहट को मीठा समझा और सख्त बिस्तरों को इन्तेहाई नर्म जाना, यहां तक कि उन्हों ने नजात की राह और सलामती की बुनियादों को पा लिया, उन की रूहों को जन्नत के बाग़ों में जगह मिली और हमेशा की ज़िन्दगी के मुस्तहिक करार पाये। उन्हों ने रोने धोने की खन्दकों को पाट दिया और ख़्वाहिशात के पुलों को पार कर गये यहां तक कि वह इल्म के हमसाए हुए और हिकमत व दानाई के तालाब से सैराब हुए. वह अकलमन्दी व समझदारी की कश्तियों में सवार हुए, उन्हों ने सलामती के दरिया में नजात की दौलत से किले बनाये और राहत के बागों और इज़्ज़त व करामत के खजानों के मालिक बन गये।

अस्तग़फ़ार किसे कहते है ?

इंसानी फितरत में है की उससे गलती या गुनाह हो जाते है और इसके बाद इंसान अपने किये पर शर्मिंदा हो कर सच्चे दिल से अल्लाह से माफ़ी तालाब करता है तो उसे अस्तग़फ़ार कहते है

रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया जो इंसान अस्तग़फ़ार astaghfar dua (तौबा) को अपने ऊपर लाजिम कर ले

तो अल्लाह सुभानुताला उसको हर तंगी से निकलने का एक रास्ता अता फरमाएगा और हर गम से निजात देगा और उसे ऐसी जगह से रोज़ी अता करेंगे जहाँ से उसको गुमान भी नहीं होगा

( मुअज्जम अल कबीर तबरानी , सही ) 

आपको माफी क्यों मांगनी चाहिए?

जो भी गुनाह हम करते हैं वो क़यामत के दिन हमारे सामने होगा है, हाँ जिसको अगर अल्लाह तआला चाहे माफ कर दे तो अलग बात है।

और हम जानते हैं कि इंसान होने के नाते हम में बहुत ही ऐब हैं और हमसे बेशुमार गुनाह होते रहते हैं । इसलिए हमें हमेशा गुनाहों के लिए माफ़ी मांगते रहना चाहिए

ताकि अल्लाह ताला हमारे गुनाहों को मिटा दे और जन्नत के रास्ते को आसान कर दे ।

अस्तग़फ़ार का मतलब

अस्तग़फ़ार का मतलब अपनी गलतियों की माफ़ी माँगना और गुनाहों की बख्शीश कराना है।

हमारी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी हक़ीक़त यही है कि हम कितनी भी कोशिश कर लें, लेकिन फिर भी हम अक्सर गलती कर देते है और हम से गुनाह हो जाते है।

लेकिन अल्लाह तआला का वादा है कि जब हम अपने गुनाहों की माफ़ी मागेंगे और मगफिरत तलब करेंगे तो अल्लाह हमें माफ कर देगा चाहे हमारे गुनाह कितने ही बड़े क्यों न हों।

हदीस :   नबी ए करिम ( सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम ) फरमाते हैं।

“जो शख्स अस्तगफार को अपने उपर लाजीम करले तो अल्लाह इसके लिए हर तंगी से निकलने का रास्ता निकाल देता है।, और हर गमो परेशानी से इसे निजात देता है, और उसे ऐसी जगह से रिज्क देता हैं जिसका उसे गुमान भी नही होता.

( अबु दाऊद, इब्ने मजा, )

अस्तग़फ़ार क्या हैं?

सभी दुआओं की तरह, मगफिरत के लिए भी हमे कुछ अस्तग़फ़ार दुआ (Astaghfirullah dua in hindi) कुरान और हदीस से सिखाई गई हैं, ताकि हम उन्हें पढ़कर अल्लाह से माफी मांग सके और अल्लाह की रज़ा पा सके।

यहाँ कुछ इस्तगफार दुआएं हैं जिन्हें आप अपनी रोज़ाना की इबादत में शामिल कर सकते हैं |

☆ अस्तगफार की दुआ

अस्तगफिरुल्लाह रब्बी मिन कुल्ली जनाबीव वातुबु इलैह

या अल्लाह! मगफिरत चाहता हुं हर किस्म के गुनाह से और मै तेरी बारगाह मे तौबा करता हुं।

आमीन

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