Skip to content
सूरह क़ुरैश हिंदी में: ली-ईलाफ़ि क़ुरैश अरबी मतन, तर्जुमा, रिज़्क़ में बरकत और ख़ौफ़ से अमन की फ़ज़ीलत
AL Quran

सूरह क़ुरैश हिंदी में: ली-ईलाफ़ि क़ुरैश अरबी मतन, तर्जुमा, रिज़्क़ में बरकत और ख़ौफ़ से अमन की फ़ज़ीलत

admin
admin
5 min read 25 views

सूरह क़ुरैश (Surah Quraish) क़ुरआन मजीद की 106वीं सूरह है। यह मक्की सूरह है, जिसमें 4 आयतें और 1 रुकूअ है। इस सूरह में अल्लाह तआला ने क़बीला-ए-कुरैश पर अपने उन दो अज़ीम एहसानात का ज़िक्र फ़रमाया है, जिनकी बदौलत वे पूरे अरब में इज़्ज़त और आराम की ज़िंदगी बसर करते थे: पहला ‘भूख में रिज़्क़ अता करना’ और दूसरा ‘हर क़िस्म के डर व ख़ौफ़ से अमन देना’। कुरैश के लोग सर्दियों में यमन और गर्मियों में शाम (सीरिया) का तिजारती सफ़र करते थे और खाना-ए-काबा के मुजाविर होने की वजह से कोई डाकू उन्हें नहीं लूटता था। अल्लाह ने उन्हें हुक्म दिया कि इन नेमतों के बदले वे सिर्फ़ ‘इस घर (काबा) के रब’ की इबादत करें। कन्ज़ुल ईमान तर्जुमे के साथ मुकम्मल सूरह यहाँ दर्ज है।

सूरह का नाम नंबर आयतें पारा नुज़ूल (स्थान)
सूरह क़ुरैश (قريش) 106वीं 4 आयतें 30वाँ पारा (अम्म पारा) मक्की
Table of Contents

सूरह क़ुरैश अरबी मतन, हिंदी उच्चारण और तर्जुमा (आयत दर आयत)

بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ ۝

“अल्लाह के नाम से शुरू जो निहायत मेहरबान रहमत वाला।”


لِاِیْلٰفِ قُرَیْشٍ ۙ ۝۱

हिंदी उच्चारण: लि-ईलाफ़ि क़ुरैश (1)

कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: इसलिए कि कुरैश को मेल दिया।

اٖلٰفِهِمْ رِحْلَةَ الشِّتَآءِ وَالصَّیْفِ ۚ ۝۲

हिंदी उच्चारण: ईलाफ़िहिम रिहलतश शिता-इ वस-सैफ़ (2)

कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: उनके जाड़े और गर्मी दोनों के कूच में उनका मेल।

فَلْیَعْبُدُوْا رَبَّ هٰذَا الْبَیْتِ ۙ ۝۳

हिंदी उच्चारण: फ़ल-याअबुदू रब्बा हाज़ल बैत (3)

कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: तो उन्हें चाहिए कि इस घर के रब की इबादत करें।

الَّذِیْۤ اَطْعَمَهُمْ مِّنْ جُوْعٍ ۙ وَّاٰمَنَهُمْ مِّنْ خَوْفٍ ۝۴

हिंदी उच्चारण: अल्लज़ी अत-अमहुम मिन् जूइव व आमनहुम मिन् ख़ौफ़ (4)

कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: जिसने उन्हें भूख में खाना दिया और एक बड़े ख़ौफ़ से उन्हें अमन बख़्शा।

सूरह क़ुरैश की अज़ीम फ़ज़ीलत और अमली तासीर

🤲 खाने में बरकत और ज़हर से हिफ़ाज़त: इमाम अबू बक्र इब्नुल अरबी और सुन्नी उलमा फ़रमाते हैं कि जो शख़्स खाने से पहले या खाने के बाद सूरह क़ुरैश पढ़ ले, अल्लाह तआला उस खाने में बीमारी या नुक़सान पैदा नहीं फ़रमाता और रिज़्क़ में बरकत अता फ़रमाता है। सफ़र में ख़ौफ़ और हादसों से बचने के लिए भी यह सूरह अक्सीर है।
📚 हवाला: तफ़सीरुल क़ुरतबी, सूरह क़ुरैश; बहारे शरीअत

सूरह क़ुरैश पढ़ने के 3 ख़ास फ़ायदे

  1. रिज़्क़ की तंगी से नजात: जो शख़्स रोज़ाना सुबह या शाम सूरह क़ुरैश की तिलावत करता है, अल्लाह उसे भूख और फ़ाक़ा-कशी से महफ़ूज़ रखता है।
  2. दिल के ख़ौफ़ और बेचैनी से अमन: किसी भी क़िस्म के डर, दुश्मन के ख़ौफ़ या दिमागी बेचैनी के वक़्त इस सूरह का विर्द करने से दिल को सुकून नसीब होता है।
  3. सफ़र की सलामती: सफ़र पर रवाना होते वक़्त सूरह क़ुरैश पढ़ने वाला ब-हिफ़ाज़त अपने घर लौटता है। (देखें: सफ़र की दुआ हिंदी में)।

सूरह फ़ील के लिए सूरह फ़ील हिंदी में, और सूरह कौसर हिंदी में पढ़ें।

How useful was this post?

Click on a star to rate it!

1.0 out of 5 · 1 vote

No comments yet

Be the first to share your thoughts.

Leave a Comment

1-Click Google Verification to post comment:
To prevent spam, comments require a verified Google account (no password needed, only name & email).