Sona Chandi OR Tijarat Ke Maal Ki Zakat (सोने, चाँदी और माल-ए-तिजारत की ज़कात) हर उस साहिब-ए-हैसियत मुसलमान पर फ़र्ज़ है जिसका माल शरई निसाब तक पहुँचता हो और उस पर एक क़मरी साल गुज़र चुका हो। कुरआन मजीद और सुन्नी हनफ़ी फ़िक़्ह (बहारे शरीअत) के मुताबिक़ सोने का निसाब साढ़े सात तोला (87.48 ग्राम) और चाँदी का निसाब साढ़े बावन तोला (612.36 ग्राम) है, जिस पर 2.5% (चालीसवाँ हिस्सा) ज़कात अदा करना लाज़िम है।
सोना, चाँदी और माल-ए-तिजारत का शरई निसाब
इस्लामी शरीअत में अमवाल-ए-ज़कात के निसाब की मुकम्मल पैमाइश इस तरह तय की गई है:
| माल की क़िस्म | पारंपरिक वज़न (तोला) | आधुनिक ग्राम पैमाइश | वाजिब ज़कात की शरह |
|---|---|---|---|
| ख़ालिस सोना (Gold) | साढ़े 7 तोला (7.5 Tola) | 87.48 ग्राम | 2.5% (चालीसवाँ हिस्सा) |
| ख़ालिस चाँदी (Silver) | साढ़े 52 तोला (52.5 Tola) | 612.36 ग्राम | 2.5% (चालीसवाँ हिस्सा) |
| माल-ए-तिजारत (Business Goods) | चाँदी के निसाब की क़ीमत | 612.36 ग्राम चाँदी के बराबर बाज़ारू मूल्य | 2.5% (कुल मूल्य पर) |
| नक़दी व बैंक बैलेंस (Cash) | चाँदी के निसाब की रक़म | 612.36 ग्राम चाँदी की मौजूदा नक़द क़ीमत | 2.5% (कुल रक़म पर) |
📚 हवाला: बहारे शरीअत, हिस्सा 5, सफ़ा 25-31; फ़तावा रज़विया, जिल्द 10; व दुर्रे मुख़्तार।
सोने-चाँदी की ज़कात के ज़रूरी फ़िक़्ही मसाइल
- इस्तेमाल के ज़ेवरात पर ज़कात: सुन्नी हनफ़ी मज़हब का मुत्तफ़िक़ा फ़ैसला है कि औरतें जो सोने या चाँदी के ज़ेवर पहनती हैं, उन पर भी ज़कात वाजिब है, बशर्ते वे निसाब तक पहुँचते हों। सिर्फ़ इस्तेमाल में होने की वजह से ज़कात माफ़ नहीं होती।
- सोना और चाँदी दोनों मौजूद हों: अगर किसी के पास न पूरा साढ़े सात तोला सोना है और न साढ़े बावन तोला चाँदी, बल्कि थोड़ा सोना और थोड़ी चाँदी है (या थोड़ी नक़दी है), तो दोनों की क़ीमत जोड़कर देखी जाएगी। अगर दोनों की कुल क़ीमत साढ़े बावन तोला चाँदी की क़ीमत तक पहुँच जाए, तो पूरे माल पर 2.5% ज़कात वाजिब होगी।
- सोने में मिलावट का हुक्म: अगर सोने में खोट (मिलावट) आधी से कम हो, तो वह पूरा सोना माना जाएगा। और अगर खोट आधी या उससे ज़्यादा हो, तो वह सोने के हुक्म में नहीं बल्कि आम धातु के हुक्म में होगा, जब तक कि वह बेचने की नीयत से न हो।
- कर्ज़ और वाजिबुल-अदा रक़म: जो रक़म इंसान पर फ़ौरी कर्ज़ हो (Liability), उसे कुल माल में से घटा दिया जाएगा। बची हुई रक़म अगर निसाब तक पहुँचेगी तो उस पर ज़कात लगेगी।
माल-ए-तिजारत (व्यापारिक स्टॉक) की ज़कात कैसे निकालें?
दुकानदार या व्यापारी अपने उस माल की ज़कात कैसे निकाले जो उसने नफ़ा कमाने और बेचने की नीयत से ख़रीदा है? इसका तरीक़ा यह है:
- साल ख़त्म होने के दिन दुकान के तमाम बिकने वाले सामान (Stock) का मौजूदा बाज़ारू थोक मूल्य (Wholesale Value) आँकें।
- दुकान की अलमारियाँ, काउंटर, कंप्यूटर, गाड़ियाँ या फ़र्नीचर पर ज़कात नहीं है क्योंकि वे बेचने के लिए नहीं हैं।
- बाज़ार में ग्राहकों पर जो उधारी बकाया है और मिलने की उम्मीद है, उसे भी शामिल करें।
- व्यापारिक कर्ज़ (जो सप्लायर को देना है) उसे घटा दें।
- बाक़ी बची शुद्ध रक़म का 2.5% (रुपये में ₹100 पर ₹2.50 या ₹1,00,000 पर ₹2,500) ग़रीबों को अदा करें।
ज़कात की अहमियत और मुस्तहिक़ीन की पूरी जानकारी के लिए हमारा गाइड Zakat और मवेशियों की ज़कात के लिए Camel Ki Zakat ज़रूर पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: Sona Chandi OR Tijarat Ke Maal Ki Zakat में कितना प्रतिशत देना होता है?
सोना, चाँदी, माल-ए-तिजारत और नक़द रक़म पर कुल बचत या मूल्य का 2.5% यानी चालीसवाँ हिस्सा (1/40) ज़कात में देना फ़र्ज़ होता है।
Q2: क्या इस्तेमाल करने वाले रोज़मर्रा के सोने के ज़ेवरों पर ज़कात है?
हाँ, हनफ़ी मज़हब और बहारे शरीअत के मुताबिक़ इस्तेमाल के ज़ेवरात पर भी हर साल ज़कात वाजिब होती है अगर वे निसाब तक पहुँचते हों।
Q3: अगर किसी के पास 4 तोला सोना और ₹20,000 नक़द हों तो क्या ज़कात लगेगी?
हाँ, जब सोना पूरा निसाब (7.5 तोला) न हो लेकिन साथ में नक़दी या चाँदी हो, तो दोनों की क़ीमत जोड़कर चाँदी के निसाब से मिलाई जाएगी। चाँदी के निसाब (52.5 तोला) से ज़्यादा मूल्य होने पर कुल रक़म पर 2.5% ज़कात लगेगी।
Q4: दुकान के फ़र्नीचर और मशीनरी पर ज़कात क्यों नहीं लगती?
क्योंकि ज़कात सिर्फ़ उस माल पर वाजिब होती है जो नामी (बढ़ने वाला) हो या बेचने की नीयत से रखा गया हो। दुकान की मशीनरी, फ़र्नीचर और औज़ार ‘हाजत-ए-अस्लिया’ (बुनियादी ज़रूरतों) में आते हैं, इसलिए उन पर ज़कात नहीं है।
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