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सूरह नास हिंदी में: अरबी टेक्स्ट, कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा और वसवसों से हिफ़ाज़त की फ़ज़ीलत
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सूरह नास हिंदी में: अरबी टेक्स्ट, कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा और वसवसों से हिफ़ाज़त की फ़ज़ीलत

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सूरह नास (Surah Nas) क़ुरआन मजीद की 114वीं और आख़िरी सूरह है। यह मक्की सूरह है, जिसमें 6 आयतें और 1 रुकूअ है। इस सूरह में अल्लाह तआला को तमाम इंसानों का रब, बादशाह और सच्चा माबूद मानकर शैतानी वसवसों और इंसानों व जिन्नात के शर से पनाह माँगने की तालीम दी गई है। सूरह फ़लक़ और सूरह नास को ‘मुअव्वज़तैन’ कहा जाता है। दिल में आने वाले बुरे ख़्यालात, ख़ौफ़, वहम और शैतान ‘ख़न्नास’ के हमलों से बचने के लिए यह सूरह सबसे बड़ा रूहानी हथियार है। आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान रहमतुल्लाह अलैह के कन्ज़ुल ईमान तर्जुमे और हदीस के हवाले यहाँ दर्ज हैं।

सूरह का नाम नंबर आयतें पारा नुज़ूल (स्थान)
सूरह अन-नास (الناس) 114वीं (आख़िरी सूरह) 6 आयतें 30वाँ पारा (अम्म पारा) मक्की (कुछ के नज़दीक मदनी)

सूरह नास अरबी मतन, हिंदी उच्चारण और तर्जुमा (आयत दर आयत)

بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ ۝

“अल्लाह के नाम से शुरू जो निहायत मेहरबान रहमत वाला।”


قُلْ اَعُوْذُ بِرَبِّ النَّاسِ ۙ ۝۱

हिंदी उच्चारण: क़ुल अऊज़ु बिरब्बिन् नास (1)

कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: तुम फ़रमाओ मैं उसकी पनाह में आया जो सब लोगों का रब।

مَلِكِ النَّاسِ ۙ ۝۲

हिंदी उच्चारण: मलिकिन् नास (2)

कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: सब लोगों का बादशाह।

اِلٰهِ النَّاسِ ۙ ۝۳

हिंदी उच्चारण: इलाहिन् नास (3)

कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: सब लोगों का माबूद।

مِنْ شَرِّ الْوَسْوَاسِ ەۙ الْخَنَّاسِ ۙ ۝۴

हिंदी उच्चारण: मिन् शर्रिल् वस्वासिल् ख़न्नास (4)

कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: उसके शर से जो दिल में बुरे ख़तरें (वसवसे) डाले और दुबक रहे।

الَّذِیْ یُوَسْوِسُ فِیْ صُدُوْرِ النَّاسِ ۙ ۝۵

हिंदी उच्चारण: अल्लज़ी युवस्विसु फ़ी सुदूरिन् नास (5)

कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: वह जो लोगों के दिलों में वसवसे डालता है।

مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ ۝۶

हिंदी उच्चारण: मिनल् जिन्नति वन्नास (6)

कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: जिन्न और आदमी में से।

सूरह नास की अज़ीम फ़ज़ीलत और हदीस के हवाले

🤲 सुबह व शाम हर चीज़ से हिफ़ाज़त: हज़रत अब्दुल्लाह बिन खुबैब रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ‎ﷺ‎ ने फ़रमाया: “तुम सुबह और शाम तीन-तीन मर्तबा क़ुल हुवल्लाहु अहद (सूरह इख़लास) और मुअव्वज़तैन (सूरह फ़लक़ व सूरह नास) पढ़ लिया करो, यह तुम्हें हर बुरी चीज़ और आफ़त से काफ़ी हो जाएँगी।”
📚 हवाला: जामेअ तिर्मिज़ी, किताबुद दावात, हदीस: 3575; सुनन अबू दाऊद, हदीस: 5082

वसवसे और वहम का इलाज कैसे करें?

  1. ताअव्वुज़ पढ़ें: जब भी दिल में कोई बुरा ख़याल या नमाज़ व वुज़ू में वहम आए तो फ़ौरन कहें: ‘अऊज़ु बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम’।
  2. सूरह नास की कसरत: सूरह नास को समझकर पढ़ने से शैतान ख़न्नास (जो ज़िक्र-ए-इलाही से भाग जाता है) दूर हो जाता है।
  3. बाएं कंधे की तरफ़ थुतकारना: हदीस में है कि नमाज़ में वसवसा डालने वाले शैतान (ख़िंज़ब) से बचने के लिए बाएं जानिब तीन बार हल्के से थुतकार कर अल्लाह की पनाह माँगें।

सूरह फ़लक़ के लिए सूरह फ़लक़ हिंदी में, और आयतल कुर्सी हिंदी में ज़रूर पढ़ें।

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