शैतान की 6 बड़ी कमज़ोरियाँ इस्लामी रिवायतों और अहादीस के मफ़हूम में बयान किया गया वह रूहानी सबक़ है जो मोमिन को इब्लीस के मकर ओ फ़रेब से महफ़ूज़ रखता है। शैतान इंसान का खुला दुश्मन है, जो रात-दिन इस फ़िक्र में लगा रहता है कि किसी तरह बंदे को गुनाह, नाफ़रमानी और भटकाव के रास्ते पर डाल दे। लेकिन अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने उम्मत-ए-मुहम्मदिया को कुछ ऐसे ख़ास और आसान आमाल अता फ़रमाए हैं जिनसे शैतान की सारी ताक़त टूट जाती है और वह निहायत लाचार, ज़लील और कमज़ोर हो जाता है। आइए उन 6 आमाल और शैतानी वसवसों से हिफ़ाज़त के तरीक़ों को आसान हिंदी में समझें।
Table of Contents
- 1. वाक़िआ: शैतान का नबी-ए-करीम ﷺ के सामने अपनी लाचारी का इक़रार
- 2. शैतान को बेबस करने वाले 6 अज़ीम आमाल
- 3. शैतान के वसवसों से हिफ़ाज़त के क़ुरआनी नुस्ख़े
- 4. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
- 4.1 1. क्या शैतान इंसान के दिल में सीधे वसवसे डालता है?
- 4.2 2. शैतान सबसे ज़्यादा किस बात से रोता है?
- 4.3 3. अज़ान सुनकर शैतान क्यों भागता है?
- 4.4 4. क्या सदक़ा देने से शैतान कमज़ोर होता है?
वाक़िआ: शैतान का नबी-ए-करीम ﷺ के सामने अपनी लाचारी का इक़रार
रिवायत में आता है कि हुज़ूर सरवरे कायनात ﷺ ने एक बार शैतान को निहायत लाचार, कमज़ोर और रोती हुई हालत में देखा। आप ﷺ ने दरियाफ़्त फ़रमाया: “तेरा यह हाल कैसे हुआ?”
शैतान ने कहा: “या रसूलुल्लाह! आपकी उम्मत के 6 काम ऐसे हैं जिनकी वजह से मेरी कमर टूट जाती है और मैं पूरी तरह बेबस हो जाता हूँ:”
शैतान को बेबस करने वाले 6 अज़ीम आमाल
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आपस में मुलाक़ात पर सलाम करना:
जब दो मुसलमान आपस में मिलते हैं और “अस्सलामु अलैकुम” कहकर सलाम में पहल करते हैं, तो शैतान जल-भुन जाता है। हदीस शरीफ़ में आता है कि सलाम आपस में मोहब्बत बढ़ाता है और गुनाहों को मिटाता है (सहीह मुस्लिम: 54)।
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मुसाफ़हा (हाथ मिलाना):
जब दो मुसलमान मुहब्बत से दोनों हाथ मिलाते हैं, तो उनके हाथ अलग होने से पहले अल्लाह तआला उनके दरमियान के गुनाहों को माफ़ फ़रमा देता है (अबू दाऊद: 5212)। यह देखकर शैतान अफ़सोस से सर पीटता है।
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हर काम से पहले ‘इंशाअल्लाह’ कहना:
जब मोमिन मुस्तक़बिल के किसी काम का इरादा करता है और कहता है “इंशाअल्लाह” (अगर अल्लाह ने चाहा), तो वह काम अल्लाह के सुपुर्द हो जाता है और शैतान उसमें रुकावट डालने से लाचार हो जाता है (सूरह कहफ़: 23–24)।
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कसरत से अस्तग़फ़ार (तौबा) करना:
शैतान दिन भर बहकाकर बंदे से गुनाह कराता है, लेकिन जब बंदा सच्चे दिल से “अस्तग़फ़िरुल्लाह” कह कर तौबा करता है, तो शैतान की दिन भर की मेहनत पर पानी फिर जाता है (मुसनद अहमद: 11237)।
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अल्लाह की राह में सदक़ा देना:
हदीस में आता है कि जब इंसान सदक़ा निकालने का इरादा करता है, तो सत्तर शैतान उसे रोकने के लिए लिपट जाते हैं। लेकिन जब वह सदक़ा दे देता है, तो शैतान के जबड़े टूट जाते हैं और बलाएँ टल जाती हैं (तिर्मिज़ी: 664)।
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रसूलुल्लाह ﷺ पर कसरत से दरूद ओ सलाम पढ़ना:
जब कोई उम्मती हुज़ूर ﷺ की ज़ात पर दरूद शरीफ़ पढ़ता है, तो फ़रिश्ते उस पर रहमतों की बारिश करते हैं और शैतान ज़िल्लत के साथ भाग खड़ा होता है।
शैतान के वसवसों से हिफ़ाज़त के क़ुरआनी नुस्ख़े
- तअव्वुज़ (अऊज़ुबिल्लाह) पढ़ना: क़ुरआन मजीद सूरह आराफ़ (आयत 200) में फ़रमाया कि जब शैतान का कोई वसवसा आए, तो फ़ौरन अल्लाह की पनाह मांगो।
- आयतल कुर्सी की तिलावत: रात को सोते वक़्त आयतल कुर्सी पढ़ने वाले के पास पूरी रात कोई शैतान क़रीब नहीं फटक सकता (सहीह बुख़ारी: 2311)।
- सूरह फ़लक़ और सूरह नास: नबी-ए-पाक ﷺ ने फ़रमाया कि शैतानी शर और वसवसों से बचने के लिए इन दोनों सूरतों जैसी कोई पनाह नहीं (अबू दाऊद: 1463)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. क्या शैतान इंसान के दिल में सीधे वसवसे डालता है?
जी हाँ, हदीस में आता है कि शैतान इंसान की रगों में ख़ून की तरह दौड़ता है (सहीह बुख़ारी: 3281)। वह बुरे ख़यालात और शक पैदा करता है, जिससे बचने के लिए ‘ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह’ पढ़ना चाहिए।
2. शैतान सबसे ज़्यादा किस बात से रोता है?
सहीह मुस्लिम (हदीस: 81) के मुताबिक़, जब आदम का बेटा (इंसान) सजदा-ए-तिलावत करता है, तो शैतान एक तरफ़ हटकर रोता है और कहता है: “हाय मेरी बर्बादी! इसे सजदे का हुक्म हुआ इसने सजदा किया और इसके लिए जन्नत है, मुझे सजदे का हुक्म हुआ मैंने नाफ़रमानी की और मेरे लिए आग है।”
3. अज़ान सुनकर शैतान क्यों भागता है?
हदीस शरीफ़ में आता है कि जब नमाज़ की अज़ान गूँजती है, तो शैतान अज़ान की आवाज़ न सुनने के लिए हवा छोड़ता हुआ दूर भाग जाता है (सहीह बुख़ारी: 608)।
4. क्या सदक़ा देने से शैतान कमज़ोर होता है?
बिल्कुल। हदीस में है कि सदक़ा रब के ग़ज़ब को ठंडा करता है और शैतान की कमर तोड़ देता है।
शैतानी शर से हिफ़ाज़त के लिए आयतल कुर्सी हिंदी में और सूरह मुअव्वज़तैन के लिए सूरह फ़लक़ हिंदी में और सूरह नास हिंदी में पढ़ें।
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