Skip to content
Camel Ki Zakat: ऊँट की ज़कात का निसाब और शरई तरीक़ा
Bahar E Shariat

Camel Ki Zakat: ऊँट की ज़कात का निसाब और शरई तरीक़ा

admin
admin
8 min read 18 views

Camel Ki Zakat (ऊँट की ज़कात) इस्लामी शरीअत में मवेशियों की ज़कात का एक अहम बाब है। सहीहैन (बुख़ारी व मुस्लिम) की मोतबर हदीसों और सुन्नी हनफ़ी फ़िक़्ह के मुताबिक़ पाँच ऊँट से कम में कोई ज़कात वाजिब नहीं होती। जब पाँच या पाँच से ज़्यादा ऊँट हों और वे साल का ज़्यादातर हिस्सा जंगलों या चरागाहों में मुफ़्त चरते हों (साइमा), तो उन पर शरीअत के तयशुदा क़ायदे से ज़कात अदा करना फ़र्ज़ है।

ऊँट की ज़कात के वाजिब होने की शराइत

सुन्नी हनफ़ी फ़िक़्ह की मोतबर किताब बहारे शरीअत (हिस्सा 5) के मुताबिक़ ऊँटों पर ज़कात वाजिब होने के लिए दर्ज ज़ैल शराइत का पाया जाना ज़रूरी है:

  1. निसाब पूरा होना: कम से कम 5 ऊँट हों। 5 से कम (1 से 4 ऊँट) में कोई ज़कात नहीं।
  2. साल गुज़रना (हौलान-ए-हौल): उन 5 ऊँटों पर इस्लामी साल (क़मरी साल) का मुकम्मल गुज़रना ज़रूरी है।
  3. साइमा (चराई पर पलने वाले) होना: ऊँट साल के आधे से ज़्यादा वक़्त चरागाहों में मुफ़्त चर कर गुज़र-बसर करते हों। अगर उन्हें घर पर चारा ख़रीद कर खिलाया जाता है (माअलूफ़ा), तो उन पर ज़कात वाजिब नहीं।
  4. बार-बरदारी या सवारी के न होना: जो ऊँट सवारी, बोझा ढोने या खेती के कामों के लिए रखे गए हों (अवामिल), उन पर ज़कात नहीं है। हाँ अगर वे तिजारत (ख़रीद-फ़रोख़्त) के लिए हों तो उनकी क़ीमत पर 2.5% ज़कात होगी।

हदीस-ए-मुबारका:

“हज़रत अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ‎ﷺ‎ ने इरशाद फ़रमाया: ‘पाँच ऊँटों से कम में कोई ज़कात नहीं है।'”

📚 हवाला: सहीह बुख़ारी, किताबुज़्ज़कात, हदीस: 1447; सहीह मुस्लिम, हदीस: 979।

Camel Ki Zakat का मुकम्मल निसाब चार्ट (5 से 200 ऊँट)

सहीह बुख़ारी में अमीरुल मोमिनीन हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) द्वारा हज़रत अनस को बहरीन भेजे गए मुबारक फ़रमान के मुताबिक़ ऊँटों की ज़कात का विस्तृत हिसाब यह है:

ऊँटों की तादाद (निसाब) वाजिब ज़कात (क्या देना होगा) उम्र व शरई वज़ाहत
1 से 4 ऊँट कुछ नहीं (माफ़) निसाब से कम है।
5 से 9 ऊँट 1 बकरी (बकरा या बकरी) कम से कम 1 साल की उम्र हो।
10 से 14 ऊँट 2 बकरियाँ दोनों कम से कम 1 साल की हों।
15 से 19 ऊँट 3 बकरियाँ 1 साल या उससे ज़्यादा उम्र की।
20 से 24 ऊँट 4 बकरियाँ 1 साल या उससे ज़्यादा उम्र की।
25 से 35 ऊँट 1 बिन्ते मख़ाज़ (بنت مخاض) ऊँट का मादा बच्चा जो 1 साल पूरा कर दूसरे साल में हो।
36 से 45 ऊँट 1 बिन्ते लबून (بنت لبون) मादा ऊँटनी जो 2 साल पूरे कर तीसरे साल में हो।
46 से 60 ऊँट 1 हिक्क़ा (حقة) मादा ऊँटनी जो 3 साल पूरे कर चौथे साल में हो।
61 से 75 ऊँट 1 जिज़आ (جذعة) मादा ऊँटनी जो 4 साल पूरे कर पाँचवें साल में हो।
76 से 90 ऊँट 2 बिन्ते लबून दो-दो साल पूरी कर चुकी मादा ऊँटनियां।
91 से 120 ऊँट 2 हिक्क़ा तीन-तीन साल पूरी कर चुकी मादा ऊँटनियां।
121 से 145 ऊँट 2 हिक्क़ा + हर 5 पर 1 बकरी मसलन 125 में 2 हिक्क़ा और 1 बकरी।
150 ऊँट 3 हिक्क़ा तीन-तीन साल की तीन मादा ऊँटनियां।
200 ऊँट 4 हिक्क़ा या 5 बिन्ते लबून मालिक को दोनों में से कोई एक देने का इख़्तियार है।

📚 हवाला: बहारे शरीअत, हिस्सा 5, सफ़ा 32-33; दुर्रे मुख़्तार, किताबुज़्ज़कात; व फ़तावा आलमगीरी।

ऊँट की ज़कात के अहम फ़िक़्ही मसाइल

  1. मादा होना लाज़िमी है: जहाँ ऊँट का बच्चा देना मुक़र्रर है (जैसे बिन्ते मख़ाज़ या बिन्ते लबून), वहाँ मादा का होना ज़रूरी है। अगर नर दिया जाए तो वह उस मादा की क़ीमत के बराबर होना चाहिए, वरना क़ुबूल नहीं होगा।
  2. अफ़्व (दरमियानी तादाद माफ़): दो निसाबों के बीच की तादाद माफ़ है। मसलन 5 से 9 के बीच में 6, 7 या 8 ऊँट हों तब भी सिर्फ़ 1 ही बकरी देनी होगी।
  3. क़ीमत अदा करना: हनफ़ी मज़हब में जानवर के बदले उसकी बाज़ारू क़ीमत नक़द रुपयों में अदा करना भी पूरी तरह जाइज़ और दुरुस्त है।

मवेशियों और दीगर अमवाल की ज़कात के लिए हमारे विशेष लेख Bakriyon Ki Zakat और Zakat in Islam ज़रूर पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: Camel Ki Zakat में कम से कम कितने ऊँटों पर ज़कात फ़र्ज़ होती है?

पाँच ऊँटों पर ज़कात फ़र्ज़ होती है। 5 से कम ऊँटों में शरीअत के मुताबिक़ कोई ज़कात वाजिब नहीं है।

Q2: क्या घर में चारा खाकर पलने वाले ऊँटों पर ज़कात है?

नहीं, जो ऊँट साल के अक्सर हिस्से में घर पर ख़रीद कर चारा खिलाए जाते हैं (माअलूफ़ा), या जो बोझा ढोने और हल चलाने के काम आते हैं, उन पर ज़कात वाजिब नहीं होती।

Q3: बिन्ते मख़ाज़ और बिन्ते लबून किसे कहते हैं?

बिन्ते मख़ाज़ उस मादा ऊँटनी को कहते हैं जो 1 साल की उम्र पूरी कर दूसरे साल में दाख़िल हो चुकी हो। और बिन्ते लबून वह ऊँटनी है जो 2 साल पूरी कर तीसरे साल में हो।

Q4: क्या ऊँट की ज़कात में जानवर की जगह पैसे दे सकते हैं?

हाँ, सुन्नी हनफ़ी फ़िक़्ह के मुताबिक़ मालिके निसाब को यह इख़्तियार है कि वह वाजिब जानवर की जगह उसकी बाज़ारू क़ीमत नक़द रक़म में ग़रीबों और मुस्तहिक़ीन को दे दे।

How useful was this post?

Click on a star to rate it!

0.0 out of 5 · 0 votes

No comments yet

Be the first to share your thoughts.

Leave a Comment

1-Click Google Verification to post comment:
To prevent spam, comments require a verified Google account (no password needed, only name & email).