सूरह फ़ातिहा हिंदी में पढ़ना और इसका तर्जुमा समझना हर नमाज़ी पर लाज़िम है, क्योंकि इसके बिना कोई भी नमाज़ मुकम्मल नहीं होती। सूरह फ़ातिहा क़ुरआन मजीद की सबसे पहली सूरह है। इसमें 1 रुकूअ और 7 आयतें हैं। यह मुक़द्दस सूरह मक्का शरीफ़ में नाज़िल हुई। हदीस शरीफ़ में इसे ‘उम्मुल क़ुरआन’ (क़ुरआन की माँ/जड़), ‘सूरह शिफ़ा’ और ‘सबा-अल-मसानी’ (बार-बार दोहराई जाने वाली सात आयतें) फ़रमाया गया है। नमाज़ की हर रकअत में इसकी तिलावत की जाती है। सुन्नी हनफ़ी शरीअत और कन्ज़ुल ईमान की रोशनी में यहाँ सूरह फ़ातिहा का अरबी मतन, हिंदी उच्चारण, तर्जुमा और फ़ज़ीलत पेश है।
📚 हवाला: सहीह मुस्लिम, किताबुस सलात, हदीस: 395
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सूरह फ़ातिहा का अरबी मतन (खूबसूरत क़ुरआनी ख़त)
بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ ۱
اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ رَبِّ الْعٰلَمِیْنَ ۙ۲ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ ۙ۳ مٰلِکِ یَوْمِ الدِّیْنِ ؕ۴ اِیَّاکَ نَعْبُدُ وَاِیَّاکَ نَسْتَعِیْنُ ؕ۵ اِهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِیْمَ ۙ۶ صِرَاطَ الَّذِیْنَ اَنْعَمْتَ عَلَیْهِمْ ەۙ غَیْرِ الْمَغْضُوْبِ عَلَیْهِمْ وَلَا الضَّآلِّیْنَ ۷
📖 हवाला: क़ुरआन मजीद, सूरह अल-फ़ातिहा (1), आयात: 1–7
सूरह फ़ातिहा का हिंदी उच्चारण (Transliteration)
- बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
- अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन
- अर-रहमानिर रहीम
- मालिकि यौमिद दीन
- इय्याका नाबुदु व इय्याका नस्तईन
- इहदिनस सिरातल मुस्तक़ीम
- सिरातल्लज़ीना अनअमता अलैहिम, गैरिल मग़ज़ूबि अलैहिम वलद-दाल्लीन। (आमीन)
सूरह फ़ातिहा का हिंदी तर्जुमा (कन्ज़ुल ईमान)
कन्ज़ुल ईमान तर्जुमा:
1. अल्लाह के नाम से शुरू जो बहुत मेहरबान रहमत वाला।
2. सब तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं जो सारे जहाँ का रब है।
3. बहुत मेहरबान रहमत वाला।
4. रोज़े जज़ा (क़यामत के दिन) का मालिक।
5. हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझ ही से मदद चाहते हैं।
6. हमको सीधा रास्ता चला।
7. उन लोगों का रास्ता जिन पर तूने इनाम फ़रमाया, न उन लोगों का रास्ता जिन पर तेरा ग़ज़ब हुआ और न बहके हुओं का।📖 हवाला: कन्ज़ुल ईमान, सूरह अल-फ़ातिहा
सूरह फ़ातिहा की अज़ीम फ़ज़ीलत
- सूरह शिफ़ा (बीमारियों का इलाज): हदीस शरीफ़ में आया है कि सूरह फ़ातिहा हर बीमारी और ज़हर का इलाज है। इसे पढ़कर मरीज़ पर दम करने से अल्लाह तआला शिफ़ा अता फ़रमाता है। (हवाला: सहीह बुख़ारी, हदीस: 5736)।
- नमाज़ का लाज़िमी रुक्न: फ़िक़्ह-ए-हनफ़ी में नमाज़ की हर रकअत में सूरह फ़ातिहा पढ़ना वाजिब है।
नमाज़ के मुकम्मल तरीक़े के लिए नमाज़ का सही तरीक़ा हिंदी में, और नमाज़ की नीयत का तरीक़ा ज़रूर पढ़ें।
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