Bakriyon Ki Zakat (बकरियों की ज़कात) का शरीई निसाब और अहकाम जानना हर उस मुसलमान पर लाज़िम है जो बकरियों, भेड़ों या दुम्बों का मालिक है। हदीस-ए-रसूल और सुन्नी हनफ़ी फ़िक़्ह (बहारे शरीअत) के मुताबिक़ चालीस (40) से कम बकरियों पर कोई ज़कात वाजिब नहीं होती। जब 40 बकरियाँ पूरी हो जाएँ और उन पर एक क़मरी साल गुज़र जाए, तो एक बकरी ज़कात में देना फ़र्ज़ हो जाता है।
बकरियों की ज़कात वाजिब होने की शराइत
बकरियों पर ज़कात वाजिब होने के लिए इस्लामी शरीअत में चार बुनियादी शर्ते हैं:
- निसाब-ए-कामिल: कम से कम 40 बकरियाँ मौजूद हों। 39 बकरियों पर भी कोई ज़कात नहीं।
- साइमा (चराई पर पलने वाली): बकरियाँ साल के अक्सर हिस्से (कम से कम 6 महीने से ज़्यादा) जंगलों और मुफ़्त चरागाहों में चरती हों। अगर वे घर पर ख़रीद कर चारा खिलाकर पाली जाती हैं तो उन पर ज़कात वाजिब नहीं।
- साल का गुज़रना: निसाब का मालिक होने के बाद पूरा एक इस्लामी साल उस पर गुज़र चुका हो।
- जानवर की उम्र: ज़कात में जो बकरी, बकरा या भेड़ दी जाए, उसकी उम्र कम से कम 1 साल पूरी होनी चाहिए। एक साल से कम उम्र का बच्चा ज़कात में नहीं लिया जाएगा।
सहीह बुख़ारी की हदीस:
“हज़रत अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) बयान करते हैं कि हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने उन्हें बहरीन का गवर्नर बनाते वक़्त रसूलुल्लाह ﷺ के मुक़र्रर फ़रमाए फ़राइज़े सदक़ा लिख कर दिए, जिसमें था: ‘चालीस से एक सौ बीस तक बकरियों में एक बकरी वाजिब है…'”
📚 हवाला: सहीह बुख़ारी, किताबुज़्ज़कात, हदीस: 1454।
Bakriyon Ki Zakat का मुकम्मल निसाब चार्ट
सुन्नी हनफ़ी फ़िक़्ह और बहारे शरीअत (हिस्सा 5, सफ़ा 34-38) के मुताबिक़ बकरियों की ज़कात का मुकम्मल हिसाब इस तरह है:
| बकरियों की तादाद | वाजिब ज़कात | शरई अहकाम व तफ़सील |
|---|---|---|
| 1 से 39 बकरियाँ | कुछ नहीं (माफ़) | निसाब से कम होने के सबब मुआफ़ है। |
| 40 से 120 बकरियाँ | 1 बकरी | नर या मादा दोनों दे सकते हैं, बशर्ते 1 साल का हो। |
| 121 से 200 बकरियाँ | 2 बकरियाँ | दोनों कम से कम 1-1 साल की हों। |
| 201 से 399 बकरियाँ | 3 बकरियाँ | कम से कम 1-1 साल की उम्र की। |
| 400 बकरियाँ | 4 बकरियाँ | इसके बाद हर 100 बकरियों पर 1 बकरी बढ़ती जाएगी। |
| 500 बकरियाँ | 5 बकरियाँ | हर सौ पर एक बकरी का क़ायदा जारी रहेगा। |
📚 हवाला: बहारे शरीअत, हिस्सा 5, सफ़ा 34-38; दुर्रे मुख़्तार व रद्दुल मुहतार; व फ़तावा आलमगीरी।
बकरियों की ज़कात के ज़रूरी मसाइल
- भेड़ व दुम्बा भी बकरियों में शामिल हैं: भेड़ और दुम्बा बकरियों की ही जिन्स में शुमार होते हैं। अगर किसी के पास 25 बकरियाँ और 15 भेड़ें हों तो दोनों मिलकर 40 हो गईं, लिहाज़ा ज़कात वाजिब होगी।
- दरमियानी तादाद (अफ़्व) माफ़ है: 40 से 120 के बीच की बकरियाँ माफ़ हैं। अगर किसी के पास 80 या 100 बकरियाँ हों तब भी सिर्फ़ 1 ही बकरी देनी होगी।
- दरमियाने दर्जे का जानवर देना: ज़कात में बहुत ज़्यादा बूढ़ा, अंधा, लंगड़ा या ऐबदार जानवर नहीं देना चाहिए। न ही मुसद्दिक़ (वुसूल करने वाले) को सबसे उम्दा या बच्चा पिलाने वाली दूधिया बकरी छीनने का हक़ है, बल्कि दरमियाने दर्जे का तंदुरुस्त जानवर दिया जाएगा।
- क़ीमत देने का इख़्तियार: हनफ़ी फ़िक़्ह के मुताबिक़ बकरी के बदले बाज़ारू क़ीमत के पैसे देना भी अफ़ज़ल व जाइज़ है।
सोने, चाँदी और नक़दी की ज़कात की मालूमात के लिए हमारे मक़ाले Sona Chandi OR Tijarat Ke Maal Ki Zakat और Zakat पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: Bakriyon Ki Zakat में कम से कम कितनी बकरियों पर ज़कात फ़र्ज़ है?
कम से कम 40 बकरियों पर 1 बकरी ज़कात फ़र्ज़ होती है। 40 से कम बकरियाँ होने पर शरीअत में कोई ज़कात नहीं है।
Q2: क्या ज़कात में बकरा दिया जा सकता है?
हाँ, दुर्रे मुख़्तार के मुताबिक़ ज़कात देने वाले को इख़्तियार है कि वह बकरी दे या बकरा। बशर्ते उसकी उम्र कम से कम 1 साल पूरी हो चुकी हो।
Q3: क्या भेड़ और दुम्बे को बकरियों के साथ गिना जाएगा?
हाँ, भेड़ और दुम्बा बकरियों की ही जिन्स में शामिल हैं। निसाब पूरा करने के लिए दोनों को एक साथ मिलाकर शुमार किया जाएगा।
Q4: अगर बकरियाँ घर पर चारा खाकर पलती हों तो क्या ज़कात लगेगी?
नहीं, अगर बकरियों को घर पर चारा ख़रीद कर खिलाया जाता है और वे जंगलों या चरागाहों में नहीं चरतीं (माअलूफ़ा), तो उन पर मवेशी की ज़कात वाजिब नहीं होती, जब तक कि वे तिजारत (बेचने के कारोबार) के लिए न हों।
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