Skip to content
सूरह अर-रहमान हिंदी में: अरबी टेक्स्ट, कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा और फ़ज़ीलत (ज़ीनतुल क़ुरआन)
Islam

सूरह अर-रहमान हिंदी में: अरबी टेक्स्ट, कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा और फ़ज़ीलत (ज़ीनतुल क़ुरआन)

admin
admin
4 min read 12 views

सूरह रहमान हिंदी में पढ़ना और उसकी पुरअसर आयतों पर ग़ौर करना इंसान के दिल को नेमतों के शुक्रगुज़ारी के जज़्बे से भर देता है। सूरह अर-रहमान क़ुरआन मजीद की 55वीं सूरह है, जिसमें 3 रुकूअ और 78 आयतें हैं। हदीस शरीफ़ में सूरह रहमान को ‘उरूformatुल क़ुरआन’ (क़ुरआन मजीद की दुल्हन / ज़ीनत) फ़रमाया गया है। इस मुक़द्दस सूरह में एक आयत “फ़बि-अय्यि आला-इ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान” (पस तुम दोनों अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?) को 31 मर्तबा दोहराया गया है, जो इंसान और जिन्नात को अल्लाह की अनगिनत नेमतों की याद दिलाती है। सुन्नी हनफ़ी शरीअत और कन्ज़ुल ईमान की रोशनी में यहाँ मुकम्मल रहनुमाई दी गई है।

🌺 क़ुरआन की दुल्हन (ज़ीनत): हज़रत अली मुर्तज़ा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ‎ﷺ‎ ने इरशाद फ़रमाया: “हर चीज़ की एक ज़ीनत (दुल्हन) होती है, और क़ुरआन मजीद की ज़ीनत सूरह अर-रहमान है।”
📚 हवाला: शुअबुल ईमान लिल-बैहक़ी, हदीस: 2264
Table of Contents

सूरह अर-रहमान का पहला रुकूअ (अरबी व हिंदी तर्जुमा)

بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ
اَلرَّحْمٰنُ ۙ۝۱ عَلَّمَ الْقُرْاٰنَ ؕ۝۲ خَلَقَ الْاِنْسَانَ ۙ۝۳ عَلَّمَهُ الْبَیَانَ ۝۴ اَلشَّمْسُ وَالْقَمَرُ بِحُسْبَانٍ ۪ۙ۝۵ وَّالنَّجْمُ وَالشَّجَرُ یَسْجُدٰنِ ۝۶ وَالسَّمَآءَ رَفَعَهَا وَوَضَعَ الْمِیْزَانَ ۙ۝۷

कन्ज़ुल ईमान हिंदी तर्जुमा:

“रहमान ने क़ुरआन की तालीम फ़रमाई। इंसान को पैदा फ़रमाया। उसे बोलना सिखाया। सूरज और चाँद एक हिसाब से हैं। और सब्ज़े और दरख़्त सजदा करते हैं। और आसमान को उसी ने बुलंद फ़रमाया और तराज़ू रखी।”

📖 हवाला: सूरह अर-रहमान (55), आयात: 1–7 [कन्ज़ुल ईमान]

सूरह अर-रहमान पढ़ने के रूहानी फ़ायदे

  • दिल का सुकून और डिप्रेशन से नजात: सूरह रहमान की तिलावत सुनने या पढ़ने से दिल की घबराहट और मानसिक तनाव (Stress) दूर होता है और बेपनाह सुकून हासिल होता है।
  • बीमारियों से शिफ़ा: कठिन और ला-इलाज बीमारियों में सूरह रहमान की तिलावत सुनकर पानी पर दम करके पीना बहुत मुजर्रब अमल माना गया है।
  • नेमतों की क़द्र और शुक्रगुज़ारी: बार-बार “फ़बि-अय्यि आला-इ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान” सुनने से बंदे का दिल अल्लाह के एहसानात के आगे झुक जाता है।

सूरह यासीन के लिए सूरह यासीन हिंदी में, और आयतल कुर्सी हिंदी में ज़रूर पढ़ें।

How useful was this post?

Click on a star to rate it!

0.0 out of 5 · 0 votes

No comments yet

Be the first to share your thoughts.

Leave a Comment

1-Click Google Verification to post comment:
To prevent spam, comments require a verified Google account (no password needed, only name & email).