सूरह वाक़िआ हिंदी में पढ़ना और हर रात उसकी तिलावत करना फ़क़्र व फ़ाक़े (ग़रीबी और तंगी) से महफ़ूज़ रहने का सबसे अज़ीम रूहानी वज़ीफ़ा है। सूरह अल-वाक़िआ क़ुरआन मजीद की 56वीं सूरह है, जिसमें 3 रुकूअ और 96 आयतें हैं। हदीस शरीफ़ में आया है कि जो शख़्स हर रात सूरह वाक़िआ पढ़ता है, उसे कभी फ़ाक़ा (आर्थिक तंगी) नहीं पहुँचेगा। इस सूरह में क़यामत के वाक़े होने, इंसानों के तीन गिरोहों (साबिक़ून, असहाबुल यमीन, असहाबुश शिमाल) और उनकी जज़ा व सज़ा का मुफ़स्सल बयान है। सुन्नी हनफ़ी शरीअत और कन्ज़ुल ईमान की रोशनी में यहाँ मुकम्मल गाइड दिया गया है।
📚 हवाला: शुअबुल ईमान लिल-बैहक़ी, हदीस: 2269; तफ़सीर इब्ने कसीर
सूरह अल-वाक़िआ का पहला रुकूअ (अरबी व हिंदी तर्जुमा)
بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ
اِذَا وَقَعَتِ الْوَاقِعَةُ ۙ۱ لَیْسَ لِوَقْعَتِهَا کَاذِبَةٌ ۘ۲ خَافِضَةٌ رَّافِعَةٌ ۙ۳ اِذَا رُجَّتِ الْاَرْضُ رَجًّا ۙ۴ وَّبُسَّتِ الْجِبَالُ بَسًّا ۙ۵ فَکَانَتْ هَبَآءً مُّنْبَثًّا ۙ۶
कन्ज़ुल ईमान हिंदी तर्जुमा:
“अल्लाह के नाम से शुरू जो बहुत मेहरबान रहम वाला। जब हो पड़ने वाली (क़यामत) हो पड़ेगी। उस वक़्त उसके होने में किसी को इंकार की गुंजाइश न होगी। किसी को पस्त करने वाली किसी को बुलंद करने वाली। जब ज़मीन थरथराएगी। और पहाड़ टूट कर रेज़ा-रेज़ा हो जाएंगे। तो गुबार होकर फैल जाएंगे।”
📖 हवाला: सूरह अल-वाक़िआ (56), आयात: 1–6 [कन्ज़ुल ईमान]
सूरह वाक़िआ पढ़ने का सबसे बेहतरीन वक़्त
हदीस के मुताबिक़ सूरह वाक़िआ पढ़ने का सबसे मुजर्रब वक़्त मग़रिब की नमाज़ के बाद या इशा की नमाज़ के बाद रात को सोने से पहले है। रोज़ाना पाबंदी से इसे पढ़ने वालों के घर में रिज़्क़ की तंगी कभी नहीं आती।
सूरह यासीन के लिए सूरह यासीन हिंदी में, और सूरह रहमान के लिए सूरह रहमान हिंदी में पढ़ें।
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