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हज़रत आदम अलैहिस्सलाम कौन हैं? पैदाइश, फ़रिश्तों का सजदा, ख़िलाफ़त और मुकम्मल सीरत
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हज़रत आदम अलैहिस्सलाम कौन हैं? पैदाइश, फ़रिश्तों का सजदा, ख़िलाफ़त और मुकम्मल सीरत

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हज़रत आदम عَلَيْهِ ٱلسَّلَام कौन हैं? हज़रत आदम अलैहिस्सलाम अल्लाह तआला के सबसे पहले पैग़म्बर और दुनिया के तमाम इंसानों के रूहानी व जिस्मानी बाप (अबुल बशर – Father of Mankind) हैं। अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने जब कायनात को पैदा फ़रमाया, तो अपनी हिकमत से ज़मीन पर अपना नायब (ख़लीफ़ा) बनाने का इरादा फ़रमाया। मिट्टी के मुक़द्दस पुतले से लेकर फ़रिश्तों के सजदे, जन्नत में सुकूनत, शजर-ए-मम्नूआ (मना किए गए दरख़्त) का इम्तिहान और तौबा की क़बूलियत तक—हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की सीरत इंसानी तारीख़ का सबसे पहला और अज़ीम तरीन बाब है।

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हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की पैदाइश और फ़रिश्तों का सजदा

क़ुरआन करीम की सूरह अल-बक़रह में अल्लाह तआला ने आदम अलैहिस्सलाम की ख़िलाफ़त का ज़िक्र फ़रमाते हुए इरशाद फ़रमाया:

وَإِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلَائِكَةِ إِنِّي جَاعِلٌ فِي الْأَرْضِ خَلِيفَةً… وَإِذْ قُلْنَا لِلْمَلَائِكَةِ اسْجُدُوا لِآدَمَ فَسَجَدُوا إِلَّا إِبْلِيسَ أَبَىٰ وَاسْتَكْبَرَ وَكَانَ مِنَ الْكَافِرِينَ

तर्जुमा (कंज़ुल ईमान): “और जब आपके रब ने फ़रिश्तों से फ़रमाया: मैं ज़मीन में अपना ख़लीफ़ा बनाने वाला हूँ… और याद करो जब हमने फ़रिश्तों को हुक्म दिया कि आदम को सजदा करो, तो सबने सजदा किया सिवाए इब्लीस के; उसने इंकार किया और तकब्बुर किया, और वह काफ़िरों में से हो गया।”

📖 हवाला: सूरह अल-बक़रह (2), आयत: 30-34; तफ़्सीर ख़ज़ाइनुल इरफ़ान

हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की ज़िंदगी के 4 अहम पड़ाव

सद्रुश-शरीआ हज़रत अल्लामा मुफ़्ती अमजद अली आज़मी ‘बहारे शरीअत’ (हिस्सा 1) और अल्लामा इब्ने कसीर ‘क़सासुल अंबिया’ में फ़रमाते हैं:

  • 1

    मिट्टी से तख़्लीक़ और नाम ‘आदम’ क्यों पड़ा: ‘अदीम’ अरबी में ज़मीन की ऊपरी सतह (मिट्टी) को कहते हैं। चूँकि अल्लाह ने आपको ज़मीन के मुख़्तलिफ़ हिस्सों की रंग-बिरंगी मिट्टी जमा करके पैदा फ़रमाया, इसलिए आपका नाम ‘आदम’ रखा गया। फिर अल्लाह ने आपको तमाम चीज़ों के नाम और उनकी ख़ासियतों का इल्म अता फ़रमाया।
  • 2

    हज़रत हव्वा की पैदाइश और जन्नत में क़ियाम: अल्लाह तआला ने हज़रत आदम की तन्हाई दूर करने के लिए आपकी बायीं पसली से हज़रत हव्वा رضي الله عنها को पैदा फ़रमाया और दोनों को जन्नत में रहने का हुक्म दिया। साथ ही एक मख़सूस दरख़्त (गेहूँ का पौधा) का फल खाने से मना फ़रमाया।
  • 3

    इब्लीस का धोखा और ज़मीन पर आमद: इब्लीस ने झूठी क़सम खाकर बहकाया कि इस दरख़्त को खाने से तुम हमेशा जन्नत में रहोगे। हज़रत आदम ने भूल-चूक (इज्तिहादी ख़ता) से वह फल चख लिया। इसके बाद अल्लाह के हुक्म से आप ज़मीन पर तशरीफ़ लाए ताकि ज़मीन पर इंसानी ख़िलाफ़त क़ायम हो सके।
  • 4

    हुज़ूर ﷺ के वसीले से तौबा की क़बूलियत: हज़रत आदम अलैहिस्सलाम ने सैकड़ों साल रो-रो कर तौबा की। आख़िरकार आपने अर्ज़ किया: “ऐ रब! मुहम्मद ‎ﷺ‎ के वसीले से मेरी ख़ता मुआफ़ फ़रमा!” अल्लाह ने पूछा: तूने उन्हें कैसे जाना? अर्ज़ किया: जब तूने मुझे पैदा किया तो मैंने अर्श पर उनका नाम तेरे नाम के साथ लिखा देखा था। अल्लाह ने हुज़ूर के सदक़े तौबा क़ुबूल फ़रमाई।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. क्या फ़रिश्तों ने हज़रत आदम को इबादत का सजदा किया था?

नहीं! इबादत का सजदा सिर्फ़ अल्लाह तआला के लिए मख़सूस है। फ़रिश्तों ने हज़रत आदम को जो सजदा किया था वह ‘सजदा-ए-ताज़ीमी’ (एहतिराम का सजदा) था जो पिछली शरीअतों में अल्लाह के हुक्म से जायज़ था, लेकिन उम्मत-ए-मुहम्मदिया में ताज़ीमी सजदा भी हराम है।

2. हज़रत आदम अलैहिस्सलाम ज़मीन पर किस मक़ाम पर उतरे?

रिवायतों के मुताबिक़ हज़रत आदम अलैहिस्सलाम सरनदीप (श्रीलंका) के पहाड़ पर उतरे और हज़रत हव्वा जद्दा (सऊदी अरब) में उतरीं। बरसों बाद दोनों की मुलाक़ात मैदान-ए-अराफ़ात में ‘जबले रहमत’ पर हुई।

3. क्या नबी से कोई गुनाह सरज़द हो सकता है?

अहले सुन्नत वल जमाअत का यह मुत्तफ़िक़ा अक़ीदा है कि तमाम अंबिया-ए-किराम मासूम होते हैं, उनसे कभी कोई गुनाह (कबीरा या सगीरा) नहीं हो सकता। हज़रत आदम से जो हुआ वह गुनाह नहीं बल्कि भूल-चूक (इंसियान) और इज्तिहादी ख़ता थी।

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