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तरावीह की नमाज़ का सही तरीक़ा हिंदी में: 20 रकअत, नीयत, दुआ और मुकम्मल नियम
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तरावीह की नमाज़ का सही तरीक़ा हिंदी में: 20 रकअत, नीयत, दुआ और मुकम्मल नियम

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तरावीह की नमाज़ का तरीका जानना हर मुसलमान के लिए बहुत अहम है, ख़ासकर जब माहे रमज़ानुल मुबारक का मुक़द्दस महीना शुरू होता है। तरावीह रमज़ान शरीफ़ की ख़ास इबादतों में से है जो पूरे महीने रात के वक़्त अदा की जाती है। सुन्नी हनफ़ी शरीअत, अहले सुन्नत वल जमाअत और इज़्मा-ए-सहाबा के मुताबिक़ तरावीह की कुल 20 रकअतें होती हैं, जो दो-दो रकअत करके दस सलाम से पढ़ी जाती हैं। आइए नीयत, रकअत, तरावीह की मशहूर दुआ और मुकम्मल मसाइल आसान हिंदी में समझते हैं।

🌙 तरावीह की शरई हैसियत: तरावीह की 20 रकअतें मर्द और औरत दोनों के लिए सुन्नत-ए-मुअक्कदा हैं। मर्दों के लिए मस्जिद में जमाअत से पढ़ना सुन्नत-ए-किफ़ाया है (अगर मस्जिद में जमाअत न हुई तो पूरा मोहल्ला गुनहगार होगा)। औरतें अपने घरों में अकेले-अकेले तरावीह अदा करेंगी।

तरावीह की 20 रकअत का सुबूत और इज़्मा-ए-सहाबा

हुज़ूर नबी-ए-करीम ‎ﷺ‎ के ज़माने के बाद, अमीरुल मोमिनीन हज़रत उमर फ़ारूक़-ए-आज़म रज़ियल्लाहु अन्हु ने तमाम सहाबा-ए-किराम को हज़रत उबय्य बिन काब रज़ियल्लाहु अन्हु की इमामत में 20 रकअत तरावीह पर इकट्ठा फ़रमाया। हज़रत उस्मान-ए-ग़नी और हज़रत अली मुर्तज़ा रज़ियल्लाहु अन्हुमा के दौर में भी 20 रकअत पर ही अमल रहा।

हज़रत साइब बिन यज़ीद रज़ियल्लाहु अन्हु रिवायत करते हैं: “लोग हज़रत उमर बिन ख़त्ताब रज़ियल्लाहु अन्हु के ज़माने में रमज़ान के महीने में बीस (20) रकअत तरावीह पढ़ते थे।”

📚 हवाला: मुअत्ता इमाम मालिक, किताबुस सलात फ़ी रमज़ान, हदीस: 380; अस-सुननुल कुब्रा लिल-बैहक़ी, जिल्द 2, सफ़ा 496

📚 फ़िक़्ही हवाला: बहारे शरीअत, हिस्सा 4, सफ़ा 688

तरावीह की नमाज़ की नीयत

नीयत दिल के इरादे का नाम है। ज़बान से कहना बेहतर है:

1. अकेले पढ़ने की नीयत (मर्द या औरत)

“नीयत की मैंने 2 रकअत नमाज़ तरावीह की सुन्नत, वास्ते अल्लाह तआला के, सुन्नत रसूलुल्लाह की, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”

2. मस्जिद में इमाम के पीछे नीयत

“नीयत की मैंने 2 रकअत नमाज़ तरावीह की सुन्नत, वास्ते अल्लाह तआला के, पीछे इस इमाम के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”

तरावीह की नमाज़ पढ़ने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीक़ा

तरावीह का वक़्त इशा के फ़र्ज़ और सुन्नत पढ़ने के बाद शुरू होता है और सुब्ह-ए-सादिक़ तक रहता है। वित्र की नमाज़ तरावीह के 20 रकअत मुकम्मल होने के बाद पढ़ी जाती है:

  1. 2-2 रकअत करके पढ़ना: तरावीह हमेशा 2 रकअत करके पढ़ी जाती है। 2 रकअत पर सलाम फेरना लाज़िम है। (4 रकअत एक साथ पढ़ना हनफ़ी फ़िक़्ह में मकरूह है)।
  2. पहली रकअत: तकबीर-ए-तहरीमा कहकर हाथ बाँधें, सना (सुब्हानकल्लाहुम्मा…) पढ़ें, तअव्वुज़ व तस्मिया पढ़ें। सूरह फ़ातिहा के बाद कोई सूरह मिलाएँ। रुकूअ और दो सजदे करें।
  3. दूसरी रकअत: खड़े होकर बिस्मिल्लाह, सूरह फ़ातिहा और दूसरी सूरह पढ़ें। रुकूअ और दो सजदे मुकम्मल करके क़ादा में बैठें।
  4. क़ादा में सलाम फेरना: अत्तहिय्यात, दुरूद-ए-इब्राहिम और दुआ-ए-मासूरा पढ़कर दाएँ और बाएँ सलाम फेर दें। यह 2 रकअत पूरी हो गईं।
  5. इसी तरह 20 रकअत मुकम्मल करना: इसी क्रम में 2-2 रकअत करके कुल 10 मर्तबा नमाज़ अदा की जाएगी, जिससे 20 रकअत मुकम्मल होंगी।
  6. तरवीहा (हर 4 रकअत पर आराम): हर 4 रकअत (यानी दो सलाम) के बाद थोड़ी देर बैठना मुस्तहब है। इस दौरान ख़ामोश रहें, दुरूद शरीफ़ पढ़ें या तरावीह की मशहूर तस्बीह पढ़ें।

तरावीह की मशहूर तस्बीह व दुआ (हर 4 रकअत के बाद)

हर चार रकअत पूरी होने पर जब आराम के लिए बैठें, तो यह मशहूर तस्बीह पढ़ना मुस्तहब और बा-बरकत है:

سُبْحَانَ ذِی الْمُلْکِ وَالْمَلَکُوْتِ، سُبْحَانَ ذِی الْعِزَّةِ وَالْعَظْمَةِ وَالْهَیْبَةِ وَالْقُدْرَةِ وَالْکِبْرِیَآءِ وَالْجَبَرُوْتِ، سُبْحَانَ الْمَلِکِ الْحَیِّ الَّذِیْ لَا یَنَامُ وَلَا یَمُوْتُ، سُبُّوْحٌ قُدُّوْسٌ رَبُّنَا وَرَبُّ الْمَلٰٓئِکَةِ وَالرُّوْحِ، لَآ اِلٰهَ اِلَّا اللّٰهُ نَسْتَغْفِرُ اللّٰهَ، نَسْئَلُکَ الْجَنَّةَ وَنَعُوْذُ بِکَ مِنَ النَّارِ۔

हिंदी उच्चारण:

“सुब्हाना ज़िल मुल्कि वल मलकूत, सुब्हाना ज़िल इज़्ज़ति वल अज़मति वल हयबति वल क़ुदरति वल किब्रिया-इ वल जबरूत, सुब्हानल मलिकिल हय्यिल लज़ी ला यनामु वला यमूत, सुब्बूहुन क़ुद्दूसुन रब्बुना व रब्बुल मलाइकति वर-रूह, ला इलाहा इल्लल्लाहु नस्तग़फ़िरुल्लाह, नस्अलुकल जन्नता व नऊज़ु बिका मिनन-नार।”

हिंदी तर्जुमा (अर्थ):

“पाकी है उस ज़ात के लिए जो ज़मीन और आसमान की सल्तनत का मालिक है। पाकी है इज़्ज़त, बुज़ुर्गी, रोब, क़ुदरत और बड़ाई वाले रब के लिए। पाकी है उस हमेशा ज़िंदा रहने वाले बादशाह के लिए जिसे न कभी नींद आती है न मौत। हमारा और फ़रिश्तों का रब बेहद पाक और मुक़द्दस है। अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, हम अल्लाह से मग़फ़िरत चाहते हैं, तुझसे जन्नत का सवाल करते हैं और दोज़ख़ की आग से तेरी पनाह माँगते हैं।”

इशा और तरावीह की तरतीब (मास्टर चार्ट)

क्रम नमाज़ का नाम रकअत शरई हुक्म पढ़ने का समय
1 इशा के फ़र्ज़ 4 फ़र्ज़-ए-ऐन इशा का वक़्त दाखिल होने पर
2 इशा की सुन्नत 2 सुन्नत-ए-मुअक्कदा फ़र्ज़ के तुरंत बाद
3 तरावीह की नमाज़ 20 सुन्नत-ए-मुअक्कदा 2-2 रकअत करके 10 सलाम से
4 वित्र वाजिब (दुआ-ए-क़ुनूत के साथ) 3 वाजिब तरावीह पूरी होने के बाद (जमाअत से)

औरतें घर में तरावीह कैसे पढ़ें?

औरतों के लिए तरावीह की 20 रकअत पढ़ना सुन्नत-ए-मुअक्कदा है। वे अपने घरों में पाकीज़गी के साथ इस तरह अदा करें:

  • औरतें घर में अकेले-अकेले ही तरावीह पढ़ेंगी। औरतों की अलग से जमाअत बनाना मकरूह-ए-तहरीमी है।
  • अगर क़ुरआन की ज़्यादा सूरह याद न हों, तो सूरह फ़ील (अलम तरह कैफ़ा) से लेकर सूरह नास तक की 10 सूरतों को दो मर्तबा पढ़कर 20 रकअतें मुकम्मल कर सकती हैं।
  • अगर सिर्फ़ सूरह इख़लास (क़ुल हुवल्लाहु अहद) याद हो, तो हर रकअत में सूरह फ़ातिहा के बाद सूरह इख़लास पढ़कर भी पूरी 20 रकअतें पढ़ी जा सकती हैं।

तरावीह की नमाज़ से जुड़े अहम सवाल (FAQs)

1. क्या 8 रकअत तरावीह पढ़ना काफ़ी है?

नहीं, अहले सुन्नत वल जमाअत और चारों इमामों (इमाम अबू हनीफ़ा, इमाम शाफ़ई, इमाम मालिक, इमाम अहमद बिन हम्बल) के नज़दीक तरावीह की मुकम्मल सुन्नत 20 रकअत ही है। बिना ठोस बीमारी के 8 रकअत पढ़कर छोड़ देना सुन्नत-ए-मुअक्कदा का तर्क करना है जो दुरुस्त नहीं।

2. क्या तरावीह की क़ज़ा होती है अगर छूट जाए?

अगर किसी दिन की तरावीह छूट जाए तो उसकी क़ज़ा नहीं होती। लेकिन अगर इशा के फ़र्ज़ या वित्र छूट गए हों तो उनकी क़ज़ा पढ़ना फ़र्ज़ व वाजिब है।

3. अगर किसी ने इशा के फ़र्ज़ जमाअत से न पढ़े हों तो क्या वह तरावीह जमाअत से पढ़ सकता है?

हाँ, वह पहले इशा के 4 रकअत फ़र्ज़ और 2 सुन्नत अकेले अदा कर ले, उसके बाद तरावीह की जमाअत में शरीक हो जाए।

4. क्या तरावीह में पूरा क़ुरआन ख़त्म करना ज़रूरी है?

पूरे रमज़ान में तरावीह की जमाअत में कम से कम एक मर्तबा मुकम्मल क़ुरआन-ए-पाक सुनना या पढ़ना सुन्नत-ए-मुअक्कदा है।

5. अगर हर 4 रकअत के बाद तरावीह की दुआ याद न हो तो क्या करें?

अगर तरावीह की तस्बीह याद न हो, तो आप चुपचाप बैठ सकते हैं, तीसरा कलिमा पढ़ सकते हैं, दुरूद शरीफ़ पढ़ सकते हैं या इस्तिग़फ़ार कर सकते हैं। यह दुआ पढ़ना मुस्तहब है, फ़र्ज़ नहीं।

नमाज़ के मुकम्मल तरीक़े के लिए हमारा गाइड नमाज़ का सही तरीक़ा हिंदी में, जुमे की नमाज़ के लिए जुमे की नमाज़ का तरीक़ा, और नमाज़ की पाकी के लिए वज़ू का तरीक़ा ज़रूर पढ़ें।

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