क़यामत में जो चीज़ें कभी फ़ना नहीं होंगी इस्लामी अक़ाइद और इल्मुल कलाम का एक निहायत अहम और बुनियादी मसला है। क़ुरआन मजीद की सूरह रहमान में साफ़ फ़रमाया गया है कि “ज़मीन पर जो कुछ है सब फ़ना होने वाला है, और सिर्फ़ तेरे रब की ज़ात ही बाक़ी रहेगी।” लेकिन इसके साथ ही हदीस शरीफ़ और अक़ाइद-ए-अहले सुन्नत व जमाअत की मुस्तनद किताबों (जैसे इमाम जलालुद्दीन सुयूती की शराहुस सुदूर और मवाहिबुल लदुनिया) में ज़िक्र मिलता है कि अल्लाह तआला ने अपनी हिकमत से कुछ ख़ास मख़्लूक़ात को सूर फूँके जाने के वक़्त भी फ़ना (ख़त्म) होने से महफ़ूज़ रखा है। आइए क़ुरआन व हदीस की रोशनी में उन चीज़ों की हक़ीक़त को आसान हिंदी में समझें।
Table of Contents
- 1. क़ुरआन मजीद में कुल्लू मन अलैहा फ़ान का उसूल
- 2. वे 7 अहम चीज़ें जो कभी फ़ना नहीं होंगी (हदीस व फ़िक़्ह)
- 3. अम्बिया-ए-किराम के मुबारक अजसाम (शरीर) भी महफ़ूज़ हैं
- 4. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
- 4.1 1. क्या अर्श और कुर्सी कभी ख़त्म होंगे?
- 4.2 2. मौत के बाद रूह का क्या होता है?
- 4.3 3. अम्बिया के जिस्म मिट्टी में क्यों नहीं गलते?
- 4.4 4. क्या जन्नत और दोज़ख़ कभी ख़त्म हो जाएँगे?
क़ुरआन मजीद में कुल्लू मन अलैहा फ़ान का उसूल
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त सूरह रहमान में इरशाद फ़रमाता है:
तर्जुमा: “ज़मीन पर जो कोई है सब फ़ना होने वाला है। और सिर्फ़ तुम्हारे रब की ज़ात बाक़ी रहेगी जो अज़मत और बुज़ुर्गी वाला है।”
📖 हवाला: सूरह अर-रहमान (55), आयत: 26–27
अहले सुन्नत का अक़ीदा है कि असल ‘क़दीम’ और हमेशा से हमेशा तक रहने वाली ज़ात सिर्फ़ अल्लाह तआला की है। मख़्लूक़ात में से जो चीज़ें फ़ना नहीं होंगी, वे खुद से नहीं बल्कि अल्लाह के हुक्म और उसकी अता से बाक़ी रहेंगी।
वे 7 अहम चीज़ें जो कभी फ़ना नहीं होंगी (हदीस व फ़िक़्ह)
मुहद्दिसीन-ए-किराम ने सहीह अहादीस की रोशनी में सात (7) ऐसी अज़ीम चीज़ों का ज़िक्र फ़रमाया है जिन्हें क़यामत के रोज़ सूर फूँकने के वक़्त मौत या मुकम्मल फ़ना नहीं आएगी:
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अर्श-ए-इलाही:
अर्श तमाम मख़्लूक़ात में सबसे अज़ीम और बड़ा जिस्म है, जो अल्लाह के जलाल का मज़हर है। हदीस शरीफ़ में आता है कि सूर फूँके जाने के बाद जब हुज़ूर ﷺ बेदार होंगे, तो हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को अर्श का पाया थामे हुए पाएँगे (सहीह बुख़ारी: 2411)।
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कुर्सी:
सूरह बक़रह की आयतल कुर्सी में फ़रमाया गया: “उसकी कुर्सी ने आसमानों और ज़मीन को अपने घेरे में ले रखा है।” हदीस में है कि सातों आसमान और ज़मीन कुर्सी के सामने ऐसे हैं जैसे किसी बड़े चटियल मैदान में एक छोटा सा छल्ला पड़ा हो।
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लौह-ए-महफ़ूज़:
वह मुक़द्दस तख़्ती जिस पर अल्लाह तआला ने क़यामत तक होने वाले तमाम वाक़िआत, इंसानों की तक़दीर और क़ुरआन मजीद को महफ़ूज़ फ़रमाया है।
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क़लम:
हदीस में आता है कि अल्लाह ने सबसे पहले क़लम को पैदा फ़रमाया और हुक्म दिया: “लिख!” क़लम ने अर्ज़ किया: “क्या लिखूँ?” फ़रमाया: “क़यामत तक जो कुछ होने वाला है सब लिख दे।” (जामिअ तिर्मिज़ी: 2155)।
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इंसानी अरवाह (रूहें):
इंसान का जिस्म मिट्टी में मिल जाता है, लेकिन रूह कभी फ़ना नहीं होती। मौत महज़ रूह का जिस्म से जुदा होना है। नेक रूहें इल्लीय्यीन में और बद रूहें सिज्जीन में क़यामत तक बाक़ी रहती हैं।
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जन्नत और उसकी नेमतें:
जन्नत हमेशा-हमेशा के लिए बनाई गई है। क़ुरआन में बार-बार फ़रमाया गया: “ख़ालिदीना फ़ीहा अबदा” (वे हमेशा उसमें रहेंगे)। जन्नत के महल, हूरें और नेमतें कभी ख़त्म नहीं होंगी।
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जहन्नम (दोज़ख़):
दोज़ख़ भी हमेशा बाक़ी रहने वाली मख़्लूक़ है। काफ़िरों और मुशरिकों के लिए जहन्नम की आग का अज़ाब हमेशा रहेगा और कभी ख़त्म नहीं होगा।
अम्बिया-ए-किराम के मुबारक अजसाम (शरीर) भी महफ़ूज़ हैं
हज़रत औस बिन औस रदियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया:
“बेशक अल्लाह तआला ने ज़मीन पर अम्बिया (अलैहिमुस्सलाम) के जिस्मों का खाना हराम फ़रमा दिया है। पस अल्लाह के नबी ज़िंदा होते हैं और उन्हें रिज़्क़ दिया जाता है।”
📚 हवाला: सुनन अबू दाऊद, किताबुस सलाह, हदीस: 1047; सुनन इब्ने माजा: 1636 (सनद सहीह)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. क्या अर्श और कुर्सी कभी ख़त्म होंगे?
नहीं। अहले सुन्नत के अक़ाइद और अहादीस के मुताबिक़ अर्श, कुर्सी, लौह और क़लम क़यामत के दिन भी फ़ना नहीं होंगे बल्कि बाक़ी रहेंगे।
2. मौत के बाद रूह का क्या होता है?
मौत के बाद रूह ख़त्म नहीं होती। मोमिनों की रूहें इल्लीय्यीन या मक़ामे राहत में रहती हैं और गुनाहगारों की रूहें अपने आमाल के मुताबिक़ क़ैद में रहती हैं।
3. अम्बिया के जिस्म मिट्टी में क्यों नहीं गलते?
सहीह हदीस के मुताबिक़ अल्लाह तआला ने ज़मीन पर पैग़म्बरों के मुक़द्दस जिस्मों को खाना हराम फ़रमा दिया है। वे अपनी क़ब्रों में ज़िंदा हैं और नमाज़ें पढ़ते हैं (मुसनद अबू याला)।
4. क्या जन्नत और दोज़ख़ कभी ख़त्म हो जाएँगे?
क़ुरआन मजीद की मुतअद्दिद आयतों के मुताबिक़ जन्नत और दोज़ख़ हमेशा-हमेशा बाक़ी रहने वाली जगहें हैं, वे कभी फ़ना नहीं होंगी।
अल्लाह की किबरियाई के बयान के लिए आयतल कुर्सी हिंदी में और सूरह तौहीद के लिए सूरह इख़्लास हिंदी में ज़रूर पढ़ें।
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