सूरह हुमज़ाह (Surah Humazah / Al-Humazah) क़ुरआन मजीद की 104वीं सूरह है। यह मक्की सूरह है, जिसमें 9 आयतें और 1 रुकूअ है। ‘हुमज़ाह’ का मतलब है ‘सामने मुँह पर ताने मारने वाला, दिल दुखाने वाला’ और ‘लुमज़ाह’ का मतलब है ‘पीठ पीछे बुराई (ग़ीबत / चुग़लख़ोरी) करने वाला’। यह सूरह मक्का के उन दौलतमंद मुशरिकीन (जैसे अख़नस बिन शरीक़, वलीद बिन मुग़ीरा और उमय्या बिन ख़लफ़) के बारे में नाज़िल हुई जो अपने माल व दौलत पर इतराते थे और ग़रीब मुसलमानों का मज़ाक़ उड़ाते थे। इस सूरह में माल के तकब्बुर और बद-कलामी की सज़ा के तौर पर ‘हुतमा’ (चूर-चूर कर देने वाली भड़कती आग) का हौलनाक नक्शा खींचा गया है। कन्ज़ुल ईमान तर्जुमे के साथ यहाँ मुकम्मल मतन पेश है।
| सूरह का नाम | नंबर | आयतें | पारा | नुज़ूल (स्थान) |
|---|---|---|---|---|
| सूरह अल-हुमज़ाह (الهمزة) | 104वीं | 9 आयतें | 30वाँ पारा (अम्म पारा) | मक्की |
सूरह हुमज़ाह अरबी मतन, हिंदी उच्चारण और तर्जुमा (आयत दर आयत)
بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ
“अल्लाह के नाम से शुरू जो निहायत मेहरबान रहमत वाला।”
وَیْلٌ لِّكُلِّ هُمَزَةٍ لُّمَزَةِ ۙ ۱
हिंदी उच्चारण: वैलुल लिकुल्लि हुमज़तिल लुमज़ह (1)
कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: ख़राबी (हलाकत) है उसके लिए जो लोगों के मुँह पर ताने दे और पीठ पीछे बुराई करे।
اۨلَّذِیْ جَمَعَ مَالًا وَّعَدَّدَهٗ ۙ ۲
हिंदी उच्चारण: अल्लज़ी जमआ मालंव व अद्ददह (2)
कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: जिसने माल जोड़ा और गिन-गिन कर रखा।
یَحْسَبُ اَنَّ مَالَهٗۤ اَخْلَدَهٗ ۚ ۳
हिंदी उच्चारण: यहसबु अन्ना मालहू अख़लदह (3)
कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: समझता है कि उसका माल उसे हमेशा ज़िंदा रखेगा।
كَلَّا لَیُنْۢبَذَنَّ فِی الْحُطَمَةِ ۪ ۙ ۴
हिंदी उच्चारण: कल्ला लयुम्बज़न्ना फ़िल् हुतमह (4)
कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: हरगिज़ नहीं! वह ज़रूर ‘हुतमा’ में फेंका जाएगा।
وَمَآ اَدْرٰىكَ مَا الْحُطَمَةُ ؕ ۵
हिंदी उच्चारण: व मा अदराका मल हुतमह (5)
कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: और तुमने क्या जाना कि हुतमा क्या है?
نَارُ اللّٰهِ الْمُوْقَدَةُ ۪ ۙ ۶
हिंदी उच्चारण: नारुल्लाहिन् मूक़दह (6)
कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: वह अल्लाह की भड़काई हुई आग है।
الَّتِیْ تَطَّلِعُ عَلَى الْاَفْـِٕدَةِ ؕ ۷
हिंदी उच्चारण: अल्लती तत्तलिउ अलल् अफ़-इदह (7)
कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: जो दिलों पर चढ़ जाएगी।
اِنَّهَا عَلَیْهِمْ مُّؤْصَدَةٌ ۙ ۸
हिंदी उच्चारण: इन्नहा अलैहिम मुअ-सदह (8)
कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: बेशक वह उन पर बंद कर दी जाएगी।
فِیْ عَمَدٍ مُّمَدَّدَةٍ ۹
हिंदी उच्चारण: फ़ी अमदिम मुमद्ददह (9)
कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: लंबे-लंबे खंभों में (बाँध कर)।
सूरह हुमज़ाह से मिलने वाली 3 बड़ी नसीहतें
- ग़ीबत और चुग़लख़ोरी से परहेज़: किसी की पीठ पीछे बुराई करना या सामने ताने मारना कबीरा गुनाह है। हदीस में है: “चुग़लख़ोर जन्नत में नहीं जाएगा।”
- माल का तकब्बुर न करना: माल दुनियावी आज़माइश है, यह इंसान को मौत और क़ब्र से नहीं बचा सकता। उसका हक़ (ज़कात व सदक़ा) अदा करना लाज़िम है। (देखें: ज़कात का सही निसाब)।
- ‘हुतमा’ की आग का ख़ौफ़: यह ऐसी आग है जो जिस्म को जलाकर दिल तक पहुँचेगी और गुनाहगारों को खंभों में जकड़ दिया जाएगा ताकि वे बाहर न निकल सकें।
सूरह फ़ील के लिए सूरह फ़ील हिंदी में, और सूरह असर हिंदी में ज़रूर पढ़ें।
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