अल्लाह के 99 नाम (अस्माउल हुस्ना – Asma-ul-Husna) अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के वे मुक़द्दस, मुबारक और अज़ीम तरीन सिफ़ाती व ज़ाती नाम हैं जिनके ज़िक्र और विर्द से दिलों को रूहानी सुकून हासिल होता है, मुश्किलात आसान होती हैं और जन्नत की बशारत मिलती है। क़ुरआन करीम और अहादीस-ए-मुबारका में अल्लाह तआला को इन हसीन नामों के साथ पुकारने का हुक्म फ़रमाया गया है। इस मुकम्मल गाइड में अल्लाह के सभी 99 नाम अरबी मतन, आसान हिंदी उच्चारण, सरल अर्थ (मायने) और उनकी रूहानी फ़ज़ीलत के साथ विस्तार से दिए जा रहे हैं।
Table of Contents
- 1. क़ुरआन करीम का हुक्म: अल्लाह को उसके अच्छे नामों से पुकारो
- 2. अस्माउल हुस्ना याद करने पर जन्नत की बशारत (सहीह बुख़ारी हदीस)
- 3. अल्लाह के 99 नाम हिंदी में मायने सहित (मुकम्मल फेहरिस्त)
- 4. अस्माउल हुस्ना के विर्द और दुआ माँगने के आदाब
- 5. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
- 5.1 1. क्या सिर्फ़ अल्लाह के नाम याद कर लेने से जन्नत मिल जाएगी?
- 5.2 2. क्या अल्लाह के सिफ़ाती नामों के साथ ‘अब्द’ लगाना ज़रूरी है?
- 5.3 3. इस्मे आज़म (Ism-e-Azam) कौन सा नाम है?
क़ुरआन करीम का हुक्म: अल्लाह को उसके अच्छे नामों से पुकारो
अल्लाह तआला ने सूरह अल-अअराफ़ में इरशाद फ़रमाया:
وَلِلَّهِ الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَىٰ فَادْعُوهُ بِهَا ۖ وَذَرُوا الَّذِينَ يُلْحِدُونَ فِي أَسْمَائِهِ
तर्जुमा (कंज़ुल ईमान): “और अल्लाह ही के लिए अच्छे-अच्छे नाम हैं, तो उसे उन्हीं नामों से पुकारो; और उन लोगों को छोड़ दो जो उसके नामों में कज-रवी (टेढ़ापन) करते हैं।”
📖 हवाला: सूरह अल-अअराफ़ (7), आयत: 180
अस्माउल हुस्ना याद करने पर जन्नत की बशारत (सहीह बुख़ारी हदीस)
हज़रत अबू हुरैरा رضي الله عنه से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया:
إِنَّ لِلَّهِ تِسْعَةً وَتِسْعِينَ اسْمًا، مِائَةً إِلا وَاحِدًا، مَنْ أَحْصَاهَا دَخَلَ الْجَنَّةَ
तर्जुमा: “बेशक अल्लाह तआला के निन्यानवे (99) नाम हैं—यानी एक कम सौ। जिसने इन्हें याद कर लिया (और इनका हक़ पहचान कर इन पर अमल किया), वह जन्नत में दाख़िल होगा।”
📚 हवाला: सहीह बुख़ारी, किताबुद-दअवात, हदीस: 2736; सहीह मुस्लिम, किताबुज़-ज़िक्र, हदीस: 2677
अल्लाह के 99 नाम हिंदी में मायने सहित (मुकम्मल फेहरिस्त)
यहाँ सभी 99 नाम क्रमबद्ध, अरबी, हिंदी उच्चारण और आसान हिंदी अर्थ के साथ पेश हैं:
| क्र. | अरबी नाम | हिंदी नाम | आसान हिंदी मायने (अर्थ) |
|---|---|---|---|
| 1 | الرَّحْمَنُ | अर-रहमान | बड़ा मेहरबान, सब पर रहम करने वाला |
| 2 | الرَّحِيمُ | अर-रहीम | निहायत रहम फ़रमाने वाला |
| 3 | الْمَلِكُ | अल-मलिक | हक़ीक़ी बादशाह, पूरी कायनात का मालिक |
| 4 | الْقُدُّوسُ | अल-क़ुद्दूस | हर ऐब और नुक़्स से बिल्कुल पाक |
| 5 | السَّلَامُ | अस-सलाम | सलामती देने वाला, आफ़त से बचाने वाला |
| 6 | الْمُؤْمِنُ | अल-मोमिन | अमन-ओ-अमान और पनाह देने वाला |
| 7 | الْمُهَيْمِنُ | अल-मुहैमिन | सबकी पूरी हिफ़ाज़त व निगरानी करने वाला |
| 8 | الْعَزِيزُ | अल-अज़ीज़ | ज़बरदस्त, सब पर ग़ालिब रहने वाला |
| 9 | الْجَبَّارُ | अल-जब्बार | टूटे दिलों को जोड़ने वाला, ज़बरदस्त हुक्म वाला |
| 10 | الْمُتَكَبِّرُ | अल-मुतकब्बिर | बड़ाई और अज़्मत का हक़ीक़ी हक़दार |
| 11 | الْخَالِقُ | अल-ख़ालिक़ | पैदा करने वाला, नई चीज़ वजूद में लाने वाला |
| 12 | الْبَارِئُ | अल-बारी | ठीक-ठाक और दुरुस्त बनाने वाला |
| 13 | الْمُصَوِّرُ | अल-मुसव्विर | शक्ल-ओ-सूरत अता फ़रमाने वाला |
| 14 | الْغَفَّارُ | अल-ग़फ़्फ़ार | गुनाहों को बार-बार बहुत ज़्यादा बख़्शने वाला |
| 15 | الْقَهَّارُ | अल-क़ह्हार | सब पर पूरी तरह क़ुदरत रखने वाला |
| 16 | الْوَهَّابُ | अल-वह्हाब | बग़ैर मांगे बहुत ज़्यादा अता करने वाला |
| 17 | الرَّزَّاقُ | अर-रज़्ज़ाक़ | सबको रिज़्क़ और रोज़ी देने वाला |
| 18 | الْفَتَّاحُ | अल-फ़त्ताह | मुश्किलें और रहमत के दरवाज़े खोलने वाला |
| 19 | الْعَلِيمُ | अल-अलीम | सब कुछ जानने वाला, इल्म वाला |
| 20 | الْقَابِضُ | अल-क़ाबिज़ | रिज़्क़ को तंग करने वाला (हिकमत के तहत) |
| 21 | الْبَاسِطُ | अल-बासित | रिज़्क़ और दिल को कुशादा करने वाला |
| 22 | الْخَافِضُ | अल-ख़ाफ़िज़ | सरकशों और जालिमों को पस्त करने वाला |
| 23 | الرَّافِعُ | अर-राफ़ेअ | मोमिनों के दर्जे बुलंद फ़रमाने वाला |
| 24 | الْمُعِزُّ | अल-मुइज़्ज़ | जिसको चाहे सच्ची इज़्ज़त अता करने वाला |
| 25 | الْمُذِلُّ | अल-मुज़िल्ल | जिसको चाहे ज़लील व रुस्वा करने वाला |
| 26 | السَّمِيعُ | अस-समीअ | हर आवाज़ और फुसफुसाहट को सुनने वाला |
| 27 | الْبَصِيرُ | अल-बसीर | अंधेरी रात में काली चींटी को भी देखने वाला |
| 28 | الْحَكَمُ | अल-हकम | हक़ीक़ी मुंसिफ़ और फ़ैसला करने वाला |
| 29 | الْعَدْلُ | अल-अद्ल | इंसाफ़ करने वाला, सरापा अदल |
| 30 | اللَّطِيفُ | अल-लतीफ़ | बारीकबीं और पोशीदा मेहरबानियाँ करने वाला |
| 31 | الْخَبِيرُ | अल-ख़बीर | हर बात की पूरी बातिनी ख़बर रखने वाला |
| 32 | الْحَلِيمُ | अल-हलीम | बुर्दबार, गुनाहों पर फ़ौरन अज़ाब न देने वाला |
| 33 | الْعَظِيمُ | अल-अज़ीम | अज़ीम शान वाला, बे-इंतिहा बुज़ुर्ग |
| 34 | الْغَفُورُ | अल-ग़फ़ूर | गुनाहों को छुपाने और बख़्शने वाला |
| 35 | الشَّكُورُ | अश-शकूर | थोड़े अमल पर बहुत बड़ा अज्र देने वाला |
| 36 | الْعَلِيُّ | अल-अली | सब पर आलीशान और बुलंद व बाला |
| 37 | الْكَبِيرُ | अल-कबीर | सबसे बड़ा, जिसकी बड़ाई की कोई हद नहीं |
| 38 | الْحَفِيظُ | अल-हफ़ीज़ | सबकी मुकम्मल हिफ़ाज़त करने वाला |
| 39 | الْمُقِيتُ | अल-मुक़ीत | सबको खुराक और क़ूवत देने वाला |
| 40 | الْحَسِيبُ | अल-हसीब | सबका हिसाब लेने वाला और काफ़ी होने वाला |
| 41 | الْجَلِيلُ | अल-जलील | बुलंद मर्तबे और जलाल वाला |
| 42 | الْكَرِيمُ | अल-करीम | बे-इंतिहा करम और सख़ावत फ़रमाने वाला |
| 43 | الرَّقِيبُ | अर-रक़ीब | हर लम्हे की पूरी निगरानी रखने वाला |
| 44 | الْمُجِيبُ | अल-मुजीब | दुआओं और पुकारों को क़ुबूल करने वाला |
| 45 | الْوَاسِعُ | अल-वासिअ | कुशादगी वाला, जिसकी रहमत हर चीज़ पर है |
| 46 | الْحَكِيمُ | अल-हकीम | हिकमत वाला, जिसका कोई काम बे-मक़सद नहीं |
| 47 | الْوَدُودُ | अल-वदूद | अपने बंदों से बेपनाह प्यार करने वाला |
| 48 | الْمَجِيدُ | अल-मजीद | बुज़ुर्गी और आला तारीफ़ वाला |
| 49 | الْبَاعِثُ | अल-बाएस | क़यामत के दिन मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करने वाला |
| 50 | الشَّهِيدُ | अश-शहीद | हर जगह हाज़िर-ओ-नाज़िर, गवाह |
| 51 | الْحَقُّ | अल-हक़ | हक़ीक़ी, सच्चा और सदा रहने वाला |
| 52 | الْوَكِيلُ | अल-वकील | काम बनाने वाला, बेहतरीन कारसाज़ |
| 53 | الْقَوِيُّ | अल-क़वी | ताक़तवर, अज़ीम क़ुव्वत वाला |
| 54 | الْمَتِينُ | अल-मतीन | मज़बूत, जिसे कभी कमज़ोरी नहीं आती |
| 55 | الْوَلِيُّ | अल-वली | मोमिनों का सच्चा दोस्त और मददगार |
| 56 | الْحَمِيدُ | अल-हमीद | हर वक़्त हम्द और तारीफ़ के लायक़ |
| 57 | الْمُحْصِي | अल-मुहसी | सब कुछ गिनने और शुमार रखने वाला |
| 58 | الْمُبْدِئُ | अल-मुब्दी | पहली बार कायनात को पैदा करने वाला |
| 59 | الْمُعِيدُ | अल-मुईद | मौत के बाद दोबारा पैदा करने वाला |
| 60 | الْمُحْيِي | अल-मुहयी | ज़िंदगी देने वाला, जान बख़्शने वाला |
| 61 | الْمُمِيتُ | अल-मुमीत | मौत देने वाला |
| 62 | الْحَيُّ | अल-हय्य | हमेशा ज़िंदा रहने वाला, कभी फ़ना न होने वाला |
| 63 | الْقَيُّومُ | अल-क़य्यूम | सबको क़ायम रखने वाला, बे-नियाज़ |
| 64 | الْوَاجِدُ | अल-वाजिद | हर चीज़ को पाने वाला, बे-परवाह |
| 65 | الْمَاجِدُ | अल-माजिद | बड़ी इज़्ज़त और शराफ़त वाला |
| 66 | الْوَاحِدُ | अल-वाहिद | अकेला, जिसका कोई शरीक नहीं |
| 67 | الْأَحَدُ | अल-अहद | यकता, अपनी ज़ात-ओ-सिफ़ात में अकेला |
| 68 | الصَّمَدُ | अस-समद | बे-नियाज़, जिसकी सब मोहताज हैं और वो किसी का नहीं |
| 69 | الْقَادِرُ | अल-क़ादिर | हर काम पर क़ुदरत रखने वाला |
| 70 | الْمُقْتَدِرُ | अल-मुक़्तदिर | ज़बरदस्त क़ुदरत वाला |
| 71 | الْمُقَدِّمُ | अल-मुक़द्दिम | जिसको चाहे आगे बढ़ाने वाला |
| 72 | الْمُؤَخِّرُ | अल-मुअख़्ख़िर | जिसको चाहे पीछे करने वाला |
| 73 | الْأَوَّلُ | अल-अव्वल | सबसे पहला, जिसकी कोई इब्तिदा नहीं |
| 74 | الْآخِرُ | अल-आख़िर | सबके बाद बाक़ी रहने वाला, जिसकी कोई इंतिहा नहीं |
| 75 | الظَّاهِرُ | अज़-ज़ाहिर | ज़ाहिर, अपनी निशानियों से अयां |
| 76 | الْبَاطِنُ | अल-बातिन | निगाहों से पोशीदा |
| 77 | الْوَالِي | अल-वाली | सबका मालिक और हाकिम |
| 78 | الْمُتَعَالِي | अल-मुताआली | बहुत आलीशान और बेमिसाल बुलंदी वाला |
| 79 | الْبَرُّ | अल-बर्र | अहसान करने वाला, बड़ा नेकी फ़रमाने वाला |
| 80 | التَّوَّابُ | अत-तव्वाब | तौबा को बहुत ज़्यादा क़ुबूल करने वाला |
| 81 | الْمُنْتَقِمُ | अल-मुंतक़िम | जालिमों और सरकशों से बदला लेने वाला |
| 82 | العَفُوُّ | अल-अफ़ुव्व | गुनाहों को बिल्कुल मिटा देने वाला |
| 83 | الرَّؤُوفُ | अर-रऊफ़ | निहायत शफ़क़त और रहम करने वाला |
| 84 | مَالِكُ الْمُلْكِ | मालिकुल मुल्क | सारे जहान की हुकूमत का असल मालिक |
| 85 | ذُو الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ | ज़ुल जलाले वल इकराम | जलाल, अज़्मत और अज़ीम इनआम वाला |
| 86 | الْمُقْسِطُ | अल-मुक़्सित | इंसाफ़ क़ायम करने वाला |
| 87 | الْجَامِعُ | अल-जामेअ | क़यामत के दिन सब मख़लूक़ को इकट्ठा करने वाला |
| 88 | الْغَنِيُّ | अल-ग़नी | ख़ुद बे-नियाज़ और दौलतमंद, किसी का मोहताज नहीं |
| 89 | الْمُغْنِي | अल-मुग़्नी | जिसको चाहे ग़नी और बे-नियाज़ करने वाला |
| 90 | الْمَانِعُ | अल-मानेअ | रोकने वाला (हिकमत के तहत) |
| 91 | الضَّارُّ | अज़-ज़ार्र | नुक़सान का मालिक (अपनी हिकमत से) |
| 92 | النَّافِعُ | अन-नाफ़ेअ | नफ़ा और फ़ायदा पहुँचाने वाला |
| 93 | النُّورُ | अन-नूर | आसमानों और ज़मीन को मुनव्वर करने वाला नूर |
| 94 | الْهَادِي | अल-हादी | सीधे रास्ते की हिदायत देने वाला |
| 95 | الْبَدِيعُ | अल-बदीअ | बग़ैर नमूने के अनोखी कायनात बनाने वाला |
| 96 | الْبَاقِي | अल-बाक़ी | हमेशा बाक़ी रहने वाला, फ़ना से पाक |
| 97 | الْوَارِثُ | अल-वारिस | सबके ख़त्म होने के बाद हक़ीक़ी वारिस |
| 98 | الرَّشِيدُ | अर-रशीद | सहीह रास्ता दिखाने वाला, नेकी की तौफ़ीक़ देने वाला |
| 99 | الصَّبُورُ | अस-सबूर | बे-इंतिहा सब्र वाला, जालिमों पर जल्दबाज़ी न करने वाला |
अस्माउल हुस्ना के विर्द और दुआ माँगने के आदाब
जब भी कोई मुश्किल या हाजत पेश आए, तो अल्लाह तआला को उसके मुनासिब नाम से पुकारें:
-
1
रिज़्क़ की बरकत के लिए: “या रज़्ज़ाक़ु” (يَا رَزَّاقُ) का विर्द सुबह की नमाज़ के बाद कसरत से करें।
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2
बीमारी से शिफ़ा के लिए: “या शफ़ीअ” या “या सलाम” 111 बार पढ़कर मरीज़ पर दम करें या पानी पर दम करके पिलाएं।
-
3
ग़म और परेशानी दूर करने के लिए: “या हय्यु या क़य्यूम बि-रहमतिका अस्तग़ीस” का विर्द करें, जो सुन्नत-ए-रसूल से साबित है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. क्या सिर्फ़ अल्लाह के नाम याद कर लेने से जन्नत मिल जाएगी?
हदीस शरीफ़ में ‘अहसाहा’ (أَحْصَاهَا) का मतलब उलमा-ए-किराम ने यह बयान फ़रमाया है कि नामों को याद करना, उनके मायनों को समझना और उन पर ईमान रखते हुए ज़िंदगी में अमल करना जन्नत में दाख़िले का सबब है।
2. क्या अल्लाह के सिफ़ाती नामों के साथ ‘अब्द’ लगाना ज़रूरी है?
हाँ, जब किसी इंसान का नाम अल्लाह के सिफ़ाती नाम पर रखा जाए, तो ‘अब्द’ (बंदा) लगाना शरअन ज़रूरी है—जैसे ‘अब्दुर रहमान’, ‘अब्दुर रज़्ज़ाक़’, ‘अब्दुल ख़ालिक़’। सिर्फ़ ‘रहमान’ या ‘ख़ालिक़’ कहना गुनाह है।
3. इस्मे आज़म (Ism-e-Azam) कौन सा नाम है?
हदीस शरीफ़ के मुताबिक़ “अल-हय्यु अल-क़य्यूम” (الْحَيُّ الْقَيُّومُ) या “अल्लाहु ला इलाहा इल्ला हुव” इस्मे आज़म है, जिसके वसीले से मांगी गई दुआ कभी रद्द नहीं होती।
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