Skip to content
ALLAH Tala Ki Jaat Aur Uski Sifat Ke Baare Mein Akeede: अहले सुन्नत अक़ाइद
Islam

ALLAH Tala Ki Jaat Aur Uski Sifat Ke Baare Mein Akeede: अहले सुन्नत अक़ाइद

admin
admin
13 min read 38 views

ALLAH Tala Ki Jaat Aur Uski Sifat Ke Baare Mein Akeede (अल्लाह तआला की ज़ात और उसकी सिफ़तों के बारे में अक़ीदे) हर मुसलमान के ईमान की बुनियादी जड़ और असास हैं। जब तक किसी इंसान का अक़ीदा अल्लाह तआला की ज़ात-ए-अक़दस, उसकी तौहीद (वहदानियत) और उसकी अज़ली व अबदी सिफ़ात के बारे में दुरुस्त न हो, उसका कोई भी नेक अमल या इबादत बारगाहे इलाही में मक़बूल नहीं हो सकती।

अहले सुन्नत व जमाअत (हनफ़ी, मातुरीदी व अशअरी) का मुत्तफ़िक़ा अक़ीदा है कि अल्लाह तआला अपनी ज़ात और सिफ़ात में यकता व बेमिसाल है। न उसकी कोई मिसाल है और न ही कोई उसका शरीक है। बहारे शरीअत के मुसन्निफ़ सदरुश्शरीआ हज़रत अल्लामा मुफ़्ती अमजद अली आज़मी रहमतुल्लाहि अलैहि अपनी किताब के हिस्सा 1 (किताबुल अक़ाइद) में फ़रमाते हैं कि अल्लाह तआला की ज़ात व सिफ़ात के सहीह अक़ाइद का सीखना हर आक़िल व बालिग़ पर सबसे पहला फ़र्ज़ है।

Table of Contents

📌 तौहीद का बुनियादी क़ुरआनी ऐलान

قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ ۝ اللَّهُ الصَّمَدُ ۝ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ ۝ وَلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُوًا أَحَدٌ

तर्जुमा: “तुम फ़रमाओ: वह अल्लाह है जो एक है। अल्लाह बेनियाज़ है (सब उसके मोहताज हैं, वह किसी का मोहताज नहीं)। न उसकी कोई औलाद है और न वह किसी से पैदा हुआ। और न कोई उसके बराबर का है।”

📖 हवाला: सूरह अल-इख़्लास (112), आयात: 1-4

1. अल्लाह तआला की ज़ात-ए-अक़दस के बारे में अक़ाइद

अहले सुन्नत व जमाअत के मुताबिक़ अल्लाह तआला की ज़ात के मुतअल्लिक़ बुनियादी अक़ाइद दर्ज ज़ैल हैं:

  • वाजिबुल वुजूद: अल्लाह तआला ‘वाजिबुल वुजूद’ है, यानी उसका वजूद ज़रूरी है। उसका न होना अक़्लन नामुमकिन और मुहाल है।
  • क़दीम व अज़ली: अल्लाह तआला हमेशा से है (अज़ली) और हमेशा रहेगा (अबदी)। कायनात की हर चीज़ फ़ना होने वाली है, मगर अल्लाह की ज़ात हमेशा बाक़ी रहने वाली है।
  • ग़नी व बेनियाज़: अल्लाह तआला अपनी ज़ात और सिफ़ात में तमाम जहानों से बेनियाज़ है। उसे अपने वजूद, बक़ा या किसी काम के लिए किसी मख़लूक़, ज़मान, मकान या अस्बाब की कोई ज़रूरत नहीं।
  • जिस्म, जिहत और मकान से पाक: अल्लाह तआला जिस्म, शक्ल-ओ-सूरत, रंग-रूप, दायें-बायें, ऊपर-नीचे और किसी ख़ास जगह (मकान) में महदूद होने से पाक व मुनज़्ज़ह है। जैसा कि इमाम आज़म अबू हनीफ़ा रहमतुल्लाहि अलैहि अल-फ़िक़्हुल अकबर में फ़रमाते हैं: “अल्लाह तआला मख़लूक़ात की मुशाबहत (समानता) से पाक है।”
  • ला शरीक: अल्लाह तआला वहदहू ला शरीक है। न उसकी ज़ात में कोई शरीक है, न उसकी सिफ़ात में और न ही उसके अफ़आल (कामों) व अहकाम में।

2. अल्लाह तआला की सिफ़ाते ज़ातिया व सुबूतिया

उलमा-ए-अक़ाइद ने अल्लाह तआला की सिफ़ात को दो बुनियादी हिस्सों में तक़सीम किया है:

A. सिफ़ाते सल्बिया (Negative/Exclusionary Attributes)

यह वह सिफ़ात हैं जो अल्लाह तआला की ज़ात से हर क़िस्म के ऐब, नुक़्स, ज़वाल और मोहताजी की नफ़ी करती हैं, जैसे: वजूद, क़िदमत (हमेशा से होना), बक़ा (हमेशा रहना), वहदानियत (एक होना) और क़ियामुहु बिनफ़्सिही (अपनी ज़ात से क़ाइम होना)।

B. सिफ़ाते सुबूतिया (Essential Attributes)

यह वह कामिला सिफ़ात हैं जो अल्लाह तआला के लिए साबित हैं और हमेशा से उसके लिए लाज़िम हैं। यह 8 बुनियादी सिफ़ात हैं:

  1. हयात (ज़िंदगी): अल्लाह तआला ज़िंदा है, उसकी ज़िंदगी अज़ली व अबदी है और मौत का उस पर कभी गुज़र नहीं।
  2. इल्म (Knowledge): अल्लाह तआला हर छोटी और बड़ी, ज़ाहिर और पोशीदा चीज़ का मुकम्मल इल्म रखता है। दिलों के ख़यालात, गुज़रे हुए ज़माने और क़ियामत तक आने वाले तमाम वाक़िआत उसके इल्म में हैं। उसका इल्म ज़ाती है और ग़ैर-महदूद है।
  3. क़ुदरत (Power): अल्लाह तआला हर मुमकिन चीज़ पर क़ादिर-ए-मुतलक़ है। कोई काम उसकी क़ुदरत से बाहर नहीं।
  4. इरादा (Will): कायनात में जो कुछ होता है वह अल्लाह की मशिय्यत और इरादे से होता है। वह जो चाहता है करता है।
  5. समअ (सुनना): अल्लाह तआला हर आवाज़ को सुनता है, चाहे वह दिल की आहट हो या ज़मीन के नीचे रेंगने वाली चींटी की हरकत। उसका सुनना कानों का मोहताज नहीं।
  6. बसर (देखना): अल्लाह तआला हर चीज़ को देखता है, चाहे वह अँधेरी रात में काले पत्थर पर चलने वाली चींटी ही क्यों न हो। उसका देखना आँखों या रौशनी का मोहताज नहीं।
  7. कलाम (बोलना): अल्लाह तआला मुतकल्लिम है (कलाम फ़रमाता है)। उसका कलाम क़दीम है और ज़बान, आवाज़ या हुरूफ़ का मोहताज नहीं। क़ुरआन मजीद अल्लाह का कलाम है।
  8. तकवीन (पैदा करना व पालना): तमाम जहानों को अदम (नाबूदी) से वजूद में लाना, रोज़ी देना, ज़िंदा करना और मौत देना सब उसी की सिफ़ते तकवीन के ताबे हैं।
सिफ़त का नाम शरई मफ़हूम क़ुरआनी हवाला अहले सुन्नत का अक़ीदा
अल-हयात (हयात) हक़ीक़ी ज़िंदगी जो कभी ख़त्म न हो اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ अल्लाह की ज़िंदगी ज़ाती व अज़ली है
अल-इल्म (इल्म) तमाम कायनात का मुकम्मल इल्म إِنَّ اللَّهَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمٌ इल्मे ज़ाती सिर्फ़ अल्लाह का है
अल-क़ुदरत (क़ुदरत) हर मुमकिन चीज़ पर पूरा इख़्तियार وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ कोई चीज़ उसके क़ाबू से बाहर नहीं
अल-कलाम (कलाम) कलाम फ़रमाना बिला आवाज़ व हर्फ़ وَكَلَّمَ اللَّهُ مُوسَى تَكْلِيمًا क़ुरआन मजीद अल्लाह का क़दीम कलाम है

3. बातिल और गुमराह फ़िरक़ों के अक़ाइद का रद्द

इमाम अहमद रज़ा ख़ान फ़ाज़िले बरेलवी रहमतुल्लाहि अलैहि और सदरुश्शरीआ मुफ़्ती अमजद अली आज़मी रहमतुल्लाहि अलैहि ने गुमराह फ़िरक़ों के अक़ाइद का क़ुरआन-ओ-हदीस की रोशनी में मुकम्मल रद्द फ़रमाया है:

  • मुजस्सिमा व मुशब्बिहा का रद्द: जो लोग अल्लाह तआला के लिए इंसानों जैसा जिस्म, हाथ-पाँव, चेहरा या अर्श पर बैठना साबित करते हैं, वे सरासर गुमराह हैं। अहले सुन्नत का अक़ीदा है: “لَيْسَ كَمِثْلِهِ شَيْءٌ” (उसकी जैसी कोई चीज़ नहीं – सूरह शूरा: 11)।
  • मुअत्तिला व जहामिया का रद्द: जो लोग अल्लाह की सिफ़ात का ही इन्कार कर देते हैं, वे भी अहले सुन्नत के रास्ते से भटके हुए हैं। अल्लाह की सिफ़ात हक़ीक़त में साबित हैं मगर मख़लूक़ जैसी नहीं।
  • शिर्क का रद्द: मख़लूक़ में से किसी को अल्लाह के बराबर इल्म, क़ुदरत या इबादत का मुस्तहिक़ समझना शिर्क है। अलबत्ता अल्लाह तआला के अता करने से अंबिया और औलिया को मोअजिज़ात और करामात मिलना शिर्क नहीं बल्कि कु़दरते इलाही का इज़हार है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: ALLAH Tala Ki Jaat Aur Uski Sifat Ke Baare Mein Akeede के मुताबिक़ क्या अल्लाह का कोई जिस्म या मकान है?

नहीं, अहले सुन्नत व जमाअत का अक़ीदा है कि अल्लाह तआला जिस्म, शक्ल, रंग, हड्डियों और किसी ख़ास मकान (दिशा या जगह) में होने से पाक है। अर्श, फ़र्श, आसमान और ज़मीन सब उसकी मख़लूक़ हैं, और अल्लाह तआला मख़लूक़ की पैदाइश से पहले भी था और अब भी वैसा ही बेनियाज़ है।

Q2: ‘क़दीम’ और ‘हादिस’ में क्या फ़र्क़ है?

‘क़दीम’ उस ज़ात को कहते हैं जिसकी कोई इब्तिदा (शुरुआत) न हो, और यह सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह तआला और उसकी सिफ़ात हैं। ‘हादिस’ उस चीज़ को कहते हैं जो पहले मौजूद न थी फिर वजूद में आई, और अल्लाह के सिवा कायनात की हर चीज़ हादिस (मख़लूक़) है।

Q3: क्या अल्लाह तआला झूठ बोल सकता है या ज़ुल्म कर सकता है?

हरगिज़ नहीं। झूठ, ज़ुल्म, जिहल (अज्ञानता) और हर क़िस्म का नुक़्स अल्लाह तआला की शान के बिल्कुल ख़िलाफ़ और मुहाल (असम्भव) है। जो लोग इसे अल्लाह की क़ुदरत में मानते हैं वे गुमराह हैं; अल्लाह तआला तमाम ऐबों से पाक और मुनज़्ज़ह है।

Q4: क्या क़ियामत के दिन मोमिनीन को दीदार-ए-इलाही नसीब होगा?

हाँ, अहले सुन्नत व जमाअत का पुख़्ता अक़ीदा है कि जन्नत में मोमिनीन को अपनी आँखों से अल्लाह तआला का दीदार नसीब होगा। यह दीदार बिला कैफ़, बिला जिहत और बिला मिसाल होगा, जिसकी कैफ़ियत कोई इंसान बयान नहीं कर सकता।

Q5: अल्लाह तआला के सिफ़ाते ज़ातिया और अफ़आल में क्या फ़र्क़ है?

सिफ़ाते ज़ातिया (जैसे हयात, इल्म, क़ुदरत) हमेशा से अल्लाह की ज़ात के साथ क़ाइम हैं और कभी जुदा नहीं हो सकतीं। जबकि अफ़आल (जैसे ख़लक़ करना, रिज़्क़ देना, मारना) उसकी क़ुदरत व मशिय्यत के इज़हार हैं जब वह चाहे अंजाम देता है।


📖 मुस्तनद मराजिअ व मआख़िज़ (References):

  • क़ुरआन मजीद: सूरह अल-इख़्लास (112), सूरह अश-शूरा आयत 11, आयतुल कुर्सी (सूरह अल-बक़रह 255)
  • अल-फ़िक़्हुल अकबर: इमाम आज़म अबू हनीफ़ा नोअमान बिन साबित रहमतुल्लाहि अलैहि
  • शरह अल-अक़ाइद अन-नफ़्सिय्या: अल्लामा सादुद्दीन तफ़्तात़ानी रहमतुल्लाहि अलैहि
  • बहारे शरीअत: हिस्सा 1, इस्लामी अक़ाइद का बयान, सफ़ा 1-45 (मक्तबतुल मदीना, कराची)
  • फ़तावा रज़विय्या: जिल्द 29, किताबुल अक़ाइद (इमाम अहमद रज़ा ख़ान रहमतुल्लाहि अलैहि)

How useful was this post?

Click on a star to rate it!

5.0 out of 5 · 1 vote

No comments yet

Be the first to share your thoughts.

Leave a Comment

1-Click Google Verification to post comment:
To prevent spam, comments require a verified Google account (no password needed, only name & email).