चाँद निकला ईद का सुनते ही हर मोमिन का दिल ख़ुशी और रूहानी सुकून से झूम उठता है। रमज़ानुल मुबारक के मुक़द्दस महीने के तीस रोज़े, तरावीह और इबादतें पूरी करने के बाद अल्लाह तआला अपने रोज़ेदार बंदों को ईद-उल-फ़ित्र का अज़ीम तोहफ़ा और इनाम अता फ़रमाता है। जब मग़रिब के वक़्त आसमान के उफ़ुक़ पर ईद का बारीक नया चाँद (हिलाल) नज़र आता है, तो हर तरफ़ मुबारक़बाद की सदाएँ गूँजने लगती हैं। आइए इस मशहूर ईद कलाम के अशआर, नया चाँद देखने की मसनून दुआ और ईद के दिन की अज़ीम सुन्नतों को आसान हिंदी में समझें।
चाँद निकला ईद का (मकबूल ईद कलाम)
मोमिनो ख़ुशियाँ मनाओ, चाँद निकला ईद का
नूर की शम्एँ जलाओ, चाँद निकला ईद का
घर को अपने तुम सजाओ, चाँद निकला ईद का
रौशनी से झगमगाओ, चाँद निकला ईद का
दो मुबारकबाद सबको ईद की ऐ मोमिनो!
सर को सजदे में झुकाओ, चाँद निकला ईद का
रब ने रोज़ेदार को अब ईद का तोहफ़ा दिया
ईद के नग़्मे सुनाओ, चाँद निकला ईद का
गुल खिले हैं शादमानी के ज़मीं ओ अर्श पर
मुस्कुराओ, मुस्कुराओ, चाँद निकला ईद का
फ़ित्रा देकर ग़रीबों को गले से तुम लगाओ
उनकी भी खुशियाँ बढ़ाओ, चाँद निकला ईद का
नया चाँद देखने की मसनून दुआ (अरबी व हिंदी तर्जुमा)
हज़रत तल्हा बिन उबैदुल्लाह रदियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ जब नया चाँद देखते, तो यह दुआ पढ़ते थे:
हिंदी उच्चारण: “अल्लाहुम्मा अहिल्लहू अलैना बिल-अम्नि वल-ईमान, वस-सलामति वल-इस्लाम, रब्बी व रब्बुकल्लाह।”
तर्जुमा: “ऐ अल्लाह! इस नए चाँद को हम पर अम्न, ईमान, सलामती और इस्लाम के साथ तुलूअ फ़रमा। (ऐ चाँद!) मेरा और तेरा रब अल्लाह है।”
📚 हवाला: जामिअ अत-तिर्मिज़ी, किताबुत दावात, हदीस: 3451 (हदीस हसन)
ईद-उल-फ़ित्र के दिन की 7 अहम सुन्नतें
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सुबह सवेरे उठना और ग़ुस्ल करना:
ईद के दिन सुबह जल्दी बेदार होना, मिस्वाक करना और सुन्नत के मुताबिक़ ग़ुस्ल करना।
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पाकीज़ा व उम्दा लिबास और खुशबू:
अपने पास मौजूद कपड़ों में से सबसे अच्छा और साफ़ लिबास पहनना और खुशबू (इत्र) लगाना सुन्नत है।
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ईदगाह जाने से पहले कुछ मीठा खाना:
हुज़ूर अकरम ﷺ ईदगाह जाने से पहले ताक़ अदद (1, 3 या 5) खजूरें तनावुल फ़रमाते थे (सहीह बुख़ारी: 953)।
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सदक़ा-ए-फ़ित्र (फ़ित्रा) अदा करना:
ईद की नमाज़ से पहले ही ग़रीबों और मिस्कीनों को सदक़ा-ए-फ़ित्र अदा करना वाजिब है, ताकि वे भी ईद की खुशियों में शरीक हो सकें।
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ईदगाह पैदल जाना और रास्ते बदलना:
ईदगाह एक रास्ते से जाना और दूसरे रास्ते से वापस आना सुन्नत है (सहीह बुख़ारी: 986)।
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रास्ते में तकबीरात आहिस्ता पढ़ना:
ईद-उल-फ़ित्र के दिन ईदगाह जाते वक़्त रास्ते में आहिस्ता आवाज़ में तकबीर पढ़ना: “अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर व लिल्लाहिल हम्द।”
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मुसाफ़हा और मुबारक़बाद देना:
नमाज़ के बाद एक-दूसरे से गले मिलना, मुसाफ़हा करना और “तक़ब्बलल्लाहु मिन्ना व मिन्कुम” कहना सहाबा की सुन्नत है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. ईद का चाँद देखकर कौन सी दुआ पढ़नी चाहिए?
ईद का नया चाँद देखकर तिर्मिज़ी शरीफ़ की मसनून दुआ पढ़नी चाहिए: “अल्लाहुम्मा अहिल्लहू अलैना बिल-अम्नि वल-ईमान, वस-सलामति वल-इस्लाम, रब्बी व रब्बुकल्लाह।”
2. क्या ईद के दिन रोज़ा रखना जायज़ है?
नहीं। ईद-उल-फ़ित्र और ईद-उल-अज़हा के दिन रोज़ा रखना हराम है, क्योंकि यह दिन अल्लाह की तरफ़ से बंदों की मेहमानी और ख़ुशी का दिन है (सहीह बुख़ारी: 1995)।
3. सदक़ा-ए-फ़ित्र कब अदा करना चाहिए?
सदक़ा-ए-फ़ित्र ईद की नमाज़ के लिए निकलने से पहले अदा करना सबसे अफ़ज़ल है, ताकि ग़रीब लोग भी ईद का सामान खरीद सकें।
4. ईद की नमाज़ में कितनी ज़ायद तकबीरें होती हैं?
सुन्नी हनफ़ी तरीक़े के मुताबिक़ ईद की नमाज़ में कुल 6 ज़ायद तकबीरें (पहली रकअत में क़िरअत से पहले 3 और दूसरी रकअत में रुकूअ से पहले 3) होती हैं।
माहे रमज़ान के रोज़े खोलने की दुआ के लिए रोज़ा खोलने की दुआ हिंदी में और तरावीह के मसाइल के लिए तरावीह की नमाज़ का बयान पढ़ें।
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