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सूरह फ़लक़ हिंदी में: अरबी टेक्स्ट, कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा और हिफ़ाज़त की अज़ीम फ़ज़ीलत
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सूरह फ़लक़ हिंदी में: अरबी टेक्स्ट, कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा और हिफ़ाज़त की अज़ीम फ़ज़ीलत

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सूरह फ़लक़ (Surah Falaq) क़ुरआन मजीद की 113वीं सूरह है। यह मक्की सूरह है, जिसमें 5 आयतें और 1 रुकूअ है। इस सूरह का नाम पहली ही आयत के लफ़्ज़ ‘फ़लक़’ (यानी सुबह की रौशनी / पौ फटना) से लिया गया है। सूरह फ़लक़ और सूरह नास को मिलाकर ‘मुअव्वज़तैन’ (यानी अल्लाह की पनाह चाहने वाली दो सूरहें) कहा जाता है। हर क़िस्म के जादू-टोने, हसद (जलन), बुरी नज़र और रात की तारीकी के शर से हिफ़ाज़त के लिए यह सूरह एक बेमिसाल ढाल है। आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान रहमतुल्लाह अलैह के कन्ज़ुल ईमान तर्जुमे और सहीह हदीसों की रोशनी में यहाँ मुकम्मल तफ़सील पेश है।

सूरह का नाम नंबर आयतें पारा नुज़ूल (स्थान)
सूरह अल-फ़लक़ (الفلق) 113वीं 5 आयतें 30वाँ पारा (अम्म पारा) मक्की (कुछ के नज़दीक मदनी)

सूरह फ़लक़ अरबी मतन, हिंदी उच्चारण और तर्जुमा (आयत दर आयत)

بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ ۝

“अल्लाह के नाम से शुरू जो निहायत मेहरबान रहमत वाला।”


قُلْ اَعُوْذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ ۙ ۝۱

हिंदी उच्चारण: क़ुल अऊज़ु बिरब्बिल फ़लक़ (1)

कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: तुम फ़रमाओ मैं उसकी पनाह लेता हूँ जो सुबह का पैदा करने वाला है।

مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ ۙ ۝۲

हिंदी उच्चारण: मिन् शर्रि मा ख़लक़ (2)

कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: उसकी सब मख़लूक़ के शर से।

وَمِنْ شَرِّ غَاسِقٍ اِذَا وَقَبَ ۙ ۝۳

हिंदी उच्चारण: व मिन् शर्रि ग़ासिक़िन् इज़ा वक़ब (3)

कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: और अंधेरी रात के शर से जब वह डूब जाए।

وَمِنْ شَرِّ النَّفّٰثٰتِ فِی الْعُقَدِ ۙ ۝۴

हिंदी उच्चारण: व मिन् शर्रिन् नफ़्फ़ासाति फ़िल् उक़द (4)

कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: और उन औरतों (या नफ़्सों) के शर से जो गिरहों में फूँकती हैं।

وَمِنْ شَرِّ حَاسِدٍ اِذَا حَسَدَ ۝۵

हिंदी उच्चारण: व मिन् शर्रि हासिदिन् इज़ा हसद (5)

कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा: और हसद करने वाले के शर से जब वह हसद करे।

सूरह फ़लक़ की अज़ीम फ़ज़ीलत और हदीस के हवाले

🛡️ जादू और बुरी नज़र का इलाज: हज़रत आइशा सिद्दीक़ा रज़ियल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि जब भी रसूलुल्लाह ‎ﷺ‎ अपने बिस्तर पर आराम फ़रमाने तशरीफ़ लाते, तो हर रात अपने दोनों हाथों की हथेलियों को मिलाकर सूरह इख़लास, सूरह फ़लक़ और सूरह नास पढ़ते और उन पर फूँकते, फिर जहाँ तक मुमकिन होता अपने जिस्म-ए-अतहर पर हाथ फेरते (सिर, चेहरा और आगे के हिस्से से शुरू फ़रमाते)। ऐसा आप तीन मर्तबा फ़रमाते थे।
📚 हवाला: सहीह बुख़ारी, किताबु फ़ज़ाइलिल क़ुरआन, हदीस: 5017
📖 पनाह माँगने की सबसे बेहतरीन सूरह: हज़रत उक़्बा बिन आमिर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ‎ﷺ‎ ने फ़रमाया: “क्या तुमने नहीं देखा कि आज रात ऐसी आयतें नाज़िल हुई हैं जिनकी कोई मिसाल नहीं देखी गई? वे सूरह फ़लक़ (क़ुल अऊज़ु बिरब्बिल फ़लक़) और सूरह नास (क़ुल अऊज़ु बिरब्बिन्नास) हैं।”
📚 हवाला: सहीह मुस्लिम, किताबु सलातिल मुसाफ़िरीन, हदीस: 814

सूरह फ़लक़ पढ़ने के अमली फ़ायदे

  • हसद और हसीदों के शर से सुरक्षा: किसी भी शख़्स की नज़र-ए-बद और जलन के नुकसान से अल्लाह की पनाह मिलती है।
  • जादू-टोने से हिफ़ाज़त: जब यहूदी लबीद बिन आसम ने नबी करीम पर जादू करने की साज़िश की थी, तब जिब्रील अलैहिस्सलाम यही मुअव्वज़तैन लेकर नाज़िल हुए थे और उसकी गिरहें खुल गई थीं।
  • रात को डर और घबराहट से नजात: सोने से पहले सूरह फ़लक़ और नास पढ़कर दम करने से रात को डरावने ख़्वाब नहीं आते।

सूरह नास के लिए सूरह नास हिंदी में, और तौहीद की सूरह के लिए सूरह इख़लास हिंदी में पढ़ें।

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