कुछ ऐसा करदे मेरे किर्दिगार आँखों में इश्क़-ए-रसूल ﷺ और मदीना मुनव्वरा की हसरत में डूबी हुई एक बेहद मक़बूल और पुर-असर नात शरीफ़ है। अलहाज मुहम्मद ओवैस रज़ा क़ादरी की दर्द-भरी आवाज़ में यह नातिया कलाम हर आशिक़े रसूल के दिल को रुला देता है। इस नात में बंदा अपने ख़ालिक़ से यह दुआ माँगता है कि मेरी आँखों में हमेशा सरकारे दो जहाँ ﷺ के गुंबदे ख़ज़रा का जलवा बसा रहे और सोते-जागते हर लम्हा मदीने की याद तड़पाती रहे। आइए इस मुकम्मल नात शरीफ़, इसके रूहानी अशआर और मफ़हूम को आसान हिंदी में समझें।
Table of Contents
- 1. कुछ ऐसा करदे मेरे किर्दिगार आँखों में (मुकम्मल नात लिरिक्स)
- 2. अशआर का आसान हिंदी मफ़हूम
- 3. ख़्वाब में हुज़ूर ﷺ की ज़ियारत की हदीस
- 4. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
- 4.1 1. ‘किर्दिगार’ का क्या मतलब होता है?
- 4.2 2. ‘रूए यार’ किसे कहा गया है?
- 4.3 3. ख़्वाब में नबी ﷺ का दीदार कैसे नसीब हो?
- 4.4 4. क्या नात पढ़ना सवाब का काम है?
कुछ ऐसा करदे मेरे किर्दिगार आँखों में (मुकम्मल नात लिरिक्स)
कुछ ऐसा करदे मेरे किर्दिगार आँखों में
हमेशा नक़्श रहे रूए यार आँखों में
उन्हीं का ज़िक्र रहे और उन्हीं की बातें हों
रहे मदीने का ही इंतिज़ार आँखों में
नज़र से अपनी हटाऊँ न गुंबदे ख़ज़रा
सजा के रखूँ यही लालाज़ार आँखों में
पिएँगे जामे शफ़ाअत करम की बारिश में
रहेगा जलवा-ए-कौसर-शिआर आँखों में
वो आ रहे हैं शफ़ाअत का ताज सर पे लिए
उतर रहा है करम बार बार आँखों में
दिखा दे ख़्वाब में सूरत शहे मदीना की
तड़प रहा है दिल-ए-बेक़रार आँखों में
ओवैस जब भी चले सूए तैबा दीवाने
चमक उठे तिरी रहमत की धार आँखों में
अशआर का आसान हिंदी मफ़हूम
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शेर 1: रूए यार (हुज़ूर ﷺ के चेहरे) का नक़्श:
ऐ मेरे पालने वाले अल्लाह! मेरी आँखों पर ऐसा करम फ़रमा दे कि मेरे महबूब रसूलुल्लाह ﷺ के नूरानी चेहरे का तसव्वुर हर वक़्त मेरी पुतलियों में बसा रहे।
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शेर 3: गुंबदे ख़ज़रा की जियारत:
मदीना मुनव्वरा में हुज़ूर के रोज़ा-ए-मुबारक का सबज़ (हरा) गुंबद मेरी निगाहों से कभी दूर न हो और उसका नूरानी नज़ारा मेरी आँखों की ठंडक बना रहे।
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शेर 6: ख़्वाब में ज़ियारत की तड़प:
ऐ अल्लाह! मेरे तड़पते हुए दिल पर रहम फ़रमा और कम से कम ख़्वाब ही में मुझे अपने प्यारे नबी ﷺ की मुबारक़ सूरत की ज़ियारत नसीब फ़रमा दे।
ख़्वाब में हुज़ूर ﷺ की ज़ियारत की हदीस
हज़रत अबू हुरैरा रदियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया:
“जिसने मुझे ख़्वाब में देखा उसने सचमुच मुझे ही देखा, क्योंकि शैतान मेरी सूरत नहीं बना सकता।”
📚 हवाला: सहीह बुख़ारी, किताबुत ताबीर, हदीस: 6993; सहीह मुस्लिम: 2266
उलमा फ़रमाते हैं कि जो शख़्स सुन्नतों पर अमल करता है, गुनाहों से बचता है और कसरत से दरूद शरीफ़ पढ़ता है, अल्लाह तआला उसे ख़्वाब में आक़ा करीम ﷺ के दीदार की नेमत अता फ़रमाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. ‘किर्दिगार’ का क्या मतलब होता है?
‘किर्दिगार’ फ़ारसी ज़बान का लफ़्ज़ है, जिसका मतलब ‘पैदा करने वाला, पालने वाला, अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त’ होता है।
2. ‘रूए यार’ किसे कहा गया है?
‘रूए यार’ का मतलब ‘दोस्त या महबूब का चेहरा’ है। नात शरीफ़ में इससे मुराद हुज़ूर सरवरे कायनात हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ का मुक़द्दस नूरानी चेहरा है।
3. ख़्वाब में नबी ﷺ का दीदार कैसे नसीब हो?
बा-वुज़ू होकर सोना, सूरह कौसर और दरूद-ए-इब्राहीमी कसरत से पढ़ना, और दिल को गुनाहों से पाक रखना ख़्वाब में दीदार के लिए मुजर्रब अमल है।
4. क्या नात पढ़ना सवाब का काम है?
जी हाँ, हुज़ूर अकरम ﷺ की शान में नात पढ़ना हज़रत हस्सान बिन साबित रदियल्लाहु अन्हु की सुन्नत है, जिनके लिए मस्जिद-ए-नबवी में मिम्बर बिछाया जाता था (सहीह बुख़ारी: 453)।
नबी की तालीमात के लिए नबी की तालीमात हिंदी में और दरूद की फ़ज़ीलत के लिए 40 हदीस-ए-नबवी हिंदी में ज़रूर पढ़ें।
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