Roza Kis chij Se Toot Jata Hai (रोज़ा तोड़ने वाली चीज़ें / मुफ़्सिदात-ए-सौम): रमज़ान के रोज़े की हालत में किन चीज़ों से रोज़ा टूट जाता है और किन सूरतों में सिर्फ़ एक रोज़े की ‘क़ज़ा’ लाज़िम आती है और किन सूरतों में सख़्त ‘कफ़्फ़ारा’ (60 लगातार रोज़े) वाजिब होता है—यह जानना हर रोज़ेदार पर फ़र्ज़ है। सुन्नी हनफ़ी फ़िक़्ह और बहारे शरीअत (हिस्सा 5) की रोशनी में रोज़ा फ़ासिद करने वाले तमाम मसाइल यहाँ तफ़सील से पेश हैं।
Table of Contents
- 1. बग़ैर उज़्र रोज़ा तोड़ने की सख़्त वईद (हदीस)
- 2. वे चीज़ें जिनसे सिर्फ़ क़ज़ा वाजिब होती है (कफ़्फ़ारा नहीं)
- 3. वे सूरते जिनमें क़ज़ा और कफ़्फ़ारा दोनों फ़र्ज़ हैं
- 4. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- 4.1 Q1: Roza Kis chij Se Toot Jata Hai – क्या इंजेक्शन लगाने से रोज़ा टूटता है?
- 4.2 Q2: दाँत में फँसा हुआ खाना निगलने से रोज़ा कब टूटता है?
- 4.3 Q3: क्या आँख में आई-ड्रॉप डालने से रोज़ा टूट जाता है?
- 4.4 Q4: अगर रोज़ादार ग़लती से पानी पी ले तो क्या कफ़्फ़ारा देना होगा?
बग़ैर उज़्र रोज़ा तोड़ने की सख़्त वईद (हदीस)
रसूलुल्लाह ﷺ ने जानबूझकर बग़ैर किसी शरई उज़्र के रोज़ा छोड़ देने या तोड़ देने वालों के बारे में सख़्त वईदें इरशाद फ़रमाई हैं:
सहीह इब्ने ख़ुज़ैमा की हदीस:
“हज़रत अबू उमामा बाहिली (रज़ियल्लाहु अन्हु) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: ‘ख़्वाब में दो फ़रिश्ते मुझे एक पहाड़ पर ले गए जहाँ सख़्त चीख़-पुकार की आवाज़ें आ रही थीं। मैंने पूछा यह कैसी आवाज़ें हैं? उन्होंने कहा यह जहन्नमियों की चीख़ें हैं। फिर मैंने देखा कि कुछ लोग उलटे लटके हुए हैं और उनकी बाछें (जबड़े) चीरी जा रही हैं जिससे ख़ून बह रहा है। मैंने पूछा ये कौन लोग हैं? फ़रमाया: यह वे लोग हैं जो वक़्त से पहले (बग़ैर उज़्र) रोज़ा इफ़्तार कर देते थे।'”
📚 हवाला: सहीह इब्ने ख़ुज़ैमा, हदीस: 1986; सहीह इब्ने हिब्बान, हदीस: 7491।
वे चीज़ें जिनसे सिर्फ़ क़ज़ा वाजिब होती है (कफ़्फ़ारा नहीं)
सुन्नी हनफ़ी फ़िक़्ह के मुताबिक़ अगर रोज़ादार होना याद था और दर्ज ज़ैल सूरतों में से कोई बात पेश आ गई, तो रोज़ा टूट जाएगा और बाद में सिर्फ़ 1 रोज़े की क़ज़ा रखनी होगी (कोई कफ़्फ़ारा नहीं):
- कुल्ली या इस्तिनशाक़ में ग़लती: वज़ू करते वक़्त कुल्ली करते हुए बिला-क़स्द पानी हलक़ के नीचे उतर गया, या नाक में पानी चढ़ाते वक़्त दिमाग़ में चढ़ गया (बशर्ते रोज़ा याद हो)।
- सोते में खा-पी लेना: सोते हुए किसी ने पानी पिला दिया या कुछ खिला दिया, या बारिश की बूँद या ओला मुँह में गिर कर हलक़ में चला गया।
- ज़बरदस्ती खिलाया जाना (इकरार): किसी ने ज़बरदस्ती रोज़ेदार के मुँह में कोई चीज़ डाल दी और उसने निगल ली।
- मुँह में घुली हुई चीज़ निगलना: मुँह में शकर, गुड़ या रंगीन धागा रखा जिससे थूक मीठा या रंगीन हो गया और वह थूक निगल लिया।
- दाँत से ख़ून निकलना: दाँत से ख़ून निकल कर हलक़ में उतरा और ख़ून थूक से ज़्यादा या बराबर था, या कम था मगर उसका मज़ा हलक़ में महसूस हुआ।
- क़स्दन (जानबूझकर) हलक़ भर क़ै (उल्टी) करना: अगर जानबूझकर उँगली डालकर हलक़ भर कर उल्टी की तो रोज़ा टूट जाएगा। (ख़ुद-ब-ख़ुद उल्टी आने से नहीं टूटता)।
- कान या नाक में दवा डालना: नाक से दवा चढ़ाई या कान में तेल टपकाया और वह अंदर पहुँच गया।
- धुआँ जानबूझकर खींचना: अगरबत्ती, लोबान या सिगरेट/हुक्के का धुआँ जानबूझकर नाक या मुँह से अंदर खींचा।
- वक़्त की ग़लतफ़हमी: यह समझकर सहरी खा ली कि अभी रात बाक़ी है जबकि सुब्ह सादिक़ हो चुकी थी, या यह समझकर इफ़्तार कर लिया कि सूरज डूब गया जबकि सूरज अभी नहीं डूबा था।
वे सूरते जिनमें क़ज़ा और कफ़्फ़ारा दोनों फ़र्ज़ हैं
अगर किसी बालिग़, आक़िल मुसलमान ने रमज़ानुल मुबारक के अदा रोज़े में, रोज़ादार होना याद रखते हुए, बिला किसी शरई मजबूरी के जानबूझकर दर्ज ज़ैल काम किए तो रोज़ा टूट जाएगा और क़ज़ा के साथ-साथ सख़्त कफ़्फ़ारा भी लाज़िम होगा:
- जानबूझकर कोई ऐसी चीज़ खाना या पीना जिससे ग़िज़ा (पोषण) या लज़्ज़त या दवा हासिल होती हो (जैसे रोटी, पानी, चाय, फल आदि)।
- रोज़े की हालत में जानबूझकर अपनी बीवी से जिमाअ (हमबिस्तरी) करना।
- हुक्का, सिगरेट या पान-तम्बाकू जानबूझकर खाना या पीना।
रोज़े का कफ़्फ़ारा क्या है? 1 ग़ुलाम आज़ाद करना (जो आज मुमकिन नहीं), या लगातार बिना नागा किए 60 रोज़े रखना। अगर बीमारी या बुढ़ापे की वजह से 60 रोज़े रखने की ताक़त न हो तो 60 मिस्कीनों को दो वक़्त भरपेट खाना खिलाना या हर मिसकीन को सदक़ा-ए-फ़ित्र की मिक़दार (पौने दो सेर गेहूँ या उसकी क़ीमत) देना।
📚 हवाला: बहारे शरीअत, हिस्सा 5, सफ़ा 122-125; दुर्रे मुख़्तार व रद्दुल मुहतार; व फ़तावा आलमगीरी।
किन चीज़ों से रोज़ा नहीं टूटता, यह जानने के लिए हमारा मक़ाला Roza kab Nahi tutata he और रोज़ा छोड़ने की शरई रुख़सत के लिए Kab Roza Na Rakhne Ki Ijazat Hai ज़रूर पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: Roza Kis chij Se Toot Jata Hai – क्या इंजेक्शन लगाने से रोज़ा टूटता है?
हनफ़ी फ़िक़्ह के मोतमद क़ौल और जदीद उलमा-ए-किराम की तहक़ीक़ के मुताबिक़ गोश्त (Intramuscular) या नस (Intravenous) में लगने वाले आम दर्द या बीमारी के इंजेक्शन से रोज़ा नहीं टूटता, क्योंकि दवा रगें या पट्टों में जाती है, मैदे (पेट) या दिमाग़ के असली सुराख़ों से अंदर नहीं पहुँचती। अलबत्ता ताक़त का ड्रिप (Glucose) बिला ज़रूरत लगवाना मकरूह है।
Q2: दाँत में फँसा हुआ खाना निगलने से रोज़ा कब टूटता है?
अगर दाँत में फँसा हुआ खाना चने के बराबर या उससे बड़ा हो और उसे चबाकर निगल लिया तो रोज़ा टूट जाएगा। और अगर चने से छोटा था लेकिन मुँह से बाहर निकाल कर फिर दोबारा निगला तब भी रोज़ा टूट जाएगा।
Q3: क्या आँख में आई-ड्रॉप डालने से रोज़ा टूट जाता है?
नहीं, आँख में दवा या सुरमा डालने से रोज़ा बिल्कुल नहीं टूटता, चाहे हलक़ में उसका कड़वापन या मज़ा ही क्यों न महसूस हो।
Q4: अगर रोज़ादार ग़लती से पानी पी ले तो क्या कफ़्फ़ारा देना होगा?
नहीं, अगर ग़लती से (जैसे कुल्ली करते वक़्त) पानी हलक़ में उतर गया तो सिर्फ़ 1 रोज़े की क़ज़ा लाज़िम होगी, कफ़्फ़ारा नहीं होगा। कफ़्फ़ारा सिर्फ़ जानबूझकर बिला उज़्र रोज़ा तोड़ने पर होता है।
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