हज़रत सिद्दीक़ अकबर का ख़्वाब इस्लामी तारीख़ का वह अज़ीम और रूहानी वाकया है, जिसने इस्लाम की पहली सुब्ह की बुनियाद रखी। अमीरुल मोमिनीन हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने इस्लाम लाने से पहले तिजारत के दौरान शाम (सीरिया) के सफ़र में यह मुबारक ख़्वाब देखा था, जिसकी ताबीर ने उन्हें हुज़ूर सय्यिदुल मुर्सलीन रसूलुल्लाह ﷺ की बारगाह का अफ़ज़ल तरीन ग़ुलाम और पहला ख़लीफ़ा बना दिया।
हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) का हैरतअंगेज़ ख़्वाब
हज़रत सय्यिदुना अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) इस्लाम लाने से क़ब्ल मक्का मुकर्रमा के एक मशहूर, अमानतदार और बा-इज़्ज़त ताजिर थे। एक मर्तबा आप तिजारत के सिलसिले में मुल्क-ए-शाम तशरीफ़ ले गए।
वहाँ एक रात आपने ख़्वाब में देखा कि आसमान से सूरज और चाँद दोनों उतरकर आपकी गोद में आ पड़े हैं। हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने अपने दोनों मुबारक हाथों से सूरज और चाँद को पकड़कर अपने सीने से लगा लिया और उन्हें अपनी चादर के अंदर छुपा लिया।
📚 हवाला: जामिउल मोजिज़ात, सफ़ा 4; अर-रियाज़ुन नज़िरह फ़ी मनाक़िबुल अशरह, जिल्द 1; व तारीख़ुल खुलफ़ा लिस-सुयूती।
ईसाई राहिब (साधु) द्वारा ख़्वाब की ताबीर
जब सुबह हुई तो आप इस हैरतअंगेज़ ख़्वाब की ताबीर पूछने के लिए एक मशहूर ईसाई राहिब (बुहैरा / नस्तूरा) के पास तशरीफ़ ले गए। राहिब आसमानी किताबों (तौरात व इंजील) का गहरा आलिम था।
राहिब ने पूछा: “आप कौन हैं और कहाँ से आए हैं?”
आपने फ़रमाया: “मैं अबू बक्र हूँ और मक्का का रहने वाला हूँ।”
राहिब ने पूछा: “किस क़बीले से ताल्लुक़ है और पेशा क्या है?”
आपने फ़रमाया: “क़ुरैश से हूँ और तिजारत मेरा ज़रिया-ए-मआश है।”
यह सुनकर राहिब चौंक गया और संजीदगी से कहने लगा:
“ऐ अबू बक्र! ग़ौर से सुन लो! नबी-ए-आख़िरुज़्ज़माँ हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ ज़हूर फ़रमा चुके हैं। वह क़बीला-ए-बनी हाशिम से हैं और अल्लाह के आख़िरी रसूल हैं। अगर वह न होते तो ख़ुदाए तआला ज़मीन व आसमान को पैदा न फ़रमाता। ऐ अबू बक्र! तुम उनके दीन में दाख़िल होगे, हयात में उनके वज़ीर और उनके बाद उनके पहले ख़लीफ़ा बनोगे! यही तुम्हारे ख़्वाब की ताबीर है।”
मक्का वापसी और नबी ﷺ की बारगाह में हाज़िरी
राहिब से अपने ख़्वाब की ताबीर सुनकर हज़रत सिद्दीक़-ए-अकबर (रज़ियल्लाहु अन्हु) के दिल में इश्क़-ए-रसूल की शमअ रौशन हो गई। आप तिजारत पूरी करके फ़ौरन मक्का मुअज़्ज़मा वापस आए और सीधे महबूब-ए-ख़ुदा रसूलुल्लाह ﷺ की ख़िदमत में हाज़िर हुए।
हुज़ूर सय्यिदे आलम रसूलुल्लाह ﷺ ने देखते ही तबस्सुम फ़रमाया और इरशाद फ़रमाया: “अबू बक्र! तुम आ गए, लो अब जल्दी करो और दीने हक़ में दाख़िल हो जाओ।”
हज़रत सिद्दीक़-ए-अकबर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने अर्ज़ किया: “हुज़ूर! हर नबी का कोई मोजिज़ाह (चमत्कार) होता है, आप भी कोई मोजिज़ाह दिखाइए ताकि दिल को सुकून मिले।”
इस पर ग़ैबदाँ नबी रसूलुल्लाह ﷺ ने मुस्कुराते हुए इरशाद फ़रमाया:
“ऐ अबू बक्र! वह ख़्वाब जो तुम शाम के सफ़र में देखकर आए हो और उसकी ताबीर जो उस राहिब से सुनकर आए हो, क्या वह मेरा मोजिज़ाह नहीं है?”
यह सुनते ही हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) बे-साख़्ता रो पड़े और कलमा पढ़ते हुए अर्ज़ किया: “अशहदु अन ला इलाहा इल्लल्लाहु व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुह! या रसूलुल्लाह ﷺ, मैं गवाही देता हूँ कि आप बिला-शुबा अल्लाह के सच्चे रसूल हैं!”
वाकये से मिलने वाले सबक़ व अक़ाइद
- इल्म-ए-ग़ैब-ए-मुस्तफ़ा ﷺ: हुज़ूर नबी-ए-करीम रसूलुल्लाह ﷺ को हज़रत अबू बक्र के ख़्वाब और राहिब की गुफ़्तगू की पूरी ख़बर मक्का बैठे ही थी। आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ाँ फ़रमाते हैं: “और कोई ग़ैब क्या तुमसे निहाँ हो भला, जब न ख़ुदा ही छुपा तुम पे करोड़ों दुरूद!”
- मर्तबा-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर: तमाम उम्मत में अंबिया के बाद सबसे अफ़ज़ल मर्तबा हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) का है।
- ख़िलाफ़त-ए-राषिदा की बशारत: इस्लाम लाने से पहले ही अल्लाह तआला ने ख़्वाब के ज़रिए यह ज़ाहिर फ़रमा दिया था कि आप ही हुज़ूर के पहले ख़लीफ़ा-ए-बरहक़ होंगे।
हज़रत सिद्दीक़-ए-अकबर के फ़ज़ाइल का ख़ुलासा
| मर्तबा व लक़ब | फ़ज़ीलत | हवाला |
|---|---|---|
| सिद्दीक़ (सच्चा) | मेराज-ए-मुस्तफ़ा की बिला झिझक सबसे पहले तस्दीक़ की। | मुस्तदरक अलल-हाकिम |
| सानी-यस-नैन (यार-ए-ग़ार) | ग़ार-ए-सौर में हिजरत के वक़्त नबी ﷺ के तन्हा साथी। | सूरह अत-तौबा (9), आयत: 40 |
| अफ़ज़लुल बशर | अंबिया के बाद तमाम इंसानों में सबसे अफ़ज़ल हस्ती। | सहीह बुख़ारी, हदीस: 3656 |
अक़ीदा-ए-रिसालत और इस्लामी मालूमात के लिए हमारे मक़ाले Imaan Kya Hai और Namaz Ka Tarika भी पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: हज़रत सिद्दीक़ अकबर का ख़्वाब क्या था?
हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने शाम के सफ़र में ख़्वाब में देखा था कि आसमान से सूरज और चाँद उनकी गोद में आ गिरे हैं और उन्होंने दोनों को अपने सीने से लगाकर अपनी चादर में छुपा लिया है।
Q2: राहिब ने इस ख़्वाब की क्या ताबीर बताई थी?
राहिब ने बताया था कि नबी-ए-आख़िरुज़्ज़माँ हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ का ज़हूर हो चुका है। आप उनके दीन में दाख़िल होंगे, हयात में उनके वज़ीर रहेंगे और उनके पर्दा फ़रमाने के बाद पहले ख़लीफ़ा बनेंगे।
Q3: रसूलुल्लाह ﷺ ने हज़रत अबू बक्र को क्या मोजिज़ाह दिखाया?
हज़रत अबू बक्र के मोजिज़ाह तलब करने पर हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया कि वही ख़्वाब जो तुम शाम में देखकर आए हो और जिसकी ताबीर राहिब ने बताई है, मेरा मोजिज़ाह है। यह सुनकर आप फ़ौरन ईमान ले आए।
Q4: क्या हज़रत अबू बक्र मर्दों में सबसे पहले ईमान लाने वाले हैं?
हाँ, बालिग़ आज़ाद मर्दों में सबसे पहले नबी-ए-करीम ﷺ पर ईमान लाने की सआदत हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) को हासिल हुई।
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