Sehri Aur Iftar Ki Hadees In Hindi (सहरी और इफ़्तार की हदीसें व फ़ज़ीलत): माहे रमज़ानुल मुबारक में रोज़ा रखने के लिए सहरी खाना और सूरज ग़ुरूब होने पर इफ़्तार करना सुन्नत-ए-मुस्तफ़ा ﷺ है। अहादीस-ए-मुबारका में सहरी खाने को सरापा बरकत और इफ़्तार में जल्दी करने को उम्मत की भलाई का ज़रिया क़रार दिया गया है। सुन्नी हनफ़ी फ़िक़्ह और बहारे शरीअत (हिस्सा 5) के मुताबिक़ सहरी व इफ़्तार की 19 मोतबर हदीसें यहाँ विस्तार से पेश हैं।
Table of Contents
- 1. सहरी की अज़ीम बरकतें और फ़ज़ीलत (हदीस 1 से 10)
- 2. इफ़्तार में जल्दी करने और फ़ज़ीलत की हदीसें (हदीस 11 से 19)
- 3. सहरी और इफ़्तार की मसनून दुआएँ
- 4. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- 4.1 Q1: Sehri Aur Iftar Ki Hadees In Hindi के मुताबिक़ सहरी का आख़िरी वक़्त क्या है?
- 4.2 Q2: अगर किसी ने सहरी नहीं खाई तो क्या उसका रोज़ा हो जाएगा?
- 4.3 Q3: इफ़्तार में खजूर न मिले तो किससे इफ़्तार करना चाहिए?
- 4.4 Q4: क्या रोज़ेदार को इफ़्तार कराने वाले को भी पूरा सवाब मिलता है?
सहरी की अज़ीम बरकतें और फ़ज़ीलत (हदीस 1 से 10)
रसूलुल्लाह ﷺ ने सहरी खाने की सख़्त ताकीद फ़रमाई है और इसके बेशुमार रूहानी व जिस्मानी फ़वाइद बयान फ़रमाए हैं:
हदीस 1: सहरी में बरकत है
“हज़रत अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया: ‘सहरी खाओ, क्योंकि सहरी खाने में बरकत है।'”
📚 हवाला: सहीह बुख़ारी, हदीस: 1923; सहीह मुस्लिम, हदीस: 1095।
- हदीस 2 (अहले किताब से फ़र्क़): सहीह मुस्लिम में हज़रत अम्र बिन अल-आस (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: “हमारे और अहले किताब (यहूद व नसारा) के रोज़ों के दरमियान फ़र्क़ सिर्फ़ सहरी का लुक़मा है।” (सहीह मुस्लिम: 1096)
- हदीस 3 (तीन चीज़ों में बरकत): तबरानी में हज़रत सलमान फ़ारसी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया: “तीन चीज़ों में बरकत रखी गई है—जमाअत में, सरीद (शोरबे में भीगी रोटी) में, और सहरी में।” (अल-मुजमुल कबीर लित-तबरानी)
- हदीस 4 (फ़रिश्तों का दुरूद व इस्तिग़फ़ार): इब्ने हिब्बान ने रिवायत किया कि हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया: “बेशक अल्लाह तआला और उसके फ़रिश्ते सहरी खाने वालों पर रहमत व दुरूद भेजते हैं।” (सहीह इब्ने हिब्बान: 3467)
- हदीस 5 (दिन के रोज़े पर मदद): इब्ने माजा में हज़रत इब्ने अब्बास से मरवी है कि हुज़ूर ने फ़रमाया: “सहरी खाकर दिन के रोज़े पर मदद हासिल करो और दोपहर में क़ैलूला (थोड़ी देर आराम) करके रात के क़ियाम (तरावीह व तहाज्जुद) पर मदद लो।” (सुनन इब्ने माजा: 1693)
- हदीस 6 (अल्लाह का तोहफ़ा): सुनन नसई में है कि एक सहाबी हुज़ूर की ख़िदमत में हाज़िर हुए जब आप सहरी खा रहे थे। आप ﷺ ने फ़रमाया: “यह एक बरकत है जो अल्लाह ने तुम्हें अता फ़रमाई है, पस इसे मत छोड़ना।” (सुनन नसई: 2162)
- हदीस 7 (सहरी के खाने पर कोई हिसाब नहीं): हज़रत इब्ने अब्बास से मरवी है कि नबी ﷺ ने फ़रमाया: “तीन शख़्सों से हलाल खाने पर क़यामत में कोई हिसाब नहीं लिया जाएगा—रोज़ेदार, सहरी खाने वाला, और अल्लाह की राह में सरहद की पहरेदारी करने वाला।” (तबरानी)
- हदीस 8 से 10 (एक घूँट पानी भी काफ़ी है): मुसनद अहमद में हज़रत अबू सईद ख़ुदरी से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया: “सहरी सरापा बरकत है, इसे हरगिज़ न छोड़ना, चाहे तुम में से कोई पानी का एक घूँट ही क्यों न पी ले।” (मुसनद अहमद: 11101)
इफ़्तार में जल्दी करने और फ़ज़ीलत की हदीसें (हदीस 11 से 19)
जैसे ही सूरज डूबने का यक़ीन हो जाए, फ़ौरन इफ़्तार करना सुन्नत-ए-मुअक्कदा और महबूब अमल है:
- हदीस 11 (उम्मत में ख़ैर व भलाई): सहीहैन में हज़रत सहल बिन सअद से मरवी है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: “लोग हमेशा भलाई के साथ रहेंगे जब तक कि वे इफ़्तार में जल्दी करते रहेंगे।” (बुख़ारी: 1957; मुस्लिम: 1098)
- हदीस 12 (सितारों का इंतज़ार न करना): सहीह इब्ने हिब्बान में है कि फ़रमाया: “मेरी उम्मत मेरी सुन्नत पर क़ायम रहेगी जब तक इफ़्तार के लिए सितारों के निकलने का इंतज़ार नहीं करेगी।”
- हदीस 13 (अल्लाह का महबूब तरीन बंदा): जामिअ तिरमिज़ी में हज़रत अबू हुरैरा से मरवी हदीस-ए-क़ुदसी है कि अल्लाह तआला फ़रमाता है: “मेरे बंदों में मुझे सबसे ज़्यादा प्यारा वह बंदा है जो इफ़्तार करने में सबसे ज़्यादा जल्दी करता है।” (तिरमिज़ी: 700)
- हदीस 14 (अल्लाह की 3 महबूब चीज़ें): हज़रत याला बिन मुर्रह से रिवायत है कि हुज़ूर ने फ़रमाया: “तीन चीज़ों को अल्लाह बेहद पसंद फ़रमाता है—इफ़्तार में जल्दी करना, सहरी में ताख़ीर (देरी) करना, और नमाज़ में सीधे हाथ को उल्टे हाथ पर बाँधना।” (तबरानी)
- हदीस 15 (दीन का ग़लबा): सुनन अबू दाऊद में है कि फ़रमाया: “यह दीन हमेशा ग़ालिब रहेगा जब तक लोग इफ़्तार में जल्दी करेंगे, क्योंकि यहूद व नसारा इफ़्तार में ताख़ीर करते थे।” (अबू दाऊद: 2353)
- हदीस 16 (खजूर या पानी से इफ़्तार): हज़रत सलमान बिन आमिर से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: “जब तुम में से कोई इफ़्तार करे तो खजूर या छुहारे से करे क्योंकि वह बरकत है, और अगर खजूर न मिले तो पानी से करे क्योंकि पानी पाक करने वाला है।” (तिरमिज़ी: 658)
- हदीस 17 (नमाज़-ए-मग़रिब से पहले इफ़्तार): हज़रत अनस फ़रमाते हैं कि प्यारे नबी ﷺ मग़रिब की नमाज़ पढ़ने से पहले ताज़ा खजूरों से इफ़्तार फ़रमाते थे, अगर ताज़ा न होतीं तो सूखी खजूरों से, वरना चंद चुल्लू पानी पीकर नमाज़ अदा फ़रमाते थे। (अबू दाऊद: 2356)
- हदीस 18 (रोज़ेदार को इफ़्तार कराने का सवाब): सुनन नसई में हज़रत ज़ैद बिन ख़ालिद से मरवी है कि हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया: “जिसने किसी रोज़ेदार का रोज़ा इफ़्तार कराया, उसे भी रोज़ेदार जितना ही सवाब मिलेगा बग़ैर इसके कि रोज़ेदार के सवाब में कोई कमी की जाए।” (नसई: 3224)
- हदीस 19 (हौज़-ए-कौसर की बशारत): हज़रत सलमान फ़ारसी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: “जिसने रमज़ान में किसी रोज़ेदार को पानी पिलाया, अल्लाह तआला उसे क़यामत के दिन मेरे हौज़ (हौज़-ए-कौसर) से ऐसा घूँट पिलाएगा कि जन्नत में दाख़िल होने तक उसे कभी प्यास नहीं लगेगी।” (अल-मुजमुल कबीर लित-तबरानी; बहारे शरीअत)
📚 हवाला: बहारे शरीअत, हिस्सा 5, सफ़ा 136-138; सहीह बुख़ारी व मुस्लिम; जामिअ तिर्मिज़ी व सुनन अबू दाऊद।
सहरी और इफ़्तार की मसनून दुआएँ
اللَّهُمَّ إِنِّي لَكَ صُمْتُ وَبِكَ آمَنْتُ وَعَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ وَعَلَىٰ رِزْقِكَ أَفْطَرْتُ
इफ़्तार की दुआ: “अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुमतु व बिका आमन्तु व अलयका तवक्कल्तु व अला रिज़्क़िका अफ़्तरतु।”
तर्जुमा: ऐ अल्लाह! मैंने तेरे ही लिए रोज़ा रखा, तुझ पर ईमान लाया, तुझ पर भरोसा किया और तेरे ही रिज़्क़ से इफ़्तार किया। (अबू दाऊद: 2358)
रोज़े के तमाम ज़रूरी मसाइल समझने के लिए हमारे विस्तृत लेख Roze Ke Jaruri Masail और Roza OR Mahe Ramzan ज़रूर पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: Sehri Aur Iftar Ki Hadees In Hindi के मुताबिक़ सहरी का आख़िरी वक़्त क्या है?
हदीस और शरीअत के मुताबिक़ सहरी का वक़्त सुब्ह सादिक़ (फ़ज्र की अज़ान का वक़्त शुरू होने) तक रहता है। जैसे ही सुब्ह सादिक़ हो जाए, सहरी का वक़्त ख़त्म हो जाता है। सुब्ह सादिक़ से 5-10 मिनट पहले ही एहतियातन खाना-पीना बंद कर देना चाहिए।
Q2: अगर किसी ने सहरी नहीं खाई तो क्या उसका रोज़ा हो जाएगा?
हाँ, सहरी खाना सुन्नत-ए-मुस्तहब्बा और बा-बरकत है, फ़र्ज़ नहीं। अगर किसी की आँख देर से खुली और सहरी का वक़्त निकल गया, तब भी अगर वह कुछ खाए-पिए बिना ज़वाल से पहले रोज़े की नीयत कर ले तो उसका फ़र्ज़ रोज़ा दुरुस्त हो जाएगा।
Q3: इफ़्तार में खजूर न मिले तो किससे इफ़्तार करना चाहिए?
हदीस-ए-पाक (सुनन तिर्मिज़ी: 658) के मुताबिक़ अगर ताज़ा या सूखी खजूर मयस्सर न हो तो सादा पाक पानी से रोज़ा इफ़्तार करना सुन्नत है।
Q4: क्या रोज़ेदार को इफ़्तार कराने वाले को भी पूरा सवाब मिलता है?
हाँ, सहीह हदीस के मुताबिक़ जो शख़्स किसी रोज़ेदार को एक खजूर, पानी के एक घूँट या शरबत से भी इफ़्तार कराता है, अल्लाह तआला उसे रोज़ेदार के बराबर मुकम्मल सवाब अता फ़रमाता है।
Leave a Comment