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अज़ान का सही तरीक़ा हिंदी में: अल्फ़ाज़, जवाब, अज़ान के बाद की दुआ और सुन्नतें
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अज़ान का सही तरीक़ा हिंदी में: अल्फ़ाज़, जवाब, अज़ान के बाद की दुआ और सुन्नतें

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अज़ान का तरीका जानना हर मुसलमान के लिए निहायत मुफ़ीद और ज़रूरी है, क्योंकि अज़ान इस्लाम का सबसे बड़ा एलान और आलमी पहचान है। दिन-रात में पाँच मर्तबा मस्जिद के मीनारों से अज़ान की पुरकशिश आवाज़ गूँजती है जो दुनिया भर के इंसानों को अल्लाह की इबादत और कामयाबी (फ़लाह) की तरफ़ बुलाती है। अज़ान देना बहुत बड़े सवाब का काम है। हदीस शरीफ़ में आया है कि क़यामत के दिन मुअज़्ज़िनों (अज़ान देने वालों) की गर्दनें सबसे ऊँची और मुमताज़ होंगी। सुन्नी हनफ़ी शरीअत और बहारे शरीअत की रोशनी में आइए जानते हैं अज़ान के सही अल्फ़ाज़, अज़ान का जवाब देने का तरीक़ा और अज़ान के बाद की मसनून दुआ।

🕌 अज़ान का शरई हुक्म: पाँचों वक़्त की फ़र्ज़ नमाज़ों और जुमे की नमाज़ के लिए अज़ान देना सुन्नत-ए-मुअक्कदा अलल किफ़ाया है। यानी अगर मोहल्ले या बस्ती में कोई एक शख़्स भी अज़ान दे दे तो सबकी तरफ़ से सुन्नत अदा हो जाती है, और अगर कोई भी अज़ान न दे तो पूरी बस्ती गुनहगार होती है।

अज़ान देने की शर्तें व मसनून आदाब

  • बा-वज़ू होना: अज़ान हमेशा बा-वज़ू होकर देना सुन्नत है। बे-वज़ू अज़ान देना मकरूह-ए-तन्ज़ीही है।
  • क़िब्ला रुख़ खड़े होना: अज़ान हमेशा खड़े होकर और काबा शरीफ़ (क़िब्ला) की तरफ़ मुँह करके दी जाती है।
  • कानों में उंगलियाँ डालना: दोनों हाथों की कलिमे (शहादत) की उंगलियाँ कानों के सुराख़ों में डालना सुन्नत है ताकि आवाज़ बुलंद और साफ़ निकले।
  • ठहर-ठहर कर कहना: अज़ान के हर कलिमे के बीच थोड़ा वक़फ़ा (ठहराव) लेना सुन्नत है ताकि सुनने वाले उसका जवाब दे सकें।
  • चेहरा दाएँ-बाएँ फेरना: “हय्या अलस सलाह” कहते वक़्त सिर्फ़ चेहरा दाएँ तरफ़ फेरना, और “हय्या अलल फ़लाह” कहते वक़्त सिर्फ़ चेहरा बाएँ तरफ़ फेरना सुन्नत है (सीना क़िब्ले से न मुड़े)।

📚 हवाला: बहारे शरीअत, हिस्सा 3, सफ़ा 466

अज़ान के पूरे 15 अल्फ़ाज़ (हिंदी व अरबी)

  1. अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर (चार बार: अल्लाह सबसे बड़ा है)
  2. अशहदु अल-ला इलाहा इल्लल्लाह (दो बार: मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं)
  3. अशहदु अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह (दो बार: मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं)
  4. हय्या अलस सलाह (दो बार दाएँ मुँह फेरकर कहें: नमाज़ की तरफ़ आओ)
  5. हय्या अलल फ़लाह (दो बार बाएँ मुँह फेरकर कहें: कामयाबी की तरफ़ आओ)
  6. अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर (दो बार: अल्लाह सबसे बड़ा है)
  7. ला इलाहा इल्लल्लाह (एक बार: अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं)
🌅 फ़ज्र की अज़ान का ख़ास इज़ाफ़ा: फ़ज्र की अज़ान में “हय्या अलल फ़लाह” के बाद दो मर्तबा यह अल्फ़ाज़ कहे जाते हैं:
“अस्सलातु ख़ैरूम मिनन नौम” (الصَّلَاةُ خَیْرٌ مِّنَ النَّوْمِ)
(तर्जुमा: नमाज़ नींद से बेहतर है)।

अज़ान का जवाब देने का मसनून तरीक़ा

जब अज़ान की आवाज़ सुने तो तमाम बातचीत, काम और कुरआन की तिलावत रोककर ख़ामोशी से अज़ान सुनना और उसका जवाब देना सुन्नत व मुस्तहब है:

  • मुअज़्ज़िन जो कलिमा कहे, सुनने वाला भी बिल्कुल वही कलिमा दोहराए।
  • जब मुअज़्ज़िन “हय्या अलस सलाह” और “हय्या अलल फ़लाह” कहे, तो उसके जवाब में कहें:
    “ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यिल अज़ीम” (पाप से बचने और नेकी करने की ताक़त सिर्फ़ अल्लाह की मदद से है)।
  • फ़ज्र की अज़ान में जब “अस्सलातु ख़ैरूम मिनन नौम” सुने, तो जवाब में कहें:
    “सदक़्ता व बररता व बिल-हक़्क़ि नतक़्त” (तूने सच कहा और नेक बात कही और हक़ बयान किया)।

अज़ान के बाद की मसनून दुआ (सहीह बुख़ारी)

अज़ान पूरी होने के बाद पहले दुरूद-ए-पाक पढ़ें, फिर यह अज़ीम दुआ पढ़ें जिसकी बरकत से क़यामत के दिन हुज़ूर की शफ़ाअत वाजिब हो जाती है:

اَللّٰهُمَّ رَبَّ هٰذِهِ الدَّعْوَةِ التَّآمَّةِ وَالصَّلَاةِ الْقَآئِمَةِ اٰتِ سَیِّدَنَا مُحَمَّدَا نِالْوَسِیْلَةَ وَالْفَضِیْلَةَ وَالدَّرَجَةَ الرَّفِیْعَةَ وَابْعَثْهُ مَقَامًا مَّحْمُوْدَا نِالَّذِیْ وَعَدْتَّهٗ، وَارْزُقْنَا شَفَاعَتَهٗ یَوْمَ الْقِیَامَةِ، اِنَّکَ لَا تُخْلِفُ الْمِیْعَادَ۔

हिंदी उच्चारण:

“अल्लाहुम्मा रब्बा हाज़िहिद दावतित ताम्माति वस-सलातिल क़ाइमाति आति सय्यिदना मुहम्मदानिल वसीलतह वल फ़ज़ीलतह वद-दरजतर रफ़ीअतह वबअसहु मक़ामम महमूदल लज़ी वअत्तह, वरज़ुक़्ना शफ़ाअतहू यौमल क़ियामह, इन्नका ला तुख़्लिफ़ुल मीआद।”

हिंदी तर्जुमा (अर्थ):

“ऐ अल्लाह! इस मुकम्मल पुकार और क़ायम रहने वाली नमाज़ के रब! हमारे आक़ा व मौला हज़रत मुहम्मद ‎ﷺ‎ को वसीला, फ़ज़ीलत और बुलंद दर्जा अता फ़रमा, और उन्हें उस मक़ाम-ए-महमूद पर पहुँचा जिसका तूने उनसे वादा फ़रमाया है, और हमें क़यामत के दिन उनकी शफ़ाअत नसीब फ़रमा, बेशक तू वादे के ख़िलाफ़ नहीं करता।”

📚 हवाला: सहीह बुख़ारी, किताबुल अज़ान, हदीस: 614

नमाज़ के मुकम्मल तरीक़े के लिए हमारा गाइड नमाज़ का सही तरीक़ा हिंदी में, और नीयत के लिए नमाज़ की नीयत का तरीक़ा ज़रूर पढ़ें।

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