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सूरह कौसर हिंदी में: इन्ना आत़ैनाकल कौसर अरबी टेक्स्ट, तर्जुमा और अज़ीम फ़ज़ीलत
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सूरह कौसर हिंदी में: इन्ना आत़ैनाकल कौसर अरबी टेक्स्ट, तर्जुमा और अज़ीम फ़ज़ीलत

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सूरह कौसर (Surah Kausar / Al-Kawthar) क़ुरआन मजीद की 108वीं सूरह है। यह क़ुरआन करीम की सबसे छोटी सूरह है, जिसमें सिर्फ़ 3 आयतें, 10 कलिमे और 42 हुरूफ़ हैं। यह मक्की सूरह है। जब नबी करीम ‎ﷺ‎ के बेटे हज़रत क़ासिम और हज़रत अब्दुल्लाह का बचपन में इंतिक़ाल हुआ, तो मुशरिकीन-ए-मक्का (आस बिन वाइल वग़ैरा) ने ताना दिया कि हुज़ूर की औलाद न रही और नस्ल ख़त्म हो गई (अब्तर हो गए)। इस पर अल्लाह तआला ने अपने हबीब की तसल्ली और अज़मत के इज़हार के लिए सूरह कौसर नाज़िल फ़रमाई और हुज़ूर को ‘हौज़े कौसर’ व ख़ैर-ए-कसीर की बशारत दी। कन्ज़ुल ईमान तर्जुमे के साथ यहाँ मुकम्मल मतन पेश है।

सूरह का नाम नंबर आयतें पारा नुज़ूल (स्थान)
सूरह अल-कौसर (الكوثر) 108वीं (सबसे छोटी सूरह) 3 आयतें 30वाँ पारा (अम्म पारा) मक्की
Table of Contents

सूरह कौसर अरबी मतन, हिंदी उच्चारण और तर्जुमा (आयत दर आयत)

بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ ۝

“अल्लाह के नाम से शुरू जो निहायत मेहरबान रहमत वाला।”


اِنَّآ اَعْطَیْنٰكَ الْكَوْثَرَ ۭ ۝۱

हिंदी उच्चारण: इन्ना आत़ैनाकल कौसर (1)

कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: ऐ महबूब! बेशक हमने तुम्हें बे-शुमार ख़ूबियाँ (और कौसर) अता फ़रमाईं।

فَصَلِّ لِرَبِّكَ وَانْحَرْ ۭ ۝۲

हिंदी उच्चारण: फ़सल्लि लिरब्बिका वन्-हर (2)

कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: तो तुम अपने रब के लिए नमाज़ पढ़ो और क़ुरबानी करो।

اِنَّ شَانِئَكَ هُوَ الْاَبْتَرُ ۝۳

हिंदी उच्चारण: इन्ना शानि-अका हुवल अब्तर (3)

कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: बेशक जो तुम्हारा दुश्मन है वही हर ख़ैर से महरूम और बे-निशान है।

‘हौज़े कौसर’ की अज़ीम शान और सिफ़ात

💧 जन्नत की नहर और हौज़: हज़रत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ‎ﷺ‎ ने फ़रमाया: “कौसर जन्नत में एक नहर है जो मेरे रब ने मुझे अता फ़रमाई है। उसका पानी दूध से ज़्यादा सफ़ेद और शहद से ज़्यादा मीठा है। उसके किनारे मोतियों के गुंबद हैं और उसकी मिट्टी कस्तूरी है। उसके बर्तन आसमान के तारों की तादाद के बराबर हैं, जो शख़्स उससे एक घूंट पी लेगा वह फिर कभी प्यासा न होगा।”
📚 हवाला: सहीह बुख़ारी, किताबुर रिक़ाक़, हदीस: 6579; सहीह मुस्लिम, हदीस: 400

सूरह कौसर पढ़ने की फ़ज़ीलतें

  • दुश्मनों पर ग़लबा: जो शख़्स सूरह कौसर की कसरत करता है, अल्लाह उसे ज़ालिमों और हसीदों के शर से महफ़ूज़ रखता है।
  • क़ुरबानी और नमाज़ की ताकीद: दूसरी आयत में अल्लाह तआला ने इख़लास के साथ सिर्फ़ अल्लाह के लिए नमाज़ पढ़ने और क़ुरबानी करने का हुक्म दिया है।
  • रिज़्क़ और नेमतों में बरकत: यह सूरह अल्लाह के अज़ीम एहसानात और शुक्रगुज़ारी का इज़हार है।

सूरह यासीन के लिए सूरह यासीन हिंदी में, और फ़ज्र की नमाज़ का तरीक़ा पढ़ें।

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