Skip to content
शबे मेराज की नवाफिल नमाज़: तरीक़ा, नीयत, रकअत व 27 रजब का रोज़ा
Islam

शबे मेराज की नवाफिल नमाज़: तरीक़ा, नीयत, रकअत व 27 रजब का रोज़ा

admin
admin
11 min read 14 views

शबे मेराज की नमाज़ (Shab e Meraj Ki Namaz in Hindi): 27 रजबुल मुरज्जब की मुक़द्दस रात इस्लाम की तारीख़ की वह अज़ीम तारीन रात है जिसमें अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने अपने प्यारे हबीब, जनाब-ए-मुहम्मदुर रसूलुल्लाह ‎ﷺ‎ को ज़मीन से आसमानों, सिद्रतुल मुंतहा और ला-मकां की सैर कराई और अपना दीदार-ए-मुबारक अता फ़रमाया। इसी शब उम्मत-ए-मुहम्मदिया को पाँच वक़्त की नमाज़ों का अनमोल तोहफ़ा मिला। इस मुकम्मल गाइड में शबे मेराज की नवाफ़िल नमाज़, 12 रकअत नफ़्ल की नीयत व तरीक़ा, सलातुल तस्बीह और 27 रजब के रोज़े की फ़ज़ीलत बहारे शरीअत व मोतबर हदीसों की रोशनी में जानें।

वाक़िया-ए-मेराज: क़ुरआन मजीद की गवाही

वाक़िया-ए-मेराज की तस्दीक़ क़ुरआन मजीद की सूरह बनी इसराईल में साफ़ अल्फ़ाज़ में मौजूद है:

سُبْحَانَ الَّذِي أَسْرَىٰ بِعَبْدِهِ لَيْلًا مِّنَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ إِلَى الْمَسْجِدِ الْأَقْصَى الَّذِي بَارَكْنَا حَوْلَهُ لِنُرِيَهُ مِنْ آيَاتِنَا ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْبَصِيرُ

तर्जुमा: “पाकी है उसे जो अपने बंदे को रातों-रात मस्जिदे हराम से मस्जिदे अक़्सा तक ले गया जिसके गिर्द हमने बरकत रखी ताकि हम उसे अपनी अज़ीम निशानियाँ दिखाएँ, बेशक वही सुनने वाला देखने वाला है।”

📖 हवाला: सूरह बनी इसराईल (17), आयत: 1

मेराज की रात अल्लाह तआला ने नबी-ए-करीम ‎ﷺ‎ के सदक़े उम्मत पर पाँच वक़्त की नमाज़ फ़र्ज़ फ़रमाई और इरशाद हुआ कि जो पाँच वक़्त की नमाज़ अदा करेगा, उसे पचास नमाज़ों का सवाब दिया जाएगा।

सुन्नी हनफ़ी फ़िक़्ह में शबे मेराज की इबादत का हुक्म

अहले सुन्नत वल जमाअत के मोतबर उलमा और फ़ुक़हा-ए-किराम फ़रमाते हैं कि 27 रजब की रात को जागना (शब-बेदारी), नफ़्ल नमाज़ें पढ़ना, क़ुरआन की तिलावत करना, कसरत से दरूद शरीफ़ भेजना और तौबा व अस्तग़फ़ार करना बहुत बड़ा सवाब और बाइस-ए-बरकत है।

सद्रुश्शरीआ हज़रत अल्लामा मुफ़्ती अमजद अली आज़मी ‎رَحْمَةُ ٱللَّٰهِ عَلَيْهِ‎ बहारे शरीअत में तहरीर फ़रमाते हैं:

“माहे रजब निहायत बुज़ुर्ग महीना है। इसकी 27वीं तारीख़ को मेराज का वाक़िया पेश आया। इस रात में कसरत से नवाफ़िल, ज़िक्र-ओ-अज़कार और दिन में रोज़ा रखना मुस्तहब व मुस्तहसन है।”

📚 हवाला: बहारे शरीअत, हिस्सा 4, नफ़्ल रोज़ों और नवाफ़िल का बयान

1. शबे मेराज की 12 रकअत नवाफ़िल नमाज़ का तरीक़ा

बुज़ुर्गाने दीन से 27 रजब की रात को 12 रकअत नफ़्ल नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा नक़ल किया गया है, जिसे दो-दो रकअत करके (कुल 6 सलाम से) पढ़ा जाता है।

12 रकअत नफ़्ल की नीयत

दिल में इरादा करें: “नीयत की मैंने 2 रकअत नमाज़-ए-नफ़्ल शबे मेराज की, वास्ते अल्लाह तआला के, मुँह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अक़बर।”

नमाज़ पढ़ने का अमली तरीक़ा

  1. तकबीर-ए-तहरीमा कहकर हाथ बाँधें और ‘सना’ (सुब्हानकल्लाहुम्मा) पढ़ें।
  2. अऊज़ुबिल्लाह और बिस्मिल्लाह पढ़कर सूरह फ़ातिहा पढ़ें।
  3. सूरह फ़ातिहा के बाद कोई भी सूरह (जैसे सूरह अल-इख़्लास क़ुल हुवल्लाहु अहद) 3 बार या सूरह अल-क़द्र पढ़ें।
  4. रुकूअ और दोनों सजदे मामूल के मुताबिक़ पूरे करें।
  5. दूसरी रकअत में भी सूरह फ़ातिहा के बाद सूरह इख़्लास पढ़ें और क़ादा में बैठकर अत्तहिय्यात, दरूद-ए-इब्राहीमी और दुआ-ए-मासूरा पढ़कर सलाम फेरें।
  6. इसी तरह 2-2 रकअत करके कुल 12 रकअतें मुकम्मल करें।

12 रकअत के बाद का मसनून वज़ीफ़ा

12 रकअत नमाज़ पूरी करने के बाद उसी जगह बैठकर यह अज़कार 100-100 बार पढ़ें:

  • तीसरा कलिमा (100 बार): “सुब्हानल्लाहि वल हम्दु लिल्लाहि व ला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अक़बर, व ला हवला व ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यिल अज़ीम।”
  • अस्तग़फ़ार (100 बार): “अस्तग़फ़िरुल्लाहा रब्बी मिन कुल्लि ज़म्बिन व अतूबु इलैह।”
  • दरूद शरीफ़ (100 बार): “सल्लल्लाहु अला मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम” या दरूदे इब्राहीमी।

इसके बाद रो-रोकर अपने गुनाहों की माफ़ी और अपनी दिली मुरादों के लिए दुआ माँगें।

2. सलातुल तस्बीह की नमाज़ (4 रकअत)

शबे मेराज की मुक़द्दस रात में ‘सलातुल तस्बीह’ पढ़ना बेहद अफ़ज़ल है। हदीस शरीफ़ में आता है कि इस नमाज़ के पढ़ने से ज़िंदगी के अगले-पिछले, नए-पुराने, जाने-अनजाने तमाम छोटे-बड़े गुनाह माफ़ हो जाते हैं।

सलातुल तस्बीह की 4 रकअतों में कुल 300 मर्तबा यह तस्बीह पढ़ी जाती है:

سُبْحَانَ اللَّهِ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ وَلَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَاللَّهُ أَكْبَرُ

हर रकअत में 75 मर्तबा यह तस्बीह पढ़ी जाती है (क़याम में 15 बार, रुकूअ में 10 बार, क़ौमा में 10 बार, पहले सजदे में 10 बार, जलसा में 10 बार, दूसरे सजदे में 10 बार, और सजदे से उठकर 10 बार)।

📚 हवाला: सुनन अबू दाऊद, हदीस: 1297 व बहारे शरीअत, हिस्सा 4

3. 27 रजब के रोज़े की अज़ीम फ़ज़ीलत

27 रजब के दिन रोज़ा रखना निहायत मुतबर्रक और सवाब का काम है। हदीस-ए-पाक में इस रोज़े की बेमिसाल फ़ज़ीलत बयान फ़रमाई गई है।

हज़रत अनस बिन मालिक ‎رَضِيَ ٱللَّٰهُ عَنْهُ‎ से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ‎ﷺ‎ ने इरशाद फ़रमाया: “रजब में एक ऐसी रात है जिसमें अमल करने वाले के लिए सौ साल की नेकियों का सवाब लिखा जाता है, और वह रजब की सत्ताईसवीं (27वीं) रात है। और जो शख्स इसके दिन में रोज़ा रखेगा तो अल्लाह तआला उसे साठ (60) महीनों के रोज़ों का सवाब अता फ़रमाएगा।”

📚 हवाला: शुअबुल ईमान, इमाम बैहक़ी, हदीस: 3531 व गुन्यतुत तालिबीन, गौसे आज़म

शबे मेराज की नवाफ़िल का ख़ुलासा (Comparison Table)

नमाज़ / अमल रकअत की तादाद तरीक़ा व सूरह मख़सूस फ़ज़ीलत
12 रकअत नवाफ़िल 12 रकअत (6 सलाम) सूरह फ़ातिहा + सूरह इख़्लास (3 बार) हाजात की क़ुबूलियत व मग़फ़िरत
सलातुल तस्बीह 4 रकअत (1 या 2 सलाम) कुल 300 मर्तबा तीसरा कलिमा तमाम छोटे-बड़े गुनाहों की मुआफ़ी
27 रजब का रोज़ा 1 दिन का रोज़ा सुब्ह सादिक़ से ग़ुरूब-ए-आफ़ताब 60 महीनों के रोज़ों का अज़ीम सवाब

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: क्या शबे मेराज की नमाज़ फ़र्ज़ या वाजिब है?

नहीं, शबे मेराज की नमाज़ नफ़्ल है, फ़र्ज़ या वाजिब नहीं है। जो पढ़ेगा उसे बहुत बड़ा सवाब मिलेगा, और अगर कोई न पढ़ सके तो उस पर कोई गुनाह नहीं है। लेकिन इस रात फ़र्ज़ नमाज़ों (ख़ासकर ईशा और फ़ज्र) को बा-जमाअत अदा करना सबसे ज़रूरी है।

Q2: क्या औरतें घर पर यह 12 रकअत नफ़्ल नमाज़ पढ़ सकती हैं?

हाँ, औरतें अपने घरों में पाकी की हालत में शबे मेराज की 12 रकअत नफ़्ल नमाज़ और सलातुल तस्बीह बिल्कुल उसी तरीक़े से पढ़ सकती हैं। औरतों के लिए घर में नमाज़ पढ़ना मस्जिद से भी ज़्यादा अफ़ज़ल है।

Q3: अगर किसी की क़ज़ा नमाज़ें बाक़ी हों तो उसे क्या पढ़ना चाहिए?

फ़ुक़हा-ए-किराम फ़रमाते हैं कि जिसके ज़िम्मे फ़र्ज़ नमाज़ें क़ज़ा हों, उसके लिए नफ़्ल नमाज़ों से ज़्यादा ज़रूरी अपनी ‘क़ज़ा-ए-उम्री’ पढ़ना है। इसलिए शबे मेराज की रात कुछ वक़्त अपनी पुरानी छूटी हुई नमाज़ों की क़ज़ा अदा करने में भी लगाना चाहिए।

Q4: 27 रजब का रोज़ा रखने की नीयत कैसे करें?

सहरी खाकर या रात ही में दिल में यह नीयत कर लें: “नीयत की मैंने अल्लाह तआला के वास्ते कल 27 रजब के नफ़्ल रोज़े की।”

संबंधित ज़रूरी इस्लामी लेख (Related Guides)

How useful was this post?

Click on a star to rate it!

4.4 out of 5 · 15 votes

No comments yet

Be the first to share your thoughts.

Leave a Comment

1-Click Google Verification to post comment:
To prevent spam, comments require a verified Google account (no password needed, only name & email).