नमाज़ की नीयत हर मुसलमान के लिए नमाज़ की सबसे पहली और बुनियादी शर्त है। शरीअत में नीयत दिल के पक्के और साफ़ इरादे का नाम है। अगर किसी के दिल में यह बात बिल्कुल साफ़ है कि वह किस वक़्त की, कितनी रकअत और कौन-सी नमाज़ (फ़र्ज़ या सुन्नत) पढ़ने जा रहा है, तो उसकी नीयत हो गई। लेकिन ज़बान से नीयत के अल्फ़ाज़ कह लेना मुस्तहब (बेहतर) है ताकि दिल का इरादा ज़बान के साथ मिलकर और पक्का हो जाए। यहाँ 5 वक़्त की नमाज़ों, जुमा और वित्र की नीयत के मुकम्मल अल्फ़ाज़ आसान हिंदी में दिए गए हैं।
1. फ़ज्र की नमाज़ की नीयत (4 रकअत)
2 रकअत सुन्नत की नीयत: “नीयत की मैंने 2 रकअत नमाज़ सुन्नत-ए-फ़ज्र, वास्ते अल्लाह तआला के, सुन्नत रसूलुल्लाह की, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”
2 रकअत फ़र्ज़ की नीयत (अकेले): “नीयत की मैंने 2 रकअत नमाज़ फ़र्ज़-ए-फ़ज्र, वास्ते अल्लाह तआला के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”
2 रकअत फ़र्ज़ की नीयत (इमाम के पीछे): “नीयत की मैंने 2 रकअत नमाज़ फ़र्ज़-ए-फ़ज्र, वास्ते अल्लाह तआला के, पीछे इस इमाम के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”
2. ज़ोहर की नमाज़ की नीयत (12 रकअत)
4 रकअत सुन्नत (पहले): “नीयत की मैंने 4 रकअत नमाज़ सुन्नत, ज़ोहर से पहले की, वास्ते अल्लाह तआला के, सुन्नत रसूलुल्लाह की, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”
4 रकअत फ़र्ज़ (इमाम के पीछे): “नीयत की मैंने 4 रकअत नमाज़ फ़र्ज़-ए-ज़ोहर, वास्ते अल्लाह तआला के, पीछे इस इमाम के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”
2 रकअत सुन्नत (बाद): “नीयत की मैंने 2 रकअत नमाज़ सुन्नत, ज़ोहर के बाद की, वास्ते अल्लाह तआला के, सुन्नत रसूलुल्लाह की, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”
2 रकअत नफ़्ल: “नीयत की मैंने 2 रकअत नमाज़ नफ़्ल, वास्ते अल्लाह तआला के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”
3. अस्र की नमाज़ की नीयत (8 रकअत)
4 रकअत सुन्नत: “नीयत की मैंने 4 रकअत नमाज़ सुन्नत, अस्र से पहले की, वास्ते अल्लाह तआला के, सुन्नत रसूलुल्लाह की, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”
4 रकअत फ़र्ज़ (इमाम के पीछे): “नीयत की मैंने 4 रकअत नमाज़ फ़र्ज़-ए-अस्र, वास्ते अल्लाह तआला के, पीछे इस इमाम के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”
4. मग़रिब की नमाज़ की नीयत (7 रकअत)
3 रकअत फ़र्ज़ (इमाम के पीछे): “नीयत की मैंने 3 रकअत नमाज़ फ़र्ज़-ए-मग़रिब, वास्ते अल्लाह तआला के, पीछे इस इमाम के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”
2 रकअत सुन्नत: “नीयत की मैंने 2 रकअत नमाज़ सुन्नत-ए-मग़रिब, वास्ते अल्लाह तआला के, सुन्नत रसूलुल्लाह की, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”
2 रकअत नफ़्ल: “नीयत की मैंने 2 रकअत नमाज़ नफ़्ल, वास्ते अल्लाह तआला के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”
5. इशा की नमाज़ की नीयत (17 रकअत)
4 रकअत सुन्नत: “नीयत की मैंने 4 रकअत नमाज़ सुन्नत, इशा से पहले की, वास्ते अल्लाह तआला के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”
4 रकअत फ़र्ज़ (इमाम के पीछे): “नीयत की मैंने 4 रकअत नमाज़ फ़र्ज़-ए-इशा, वास्ते अल्लाह तआला के, पीछे इस इमाम के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”
2 रकअत सुन्नत: “नीयत की मैंने 2 रकअत नमाज़ सुन्नत, इशा के बाद की, वास्ते अल्लाह तआला के, सुन्नत रसूलुल्लाह की, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”
2 रकअत नफ़्ल: “नीयत की मैंने 2 रकअत नमाज़ नफ़्ल, वास्ते अल्लाह तआला के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”
3 रकअत वित्र वाजिब: “नीयत की मैंने 3 रकअत नमाज़ वित्र वाजिब, वास्ते अल्लाह तआला के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”
6. जुमे की नमाज़ की नीयत
जुमे के 2 रकअत फ़र्ज़ की नीयत: “नीयत की मैंने 2 रकअत नमाज़ फ़र्ज़-ए-जुमा, वास्ते अल्लाह तआला के, पीछे इस इमाम के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”
नमाज़ की नीयत से जुड़े आम सवाल (FAQs)
1. अगर ज़बान से कुछ और निकल जाए और दिल में कुछ और हो तो नमाज़ होगी?
हाँ, शरीअत में एतबार दिल के इरादे का है। अगर ज़बान से भूलकर अस्र निकल गया लेकिन दिल में ज़ोहर का पक्का इरादा था, तो ज़ोहर की नमाज़ सही अदा हो जाएगी।
2. क्या अरबी में नीयत करना ज़रूरी है?
बिल्कुल नहीं। नीयत अपनी मादरी ज़बान (हिंदी, उर्दू आदि) में या सिर्फ़ दिल के इरादे से की जा सकती है। अरबी में कहना ज़रूरी नहीं है।
नमाज़ के मुकम्मल तरीक़े के लिए हमारा गाइड नमाज़ का सही तरीक़ा हिंदी में, जुमे की नमाज़ के लिए जुमे की नमाज़ का तरीक़ा, और सुबह की नमाज़ के लिए फ़ज्र की नमाज़ का तरीक़ा पढ़ें।
Mashallah subhanallah Alhamdulillah bahut behtarin hai
Kanjul iman Hindi arabic hota or behtarin hota assalam walekum rahmatullahi barkatu