Skip to content
या इलाही हर जगह तेरी अता का साथ हो: शजरा-ए-क़ादरिया रज़विया मुकम्मल कलाम, तर्जुमा व फ़ज़ीलत
Islam

या इलाही हर जगह तेरी अता का साथ हो: शजरा-ए-क़ादरिया रज़विया मुकम्मल कलाम, तर्जुमा व फ़ज़ीलत

admin
admin
7 min read 101 views

या इलाही हर जगह तेरी अता का साथ हो इमाम-ए-अहले सुन्नत आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान मुहद्दिस बरेलवी अलैहिर्रहमा का वह मुक़द्दस, रूहानी और मकबूल-ए-बारगाह कलाम है जो सिलसिला-ए-आलिया क़ादरिया रज़विया के शजरा शरीफ़ की जान है। इस कलाम के हर-हर शेर में मौत की सख़्ती (नज़अ़), क़ब्र की तन्हाई, हश्र की गर्मी और पुल सिरात की दहशत के वक़्त अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की रहमत और रसूलुल्लाह ‎ﷺ‎ व औलिया-ए-किराम की शफ़ाअत का वसीला माँगा गया है। अहले सुन्नत के घरों और महफ़िलों में इसे बड़ी अक़ीदत के साथ पढ़ा जाता है। आइए इस मुकम्मल कलाम, इसके रूहानी मफ़हूम और फ़ज़ीलत को आसान हिंदी में समझें।

Table of Contents

या इलाही हर जगह तेरी अता का साथ हो (मुकम्मल शजरा शरीफ़ कलाम)

या इलाही हर जगह तेरी अता का साथ हो
जब पड़े मुश्किल शहे मुश्किल कुशा का साथ हो

या इलाही भूल जाऊं नज़्अ़ की तकलीफ़ को
शादिये दीदारे हुस्ने मुस्तफ़ा का साथ हो

या इलाही गोरे तीरह् की जब आए सख़्त रात
उनके प्यारे मुँह की सुब्हे जाँ फ़ज़ा का साथ हो

या इलाही जब पड़े महशर में शोरे दारो गीर
अम्न देने वाले प्यारे पेशवा का साथ हो

या इलाही जब ज़बानें बाहर आएँ प्यास से
साहबे कौसर शहे जूदो अता का साथ हो

या इलाही सर्द मेहरी पर हो जब ख़ुर्शीदे हश्र
सैय्यदे बे साया के ज़िल्ले लेवा का साथ हो

या इलाही गर्मी-ए-महशर से जब भड़कें बदन
दामने महबूब की ठंडी हवा का साथ हो

या इलाही जब चले तारीक राहे पुल सिरात
आफ़ताबे हाशमी की रोशनी का साथ हो

या इलाही जब बहे आँखें गुनाह के ख़ौफ़ से
उम्मती कह कर छुड़ाने वाले का साथ हो

या इलाही जब रज़ा ख़्वाब-ए-गिराँ से सर उठाए
दौलते बेदार बख़्शे मुस्तफ़ा का साथ हो

कलाम के अहम अशआर का आसान हिंदी तर्जुमा व मफ़हूम

  1. शेर 1: मुश्किल कुशा का साथ:

    ऐ अल्लाह! ज़िंदगी, मौत और आख़िरत के हर मोड़ पर तेरी रहमत शामिल रहे, और जब कोई सख़्त मुश्किल आन पड़े, तो मुश्किलों को आसान करने वाले आक़ा हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ‎ﷺ‎ और हज़रत मौला अली मुश्किल कुशा की मदद का वसीला नसीब हो।

  2. शेर 2: नज़्अ़ (जान निकलने) के वक़्त हुज़ूर ﷺ का दीदार:

    ऐ रब्बुल आलमीन! जब मेरी रूह जिस्म से निकले और मौत की सख़्त तकलीफ़ हो, तो उस वक़्त मुझे अपने प्यारे महबूब ‎ﷺ‎ का हसीन दीदार अता फ़रमा, ताकि हुज़ूर के नूरानी चेहरे को देखकर मौत का दर्द भूल जाऊँ।

  3. शेर 3: क़ब्र की अंधेरी रात और सुब्हे जाँ फ़ज़ा:

    क़ब्र (गोरे तीरह्) की काली और तन्हा रात में जब मुनकर-नकीर सवाल करने आएँ, तो मुस्तफ़ा करीम ‎ﷺ‎ के नूरानी चेहरे की सुब्ह से मेरी क़ब्र रौशन हो जाए।

  4. शेर 5: हौज़े कौसर का जाम:

    क़यामत के दिन जब प्यास की शिद्दत से ज़बानें बाहर निकली होंगी, तब हौज़े कौसर के मालिक रसूलुल्लाह ‎ﷺ‎ अपने मुबारक हाथों से मीठा और ठंडा पानी पिलाएँ।

  5. शेर 8: पुल सिरात की तारीकी में नूर:

    पुल सिरात जो बाल से ज़्यादा बारीक और तलवार से ज़्यादा तेज़ है, उस अंधेरे रास्ते पर चलते वक़्त आफ़ताबे हाशमी (हुज़ूर ﷺ के नूर) की रोशनी हमारा रहनुमा बने।

शजरा-ए-क़ादरिया पढ़ने की बरकतें

सिलसिला-ए-क़ादरिया के बुज़ुर्ग फ़रमाते हैं कि जो शख़्स हर नमाज़ के बाद या रोज़ाना सुबह-शाम अपने पीर ओ मुर्शिद के शजरे का यह कलाम पढ़ता है, अल्लाह तआला उसके ईमान की हिफ़ाज़त फ़रमाता है, मौत की सख़्ती आसान करता है और क़ब्र के अज़ाब से महफ़ूज़ रखता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. ‘या इलाही हर जगह तेरी अता का साथ हो’ के मुसन्निफ़ (शायर) कौन हैं?

यह अज़ीम रूहानी कलाम आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान मुहद्दिस बरेलवी अलैहिर्रहमा का तहरीर फ़रमूदा है, जो आपके दीवान ‘हदायक़े बख़्शिश’ और शजरा-ए-क़ादरिया रज़विया में शामिल है।

2. ‘नज़्अ़’ का क्या मतलब होता है?

‘नज़्अ़’ का अरबी मतलब जान निकलने का वक़्त (सकरातुल मौत) होता है, जब रूह बदन से जुदा होती है।

3. क्या इस कलाम को रोज़ाना पढ़ा जा सकता है?

जी हाँ, इसे हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद, ख़ास तौर पर फ़ज्र या मग़रिब के बाद दुआ के तौर पर पढ़ना बहुत मुफ़ीद और ईमान की हिफ़ाज़त का सबब है।

4. शजरा शरीफ़ पढ़ने का असल मक़सद क्या है?

शजरा शरीफ़ पढ़ने का मक़सद अल्लाह की बारगाह में नबी-ए-करीम ‎ﷺ‎ और सिलसिला-ए-क़ादरिया के अज़ीम औलिया (जैसे हज़रत ग़ौस-ए-पाक) का वसीला पेश करके रहमत व मग़्फ़िरत तलब करना है।

हुज़ूर ग़ौस-ए-पाक के ईसाले सवाब के लिए ग्यारहवीं शरीफ़ क्या है और इसकी हक़ीक़त और मय्यत की हिफ़ाज़त के लिए क़ब्र पर अज़ान का सुबूत हिंदी में ज़रूर पढ़ें।

How useful was this post?

Click on a star to rate it!

0.0 out of 5 · 0 votes

No comments yet

Be the first to share your thoughts.

Leave a Comment

1-Click Google Verification to post comment:
To prevent spam, comments require a verified Google account (no password needed, only name & email).