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EID Ki Namaz Ka Tarika: 6 तकबीरों के साथ सुन्नी हनफ़ी मुकम्मल तरीक़ा
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EID Ki Namaz Ka Tarika: 6 तकबीरों के साथ सुन्नी हनफ़ी मुकम्मल तरीक़ा

admin
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EID Ki Namaz Ka Tarika हर आक़िल, बालिग़ मुसलमान मर्द पर जानना ज़रूरी है क्योंकि ईदुल फ़ित्र और ईदुल अज़हा की 2 रकअत नमाज़ 6 ज़ाइद तकबीरों के साथ वाजिब है। सुन्नी हनफ़ी फ़िक़्ह और बहारे शरीअत के मुताबिक़ ईद की नमाज़ का सही तरीक़ा, नीयत, तकबीराते तशरीक़ और तमाम ज़रूरी मसाइल यहाँ तफ़सील से दिए गए हैं।

Table of Contents

ईद की नमाज़ की नीयत कैसे करें?

नमाज़ में नीयत दिल के पक्के इरादे का नाम है, लेकिन ज़बान से कह लेना मुस्तहब व बेहतर है ताकि दिल को इत्मीनान हो जाए:

“नीयत की मैंने 2 रकअत नमाज़ ईदुल फ़ित्र (या ईदुल अज़हा) की, 6 ज़ाइद तकबीरों के साथ, वाजिब, वास्ते अल्लाह तआला के, मुँह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़, पीछे इस इमाम के — अल्लाहु अकबर।”

EID Ki Namaz Ka Tarika: स्टेप-बाय-स्टेप मुकम्मल गाइड

हनफ़ी मज़हब में ईद की नमाज़ में कुल 6 ज़ाइद तकबीरें होती हैं — 3 पहली रकअत में क़िरात से पहले और 3 दूसरी रकअत में क़िरात के बाद। आसान तरीक़ा यह है:

पहली रकअत का तरीक़ा

  1. तकबीर-ए-तहरीमा: नीयत करके दोनों हाथ कानों तक उठाएँ और ‘अल्लाहु अकबर’ कहते हुए नाफ़ के नीचे बाँध लें।
  2. सना पढ़ें: हाथ बाँधकर आहिस्ता आवाज़ में सुब्हाना कल्लाहुम्मा (सना) पढ़ें।
  3. पहली ज़ाइद तकबीर: इमाम के साथ दोनों हाथ कानों तक उठाएँ और ‘अल्लाहु अकबर’ कहकर हाथ छोड़ दें (लटका दें)।
  4. दूसरी ज़ाइद तकबीर: फिर हाथ कानों तक उठाएँ और ‘अल्लाहु अकबर’ कहकर हाथ छोड़ दें।
  5. तीसरी ज़ाइद तकबीर: फिर हाथ कानों तक उठाएँ और ‘अल्लाहु अकबर’ कहकर नाफ़ के नीचे बाँध लें।
  6. क़िरात व रुकू-सुजूद: इसके बाद इमाम तअव्वुज़ व तस्मिया पढ़कर सूरह फ़ातिहा और कोई सूरह (जैसे सूरह अल-आला) बुलंद आवाज़ में पढ़ेगा। फिर मामूल के मुताबिक़ रुकू और दो सज्दे करके दूसरी रकअत के लिए खड़े हो जाएँ।

💡 याद रखने का आसान क़ायदा: जहाँ तकबीर के बाद कुछ पढ़ना है (जैसे पहली तकबीर और तीसरी ज़ाइद तकबीर), वहाँ हाथ बाँध लिए जाएँगे। और जहाँ कुछ नहीं पढ़ना, वहाँ हाथ खुले छोड़ दिए जाएँगे।

दूसरी रकअत का तरीक़ा

  1. दूसरी रकअत में खड़े होकर हाथ बाँधे रहें। इमाम बिस्मिल्लाह पढ़कर सूरह फ़ातिहा और कोई सूरह (जैसे सूरह अल-ग़ाशिया) पढ़ेगा।
  2. क़िरात मुकम्मल होने के बाद, रुकू में जाने से पहले इमाम 3 ज़ाइद तकबीरें कहेगा:
    • पहली बार हाथ कानों तक उठाकर ‘अल्लाहु अकबर’ कहें और हाथ छोड़ दें।
    • दूसरी बार हाथ कानों तक उठाकर ‘अल्लाहु अकबर’ कहें और हाथ छोड़ दें।
    • तीसरी बार हाथ कानों तक उठाकर ‘अल्लाहु अकबर’ कहें और हाथ छोड़ दें।
  3. चौथी तकबीर: बग़ैर हाथ उठाए ‘अल्लाहु अकबर’ कहते हुए सीधे रुकू में चले जाएँ।
  4. इसके बाद रुकू, क़ौमा और दो सज्दे करके क़ादा-ए-अख़ीरा में बैठें। अत्तहिय्यात, दुरूद-ए-इब्राहीम और दुआ-ए-मासूरा पढ़कर दोनों तरफ़ सलाम फेर दें।

📚 हवाला: बहारे शरीअत, हिस्सा 4, सफ़ा 126-131; व दुर्रे मुख़्तार व रद्दुल मुहतार।

ईद का ख़ुत्बा और उसके अहकाम

नमाज़ मुकम्मल होने के बाद इमाम का दो ख़ुत्बे पढ़ना सुन्नत है। याद रहे कि जुमे का ख़ुत्बा नमाज़ से पहले होता है जबकि ईद का ख़ुत्बा नमाज़ के बाद होता है। सामईन (नमाज़ियों) पर ख़ुत्बा ख़ामोशी और अदब से सुनना वाजिब है। ईदुल फ़ित्र के ख़ुत्बे में सदक़ा-ए-फ़ित्र और ईदुल अज़हा के ख़ुत्बे में क़ुरबानी व तकबीराते तशरीक़ के अहकाम बयान किए जाते हैं।

तकबीर-ए-तशरीक़ (Takbeer-e-Tashreeq)

ईदुल अज़हा के दिनों में 9 ज़िलहिज्जा की फ़ज्र से लेकर 13 ज़िलहिज्जा की अस्र तक हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद बुलंद आवाज़ से एक मर्तबा तकबीर-ए-तशरीक़ कहना वाजिब है (तीन बार कहना अफ़ज़ल है):

اللَّهُ أَكْبَرُ اللَّهُ أَكْبَرُ لَا إِلٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَاللَّهُ أَكْبَرُ اللَّهُ أَكْبَرُ وَلِلَّهِ الْحَمْدُ

हिंदी उच्चारण: अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर व लिल्लाहिल हम्द।

तर्जुमा: अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह सबसे बड़ा है और तमाम तारीफ़ें अल्लाह ही के लिए हैं।

ईद के दिन की मसनून सुन्नतें

सुन्नत अमल ईदुल फ़ित्र (मीठी ईद) ईदुल अज़हा (बक़रईद)
नमाज़ से पहले खाना ईदगाह जाने से पहले ताक़ अदद (3, 5 या 7) खजूर या मीठा खाना सुन्नत है। नमाज़ से पहले कुछ न खाना और क़ुरबानी के गोश्त से शुरुआत करना मुस्तहब है।
रास्ते में तकबीर कहना रास्ते में आहिस्ता-आहिस्ता तकबीर-ए-तशरीक़ पढ़ना। रास्ते में बुलंद आवाज़ से तकबीर-ए-तशरीक़ कहना।
रास्ता बदलना एक रास्ते से जाना और दूसरे रास्ते से वापस आना सुन्नत है। एक रास्ते से जाना और दूसरे रास्ते से वापस आना सुन्नत है।
सफ़ाई व लिबास ग़ुस्ल करना, मिस्वाक, उम्दा साफ़ कपड़े और ख़ुशबू लगाना। ग़ुस्ल करना, मिस्वाक, उम्दा साफ़ कपड़े और ख़ुशबू लगाना।

नमाज़ के फ़राइज़ और शराइत समझने के लिए हमारी गाइड Namaz Ki Sharte और Namaz Me Wajib Kitne Hain ज़रूर पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: EID Ki Namaz Ka Tarika में कुल कितनी ज़ाइद तकबीरें होती हैं?

सुन्नी हनफ़ी मज़हब में ईद की नमाज़ में कुल 6 ज़ाइद तकबीरें होती हैं। पहली रकअत में सना के बाद 3 तकबीरें (हाथ उठाकर) और दूसरी रकअत में सूरह ख़त्म होने के बाद रुकू से पहले 3 तकबीरें (हाथ उठाकर)।

Q2: अगर कोई शख़्स पहली रकअत में देर से पहुँचे तो क्या करे?

अगर मुक़तदी इमाम के तकबीरें कहने के बाद शामिल हुआ, तो नियत बाँधकर फ़ौरन 3 ज़ाइद तकबीरें कह ले, चाहे इमाम ने क़िरात शुरू कर दी हो। अगर इमाम रुकू में हो और उम्मीद हो कि तकबीर कहकर रुकू पा लेगा तो खड़े होकर कहे, वरना रुकू में जाकर बग़ैर हाथ उठाए तकबीरें कह ले।

Q3: क्या औरतों पर ईद की नमाज़ वाजिब है?

नहीं, औरतों, मुसाफ़िरों, बीमारों और बच्चों पर ईद की नमाज़ वाजिब नहीं है। औरतें अपने घरों में रहकर चाश्त या नफ़्ल नमाज़ अदा कर सकती हैं।

Q4: ईद की नमाज़ से पहले या बाद में नफ़्ल पढ़ना कैसा है?

ईद की नमाज़ से पहले ईदगाह या घर में कोई नफ़्ल नमाज़ पढ़ना मकरूह-ए-तहरीमी है। नमाज़ के बाद ईदगाह में नफ़्ल नहीं पढ़ना चाहिए, अलबत्ता घर वापस आकर 4 रकअत चाश्त की नमाज़ पढ़ना मुस्तहब है।

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