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जुमे के दिन की अज़ीम फ़ज़ीलत हिंदी में: हदीस के हवाले, मसनून अमल और बरकतें
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जुमे के दिन की अज़ीम फ़ज़ीलत हिंदी में: हदीस के हवाले, मसनून अमल और बरकतें

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जुमे के दिन की फ़ज़ीलत हिंदी में जानना हर मुसलमान के लिए अपने ईमान को ताज़ा करने और हफ़्ते के सबसे मुक़द्दस दिन की क़द्र करने का सबब है। इस्लामी शरीअत में जुमे का दिन तमाम दिनों का सरदार (सय्यिदुल अय्याम) और मुसलमानों के लिए हफ़्ते की ईद माना गया है। इसी मुबारक दिन हज़रत आदम अलैहिस्सलाम पैदा किए गए, इसी दिन जन्नत में दाख़िल किए गए और इसी दिन क़यामत बरपा होगी। जुमे के दिन इबादत, दुरूद शरीफ़ और सदक़े का सवाब आम दिनों से कई गुना बढ़ा दिया जाता है। सुन्नी हनफ़ी शरीअत और बहारे शरीअत की रोशनी में यहाँ मुकम्मल फ़ज़ाइल पेश किए गए हैं।

🕌 तमाम दिनों का सरदार: रसूलुल्लाह ‎ﷺ‎ ने इरशाद फ़रमाया: “बेशक जुमे का दिन तमाम दिनों का सरदार है और अल्लाह के नज़दीक सबसे बड़ा दिन है। यह अल्लाह के नज़दीक ईदुल अज़हा और ईदुल फ़ित्र के दिन से भी ज़्यादा अज़मत रखता है।”
📚 हवाला: सुनन इब्ने माजा, किताबु इक़ामतिस सलात, हदीस: 1084

जुमे के दिन की 5 अज़ीम फ़ज़ीलतें (हदीस शरीफ़ से)

  • दुआ की क़बूलियत की ख़ास घड़ी (साअत-ए-इजाबत): जुमे के दिन में एक ऐसा वक़्त आता है जिसमें बंदा जो भी जायज़ दुआ माँगता है, अल्लाह तआला उसे ज़रूर अता फ़रमाता है। यह घड़ी अस्र से मग़रिब के दरमियान होती है। (हवाला: सहीह बुख़ारी, हदीस: 935)।
  • एक हफ़्ते के गुनाहों का कफ़्फ़ारा: जो शख़्स जुमे के दिन ग़ुस्ल करके मस्जिद जाता है, ख़ामोशी से ख़ुत्बा सुनता है और जुमे की नमाज़ अदा करता है, उसके पिछले जुमे से लेकर इस जुमे तक के गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।
  • सूरह कहफ़ पढ़ने पर नूर: नबी-ए-करीम ने फ़रमाया: “जो शख़्स जुमे के दिन सूरह कहफ़ पढ़ता है, उसके लिए दोनों जुमों के दरमियान नूर चमकता रहता है।” (हवाला: सुनन बैहक़ी, हदीस: 5856)।
  • कसरत से दुरूद शरीफ़ की फ़ज़ीलत: जुमे के दिन हुज़ूर पर पढ़ा गया दुरूद-ए-पाक सीधे हुज़ूर की बारगाह में पेश किया जाता है।

जुमे के दिन के मसनून आदाब

  1. ग़ुस्ल व सफ़ाई: जुमे के दिन पाकीज़गी हासिल करना और नहाना सुन्नत है। (देखें: ग़ुस्ल का सही तरीक़ा)।
  2. सफ़ेद लिबास व खुशबू: साफ़ कपड़े पहनना और इत्र लगाना।
  3. मस्जिद जल्दी पहुँचना: पहली अज़ान के बाद मस्जिद जल्दी जाना ताकि पहली सफ़ में जगह मिले।
  4. जुमे की नमाज़ बा-जमाअत अदा करना: ख़ुत्बा ध्यान से सुनना और 2 रकअत फ़र्ज़ जमाअत के साथ अदा करना। (विस्तार के लिए जुमे की नमाज़ का तरीक़ा देखें)।

जुमे की नमाज़ के तरीक़े के लिए जुमे की नमाज़ का तरीक़ा हिंदी में, और दुरूद-ए-इब्राहिम के फ़ायदे पढ़ें।

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