# Barelvi.in » Quran,Hadees,Namaz,Roza,Naat,Islamic Hindi Quotes,Islamic Stories > Explore the essence of Islamic teachings on Barelvi.in. Learn about Quran, Hadees, Namaz, Roza, Zakat, Hajj, Naat, Islamic Hindi Quotes, Islamic Stories, and Naat with insights from the Barelvi perspective ## Posts - [54 Surah Al-Qamar](https://barelvi.in/54-surah-al-qamar/): 54 सूरए क़मर – 54 Surah Al Qamar सूरए क़मर मक्की है सिवाय आयत “सयुह़ज़मुल जमओ” के. - [55-Surah Ar-Rahmaan](https://barelvi.in/55-surah-ar-rahmaan/): 55 सूरए रहमान – 55 Surah AR Rahmaan सूरए रहमान मक्की है इसमें तीन रूकूअ, छिहत्तर या अठहत्तर आयतें, तीन सौ इक्यानवे कलिमे और एक हज़ार छ सौ छत्तीस अक्षर हैं. - [Shab E Meraj Ki Nawafil Namaz](https://barelvi.in/shab-e-meraj-ki-nawafil-namaz/): शबे मेराज की नवाफ़िल नमाज़ १२ रकात : (दो दो करके) तरकीबः हर रकात में अल्हम्द के बाद पाँच बार कुलहुवल्लाहु अहद, बारह रकात पढ़ने के बाद सौ बार कलमए तमजीद, सौ बर इस्तिगफार, सौ बार दुरुद शरीफ फजीलतः जो दुआ करे इन्शा अल्लाह कुबूल होगी। ६ रकात : (दो दो करके) तरकीबः हर रकात में अल्हम्द के बाद सात बार कुलहुवल्लाहु पढ़े 6 रकात पढ़ने के बाद पचास बार दुरूद शरीफ पढ़े, फ़ज़ीलत तमाम दीनी व दुनियवी हाजात पूरी होंगी और सत्तर हजार गुनाह माफ होते हैं। २ रकात : तरकीबः हर रकात में अल्हम्द के बाद सत्ताईस बार कुलहुवल्लाहु पढ़े और कायदे में अत्तहिय्यात के बाद सत्ताईस बार दुरूदे इब्राहीम पढ़े। सलाम के बाद इस का हदिया हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बारगाह में पेश करने की सआदत हासिल करे। २ रकात : तरकीबः पहली रकात में अल्हम्द के बाद एक बार सूरह अलम नशरह, दूसरी रकात में सूरह अल्हम्दो के बाद सूरह लिईलाफ़ि कुरेश पढ़ें। फ़ज़ीलत यह नमाज़ पढ़ने से औलिया के साथ नमाज़ पढ़ने का सवाब मिलता है १० रकात : (दो दो करके) तरकीबः हर रकात में अल्हम्द के बाद तीन बार सरह काफिरून, तीन बार कुलहुवल्लाह पढ़े। दस रकात के बाद एक बार कलमए तौहीद पढ़े। फिर यह दुआ पढ़े अल्लाहुम्मा सल्लि अला सय्यिदिना मुहम्मदिवं अला आलिहित्ताहिरीना वला हौल वला कुळ्वता इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यिल अजीम। फजीलतः अल्लाह तआला हर रकात के बदले हजार रकात का सवाब अता करेगा। 🎁 गुस्ल के फजाइल : हुजुर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इर्शाद फ़रमाया जो कोई रजब की पहली, १५ दी और २७ को गुस्ल करेगा तो वो गुनाहों से ऐसा पाक हो जाता है जैसे अभी पैदा हुआ हो. - [Shab E Barat Ki Nawafil Namaz](https://barelvi.in/shab-e-barat-ki-nawafil-namaz/) - [Shab E Qadr Ki Nawafil Namaz](https://barelvi.in/shab-e-qadr-ki-nawafil-namaz/): बाद नमाजे इशा, सात बार इन्ना अन्ज़़ल्नाहु पढ़े। फजीलत: हर मुसीबत से नजात मिले। हजार फरिश्ते अलैहिस्सलाम उस के लिए जन्नत की दुआ करते हैं। २ रकात: तरकीबः हर रकात में अल्हम्द के बाद एक बार इन्ना अन्ज़ल्नाहु तीन बार कुलहुवल्लाहु, फजीलत: शबे कद्र का सवाब हासिल होगा, एक शहर जन्नत में दिया जाएगा जो मशरक से मगरिब तक लंबा होगा। २ रकात : तरकीबः हर रकात में अल्हम्द के बाद सात बार इन्ना अन्ज़ल्नाहु सात बार कुलहुवल्लाहु सलाम के बाद इस्तिगफार और दुरूद शरीफ पढ़े। फजीलतः अल्लाह तआला इस नमाज़ के पढ़ने वाले को और इसके माँ बापको बख्श देगा । ४ स्कात : (एक सलाम से) तरकीबः हर रकात में अल्हम्द के बाद तीन बार इन्ना अन्ज़ल्नाहु सात बार कुलहुवल्लाह फजीलतः अल्लाह तआला मौत की सकरात आसान कर देगा कब्र का अज़ाब दूर कर देगा. - [01-Surah Al-Fathiha](https://barelvi.in/01-surah-al-fathiha/): अल्लाह के नाम सेशुरु जो बहुत मेहरबान रहमतवाला 1. सब खू़बियाँ अल्लाह को जो मालिक सारे जहान वालों का 2. बहुत मेहरबान रहमत वाला 3. - [56.Surah Al-Waqia](https://barelvi.in/56-surah-al-waqia/): 56 सूरए वाक़िआ – 56 Surah Al Waqia सूरए वाक़िआ मक्की है सिवाय आयत “अफ़-बिहाज़ल हदीसे” और आयत “सुल्लतुम मिनल अव्वलीना” के. - [57-Surah Al-Hadeed](https://barelvi.in/57-surah-al-hadeed/): 57 सूरए हदीद - 57 Surah Al Hadeed सूरए हदीद मक्की है या मदनी, इस में चार रूकू, उन्तीस आयतें, पांच सौ चवालीस कलिमे, दो हज़ार चार सौ छिहत्तर अक्षर हैं. - [Namaz Ki Niyat](https://barelvi.in/namaz-ki-niyat/): इशा की नमाज़ की नियत– मैं नीयत करता हूँ च्रार रकात नमाज़ फर्ज़ इशा, वास्ते अल्लाह के, रुख़ मेरा काबा. - [Namaz Ka Tarika](https://barelvi.in/namaz-ka-tarika/): ख़याल रहे की पाक होना और साफ होना दोनों अलग अलग चीज़े है। पाक होना शर्त है, साफ होना शर्त नहीं है। जैसे बदन, कपडा या जमीन नापाक चीजों से भरी हुवी ना हो. - [58-Surah Al-Mujadalah](https://barelvi.in/58-surah-al-mujadalah/): 58 सूरए मुजादलह - 58 Surah Al Mujadalah सूरए मुजादलह मदनी है, इसमें तीन रूकू, बाईस आयतें, चार सौ तिहत्तर कलिमे और एक हज़ार सात सौ बानवे अक्षर हैं. - [Audio Quran Mp3 - Urdu Translation: Kanzul Iman](https://barelvi.in/audio-quran-mp3/) - [59-Surah Al Hashra](https://barelvi.in/59-surah-al-hashra/): 59 सूरए हश्र - 59 Surah Al Hashra सूरए हश्र मदीने में उतरी, इसमें 24 आयतें, तीन रूकू हैं. - [60 Surah Al-Mumtahinah](https://barelvi.in/60-surah-al-mumtahinah/): 60 सूरए मुम्तहिनह - पहला रूकू 60 सूरए मुम्तहिनह – पहला रूकू 60|1|بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَتَّخِذُوا عَدُوِّي وَعَدُوَّكُمْ أَوْلِيَاءَ تُلْقُونَ إِلَيْهِم بِالْمَوَدَّةِ وَقَدْ كَفَرُوا بِمَا جَاءَكُم مِّنَ الْحَقِّ يُخْرِجُونَ الرَّسُولَ وَإِيَّاكُمْ ۙ أَن تُؤْمِنُوا بِاللَّهِ رَبِّكُمْ إِن كُنتُمْ خَرَجْتُمْ جِهَادًا فِي سَبِيلِي وَابْتِغَاءَ مَرْضَاتِي ۚ تُسِرُّونَ إِلَيْهِم بِالْمَوَدَّةِ وَأَنَا أَعْلَمُ بِمَا أَخْفَيْتُمْ وَمَا أَعْلَنتُمْ ۚ وَمَن يَفْعَلْهُ مِنكُمْ فَقَدْ ضَلَّ سَوَاءَ السَّبِيلِ 60|2|إِن يَثْقَفُوكُمْ يَكُونُوا لَكُمْ أَعْدَاءً وَيَبْسُطُوا إِلَيْكُمْ أَيْدِيَهُمْ وَأَلْسِنَتَهُم بِالسُّوءِ وَوَدُّوا لَوْ تَكْفُرُونَ 60|3|لَن تَنفَعَكُمْ أَرْحَامُكُمْ وَلَا أَوْلَادُكُمْ ۚ يَوْمَ الْقِيَامَةِ يَفْصِلُ بَيْنَكُمْ ۚ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ 60|4|قَدْ كَانَتْ لَكُمْ أُسْوَةٌ حَسَنَةٌ فِي إِبْرَاهِيمَ وَالَّذِينَ مَعَهُ إِذْ قَالُوا لِقَوْمِهِمْ إِنَّا بُرَآءُ مِنكُمْ وَمِمَّا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ كَفَرْنَا بِكُمْ وَبَدَا بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمُ الْعَدَاوَةُ وَالْبَغْضَاءُ أَبَدًا حَتَّىٰ تُؤْمِنُوا بِاللَّهِ وَحْدَهُ إِلَّا قَوْلَ إِبْرَاهِيمَ لِأَبِيهِ لَأَسْتَغْفِرَنَّ لَكَ وَمَا أَمْلِكُ لَكَ مِنَ اللَّهِ مِن شَيْءٍ ۖ رَّبَّنَا عَلَيْكَ تَوَكَّلْنَا وَإِلَيْكَ أَنَبْنَا وَإِلَيْكَ الْمَصِيرُ 60|5|رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلَّذِينَ كَفَرُوا وَاغْفِرْ لَنَا رَبَّنَا ۖ إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ 60|6|لَقَدْ كَانَ لَكُمْ فِيهِمْ أُسْوَةٌ حَسَنَةٌ لِّمَن كَانَ يَرْجُو اللَّهَ وَالْيَوْمَ الْآخِرَ ۚ وَمَن يَتَوَلَّ فَإِنَّ اللَّهَ هُوَ الْغَنِيُّ الْحَمِيدُ सूरए मुम्तहिनह मदीने में उतरी, इसमें 13 आयतें, दो रूकू हैं. - [Pyare Nabi ﷺ ki Pyari Seerat - प्यारे नबी ﷺ की प्यारी सीरत](https://barelvi.in/pyare-nabi-%ef%b7%ba-ki-pyari-seerat-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%ac%e0%a5%80-%ef%b7%ba-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0/): एक इसाई ने जब इस्लाम कबूल किया तो लोगों ने उससे पूछा इस्लाम की तुझे ऐसी कौन सी बात पसंद आई जो मुसल्मान बन गया वो इसाई कहता है कि मैंने पैग़ंबरे इस्लाम की एक ही सीरत पढ़ाऔर मुसलमान हो गया, मैंने एक वाक्या पढ़ा जिस वाक्या में लिखा हुआ था एक सहाबा رَضِيَ ٱللَّٰهُ عَنْهُ आप सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम की बारगाह में अर्ज करते हैं या रसूल अल्लाह मेरा बेटा 3 दिन से खो गया है और मिल नहीं रहा है उसकी मां भी बहुत परेशान है और मैं भी परेशान हूं . - [Kiraman Katibin Ka Bayan - किरामन कातेबीन का बयान](https://barelvi.in/kiraman-katibin-ka-bayan-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%af%e0%a4%be/) - [ALLAAH KE 99 Naam Hindi Me Mayne Ke Shath - अल्लाह  ﷻ 99 नाम](https://barelvi.in/allaah-ke-99-naam-hindi-me-mayne-ke-shath-%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b9-%ef%b7%bb-99-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae/): 1.अल्लाह तआला का इर्शाद है- "और अल्लाह ﷻ ही के लिए अच्छे नाम है, सो उनके ज़रिए उसको पुकारो" -(अल अअराफ़ 180) 2. - [Kya Aurat Fatiha Pad Sakti Hai - क्या औरत फातिहा नही पढ़ सकती](https://barelvi.in/kya-aurat-fatiha-pad-sakti-hai-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%9d/) - [तूफा़ने नूह علیہ السلام और एक बूढी औरत - Toofane Nooh علیہ السلام](https://barelvi.in/toofane-ne-nooh-aur-ek-boodhee-aurat/): हज़रत नूह अलैहिस्सलाम ने बहुक्मे इलाही जब कश्ती बनाना शुरु की तो एक मोमिन बुढिया ने हज़रत नूह अलैहिस्सलाम से पूछा कि आप यह कश्ती क्यों बना रहे हो...? - [हज़रत आदम अलैहिस्सलाम कौन हैं ? आपके बारे में पूरी जानकारी](https://barelvi.in/hazrat-adam-alaihissalam-kaun-hain/): सवाल :- हज़रत आदम अलैहिस्सलाम का नाम “आदम” क्यों हुआ ? - [निकाह मे होने वाली ज़ात बिरादरी की बन्दिश Hindi Me](https://barelvi.in/nikah-me-hone-vaalee-zaat-biraadaree-ki-bandish/): अकसर लोग निकाह के लिये अपने ही बिरदरी मे लड़का या लड़की को पसन्द करते हैं और जब तक अपनी बिरादरी मे कोई नही मिलता निकाह नही करते| जिसके सबब अकसर अकसर दूसरे बिरादरी के लड़के और लड़किया बेनिकाह काफ़ी उम्र तक बैठे रहते हैं और कई तो ताज़िन्दगी बे निकाह रह जाते हैं और इसकी ज़िन्दा मिसाल हमारे मआशरे मे मौजूद हैं | अल्लाह ﷻ कुरान मे फ़रमाता हैं- और उसने दो ज़ात बनाई एक मर्द और एक औरत ( सूरह कियामह सूरह नं 75 आयत नं 39 ) इस्लाम की ये खूबी हैं के इस्लाम मे इन्सान कि फ़ितरत के सबब हर मसले का हल रखा और किसी मसले के हल के लिये बस इन्सान को अल्लाह ﷻ और उसके रसूल के बताये एहकाम पर अमल करना हैं| बावजूद इसके लोग इस्लाम के बताये तरिको से फ़ायदा नही उठाते और नुकसान मे रहते हैं| अल्लाह ﷻ ने इन्सान की तख्लीक के लिये सिर्फ़ एक जोड़ा आदम علیہ السلام और बीवी हव्वा को बनाया और इनसे तमाम नस्ल इन्सानी की तख्लीक की अगर अल्लाह ﷻ ने ज़ात बिरादरी की बन्दीश को भी इन्सान के निकाह के शर्त के तौर पर लगाया होता तो आदम علیہ السلام और बीवी हव्वा के बाद दुनिया मे कोई इन्सान नही होता या अल्लाह ﷻ कई आदम علیہ السلام और हव्वा की तरह कई और जोड़े पैदा कर दुनिया मे एक सिस्टम बना देता के हर इन्सान अपनी ही पुरखो की नस्ल मे निकाह करे और कई और जोड़े आदम علیہ السلام और बीवी हव्वा की तरह पैदा करना अल्लाह ﷻ के लिये कोई मुश्किल काम नही| बावजूद इसके इन्सान इन तमाम बातो पर गौर फ़िक्र किये बिना ही इस अहम सुन्नत को अदा करने मे ताखिर करता हैं | अल्लाह ﷻ ने कुरान मे एक जगह और फ़रमाया- ऐ लोगो अल्लाह ﷻ से डरो जिसने तुम्हे एक जान से पैदा किया और उसी मे से उसके लिये जोड़ा पैदा किया और उन दोनो से बहुत से मर्द और औरत फ़ैला दिये ( सूरह निसा सूरह नं 4 आयत नं 1 ) कुरान की इस आयत से साबित हैं के अल्लाह ﷻ ने हर मर्द और औरत का जोड़ा बनी आदम की औलादो मे से ही रखा हैं लिहाज़ा हर इन्सान को जो ईमानवाला मर्द या औरत मिले उसे बिना ताखिर के निकाह कर ले| क्योकि किसी इन्सान को खुद से ये हासिल नही के ज़ात बिरादरी मे बट जाये बल्कि ज़ात बिरादरी मे बाटना भी अल्लाह ﷻ ही का काम हैं जैसा के कुरान से साबित हैं- अल्लाह ﷻ वही हैं जिसने इन्सान को पानी से पैदा किया| फ़िर उसे नस्ली और खान्दानी रिश्तो मे बाट दिया ( सूरह फ़ुरकान सूरह नं 25 आयत नं 54 ) लिहाज़ा जात बिरादरी की बन्दीश को निकाह जैसे नेक काम से जोड़ना सरासर गलत हैं क्योकि अल्लाह ﷻ ने नस्ल और खानदान सिर्फ़ इन्सान की पहचान बाकि रखने के लियेए किया न के निकाह के मौके पर अपने से दूसरे को नीचा या बड़ा खानदान तसव्वुर करना सरासर गलत हैं| बिरादरी का तसव्वुर सिर्फ़ इन्सान को बड़ा या छोटा साबित करता हैं जबकि ये अल्लाह ﷻ ही बेहतर जानता हैं कि उसके नज़दीक कौन बड़ा या छोटा हैं| बिरादरी से बाहर निकाह करने की सबसे बड़ी हुज्जत हज़रत अबदुर्ररहमान बिन औफ़ का निकाह हैं जो कुरैश खानदान से थे और उन्होने अंसार की लड़की से निकाह किया था और खुद अल्लाह ﷻ के रसूल सल्लललाहो अलेहे वसल्लम ने हज़रत सफ़िया से निकाह किया था जो कुरैश खानदान से न थी ! - [Makadi Ka Ghar - मकड़ी का घर - Spider house](https://barelvi.in/makadi-ka-ghar-%e0%a4%ae%e0%a4%95%e0%a5%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%98%e0%a4%b0-spider-house/) - [200 साल तक अल्लाह ﷻ की नाफ़रमानी की - एक मशहूर-नाफ़रमान](https://barelvi.in/200-saal-tak-allaah-%ef%b7%bb-ki-nafarmani-ki/): अल्लाह तबारक व् तआला ने दोबारा वहि फ़रमाई: “हाँ सच यही है की वो ऐसा ही शख्स था लेकिन,,,वो जब भी तौरात को तिलावत के लिए खोलता और उसकी नज़र इश्म-ए-गिरामी अहमद ए मुज्तबा मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो तआला अलैहे व् सल्लम पर पड़ती तो,,, वो उसे बोसा देता और उसे उठा कर आँखों से लगाता फिर आप सल्लल्लाहो तआला अलैहे वसल्लम पर दरूद-शरीफ़ भेजता था... - [Download Chor Fikr Duniya Ki MP3 Naat by Owais Raza Qadri](https://barelvi.in/download-chor-fikr-duniya-ki-mp3-naat-by-owais-raza-qadri/): Chor Fikr Duniya Ki is one of the best Naat Sharif by Owais Raza Qadri. 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The soft and strong voice of Owais Raza Qadri is loved by the fans. - [Aala Hazrat رضي الله عنه ki wiladat 10 shawwal](https://barelvi.in/aala-hazrat-%d8%b1%d8%b6%d9%8a-%d8%a7%d9%84%d9%84%d9%87-%d8%b9%d9%86%d9%87-ki-wiladat-10-shawwal/): 3 जून 2020 को शव्वाल की 10 तारीख़ है। आज का दिन आलमे इस्लाम के लिए बहुत ख़ास है। क्योंकि आज के दिन हमारे रहनुमा *सरकार आ़ला हज़रत रहमतुल्लाही तआ़ला अ़लेही* की पैदाइश हुई। जोके 14वीं सदी के अज़ीम मुजद्दिद हैं। *पैदाइश-* 10 शव्वाल 1272 को बरेली शरीफ में सरकार आ़ला हज़रत की पैदाइश हुई। *नाम और अलक़ाबात-* आपका नाम *अहमद रज़ा* है। लोग आपको इमामे अहले सुन्नत, आ़ला हज़रत, मुजद्दिदे आज़म, जैसे अलक़ाबात से याद करते हैं। *खानदान-* आपके जद्दे आ़ला *सईदउल्ला खान* कंधार के पठान थे। जो मुगलिया सल्तनत के दौर में मोहम्मद शाह के साथ हिंदुस्तान तशरीफ लाए। हुकूमत के बड़े मनसब पर फ़ाइज़ रहे। लाहौर का शीश महल आप की जागीर था। सईदउल्ला खान के बेटे *साद यार खां* को हुकूमत ने एक जंग करने के लिए रुहेलखंड भेजा। कामयाबी के बाद यह पूरा इलाका रुहेलखंड और बदायूं वगैरा आप ही को दे दिया गया। आ़ला हज़रत के दादा *रज़ा अ़ली खां* ने बाक़ायदा हिंदुस्तान में पहला दारुल इफ़्ता क़ायम किया। 1857 की जंगे आज़ादी में हिस्सा भी लिया। जर्नल हेडसन आप के सर की कीमत ₹500 लगाई थी। 1865 में आ़ला हज़रत के दादा रज़ा अ़ली खां का इंतकाल हुआ। रज़ा अ़ली खां के बेटे *नक़ी अ़ली खां* हैं। जिन्होंने बेशुमार किताब लिखीं। नक़ी अ़ली खां के बेटे *सरकार आ़ला हज़रत* हुऐ। *बचपन और तालीम-* सरकार आ़ला हज़रत बचपन से ही बड़े होशियार, समझदार और अक़लमंद रहे। 4 साल की उम्र में आपने क़ुरान मजीद का नाज़रा मुकम्मल किया। आपने सारी तालीम घर की चारदीवारी में रहकर ही हासिल की। सिर्फ 8 साल की उम्र में एक अरबी ज़बान में किताब तहरीर फ़रमाई। 14 साल की उम्र जब के लोगों को जीने का सलीक़ा नहीं आता आप इस उम्र में मुफ्ती बन चुके थे। आप दीनी उलूम के साथ-साथ दुनियावी उलूम मैथ, साइंस वगैरह में भी बड़े माहिर थे। इसका अंदाजा आप उस वाक्य से लगा सकते हैं जबकि आपने अपने दौर के बड़े साइंटिस्ट अल्बर्ट जैसे को भी धूल चटा दी थी। आप उर्दू, अरबी, फ़ारसी ज़बान के बड़े ही माहिर थे। आपने इन तीनों जबानों में बहुत सारी किताबें और नातें भी लिखीं हैं। ज़रा सोचिए...! - [Download Ya Elahi Har Jaga Teri Ata Ka Sath Ho MP3 Naat by Owais Raza Qadri](https://barelvi.in/download-ya-elahi-har-jaga-teri-ata-ka-sath-ho-mp3-naat-by-owais-raza-qadri/): Ya Elahi Har Jaga Teri Ata Ka Sath Ho is one of the favourite Naat by Owais Raza Qadri. The strong and soothing voice of Owais Raza Qadri is by the fans. - [Surah Yaseen IN HINDI English Arabic Kanzul Iman](https://barelvi.in/surah-yaseen-in-hindi-english-arabic-kanzul-iman/): https://www.youtube.com/watch?v=7OrmaZs5vwY ۞ बिस्मिल्ला हिर रहमानिर रहीम ۞ .यासीन 1.वल कुर अनिल हकीम 2.इन्नका लमिनल मुर्सलीन 3.अला सिरातिम मुस्तकीम 4.तंजिलल अलीजिर रहीम 5.लितुनज़ि-रा कौमम-मा उनज़ि-र आबाउहुम फहुम गाफिलून 6.लकद-हक कल कौलु अला अकसरिहिम फहुम-ला युअमिनून 7. - [ALlAH ko Upar Wala kehna kesa](https://barelvi.in/allah-ko-upar-wala-kehna-kesa/): कुछ लोग अल्लाह ﷻ का नाम लेने के बाजाऐ उसको ऊपर वाला बोलते हैं ये निहायत गलत बात है बल्किह अगर ये अक़ीदह रख कर ये लफ्ज़ बोले कि अल्लाह ﷻ ऊपर है तो ऐ कुफ्र है कियोंकि अल्लाह ﷻ की ज़ात ऊपर नीचे आगे पीछे दाहने बाऐं तमाम सिम्तों हर मकान और हर ज़मान से पाक है बरतर व बाला है- पूरब पच्छिम उत्तर दख्खिन ऊपर नीचे दाहने बाऐं आगे पीछे ज़मान व मकान को उसी ने पैदा किया है तो अल्लाह ﷻ के लिऐ ये नहीं बोला जा सकता कि वह ऊपर है या नीचे है पूरब में है पच्छिम में है कियोंकि जब उसने इन चीज़ों को पैदा नहीं किया था वह तब भी था, कहां था और किया था उसकी हक़ीक़त को उसके अलावह कोई नहीं जानता, अब अगर कोई कहे कि अल्लाह ﷻ अर्श पर है तो उस से पूछो कि जब उसने अर्श को पैदा नहीं किया था तो वह कहां था? - [Ayatul Kursi](https://barelvi.in/ayatul-kursi/): ( 2 ) हज़रते सय्यिदुना उबय्य बिन का’ब رضي الله عنه से रिवायत है ! कि हुस्ने अख़्लाक़ के पैकर, नबियों के ताजवर, महबूबे रब्बे ﷻ हुजूर ﷺ ने फ़रमाया : ऐ अबू मुन्जिर ! - [Wo Bareli Ka Ahmad Raza Hai](https://barelvi.in/wo-bareli-ka-ahmad-raza-hai/): ग़ौसे आज़म رضي الله عنه का दीवाना वो है ख़्वाजा رضي الله عنه का मस्ताना जो मुहम्मद ﷺ पे दिल से फ़िदा है वो बरेली का अहमद रज़ा رضي الله عنه है दसवीं तारीख थी, माहे शव्वाल था घर नक़ी खान के बेटा पैदा हुवा नाम अहमद रज़ा رضي الله عنه जिस का रखा गया आला हज़रत رضي الله عنه ज़माने का वो बन गया वो मुजद्दिदे-ज़माना, इल्मो-हिक़मत का खज़ाना जिस ने बचपन में फ़तवा दिया है वो बरेली का अहमद रज़ा رضي الله عنه है जब वो पैदा हुवा नूरी साए तले वादी-ए-नज्द में आ गए ज़लज़ले कैसे उसकी फ़ज़ीलत का सूरज ढले जिस की अज़मत का सिक्का अरब में चले जिस का खाएं उसका गाएं, उस का नारा हम लगाएं जिस का नारा अरब में लगा है वो बरेली का अहमद रज़ा رضي الله عنه है जब रज़ा खां को बैअत की ख़्वाहिश हुई पहुंचे मारेहरा और उम्र बाइस की थी फैज़े-बरकात से ऐसी बरकत मिली साथ बैअत के फ़ौरन ख़िलाफ़त मिली आला हज़रत رضي الله عنه उनको तन्हा सिर्फ मैं ही नहीं कहता अच्छे अच्छों को कहना पड़ा है वो बरेली का अहमद रज़ा رضي الله عنه है उस मुजद्दिद ने लिखा है ऐसा सलाम जिस को कहती है दुनिया इमामुल-कलाम पढ़ रहे हैं फिरिश्ते علیہ السلام जिसे सुब्हो-शाम मुस्तफ़ा ﷺ जाने-रेहमत पे लाखो सलाम प्यारा प्यारा ये सलाम, किस ने लिखा ये कलाम? - [ILM E DEEN HASIL KARNA](https://barelvi.in/ilm-e-deen-hasil-karna/): इल्मे दीन हासिल करना हर मर्द और औरत पर फर्ज है! - [वाक़या एक पारसी और सैय्यदज़ादी का](https://barelvi.in/%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%bc%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%af%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a6/): वाक़या एक पारसी और सैय्यदज़ादी का हेरात में एक सैय्यद फैमली रहती थी उनके शौहर का इंतेक़ाल हो गया तो वो बेवा सैय्यदज़ादी ग़रीबी और फाक़ों से मजबुर हो कर समरक़ंद की तरफ चल पडीं वो बेवा ख़ातुन समरक़ंद पहुंची तो उनके साथ में उनकी बच्चियां थी कोई बेटा न था, ख़ातुन ने लोगों से पुछा तो पता चला के समरकंद में दो लोग बहुत रईस हैं पहला रईस मुसलमान था और दुसरा रईस एक पारसी था ख़ातुन ने सोंचा के पहले मुसलमान के पास चलती हुं, जब वो रईस मुसलमान के पास पहुंची तो ख़ातुन ने अपनी परीशानी उन्हें बताई, और कहा के मैं सैय्यदज़ादी हुं मेरे शौहर का इंतेक़ाल हो चुका है ‘ मैं बहुत मजबुर हो कर आपके पास आई हुं रईस मुसलमान शख़्स कहने लगा कोई शिजरा है तो दिखाओ या कोई सबुत दो के तुम सैय्यदज़ादी हो, वो ख़ातुन कहने लगी मैं बहुत मुसीबत में आपके पास बडी उम्मीद ले कर आई हुं, इस मुसीबत के घडी में अपने साथ शिजरा ले कर कहां फिरती रहुं मैं, मगर उस रईस मुसलमान के दिल पर कोई असर न हुआ और उसने अपना दरवाज़ा बंद कर लिया बेवा ख़ातुन ने मजबुरन रईस पारसी की तरफ जाने का इरादा किया के शायद वहां से कोई मदद मिल जाए, ख़ातुन सैय्यदज़ादी ने उस पारसी के दरवाज़े पर पहुंच कर अपनी मजबुरी बयान करने लगी, ख़ातुन ने कहा मैं मुसलमानों के रसुल ﷺ की औलाद में से हुं मेरे शौहर का इंतेक़ाल हो चुका है अब मुझे यहां रहने के लिये कोई ठिकाना चाहिये पारसी ने ये सुना तो फौरन रहने के लिये एक घर दे दिया और अपनी बीवी से बोला चलो इनकी बेटियों को सराय से ले कर आतें हैं, मुसलमान रईस जब रात को सोया तो ख़्वाब में देखा के वो जन्नत में एक महल के दरवाज़े पर खडा है और सामने हुज़ुर अकरम ﷺ खडे हैं मुसलमान रईस पुछता है या अल्लाह ﷻ के रसुल ﷺ ये महल किसका है..? - [Chaand Nikla Eid Ka](https://barelvi.in/chaand-nikla-eid-ka/): मोमिनो ख़ुशियाँ मनाओ, चाँद निकला ईद का नूर की शम्ए जलाओ, चाँद निकला ईद का घर को अपने तुम सजाओ चाँद निकला ईद का रौशनी से झगमगाओ, चाँद निकला ईद का दो मुबारकबाद सबको ईद की ऐ मोमिनो ! - [Hazrat Ali رضي الله عنه Ke Insaf Ka Waqia](https://barelvi.in/hazrat-ali-%d8%b1%d8%b6%d9%8a-%d8%a7%d9%84%d9%84%d9%87-%d8%b9%d9%86%d9%87-ke-insaf-ka-waqia/): हज़रत अली رضي الله عنه का इंसाफ जब वो दोनो खने के लिये बैठे तो एक तीसरा आदमी आया और खाने में शामिल हो गया, तीनों ने मिल कर वो सारी आठ रोटियां खा डाली खाने के बाद तीसरा आदमी खडा हुआ और आठ दरहम देते हुए बोला ये जो मैं ने आपके साथ खाना खाया है ये उसका मुआवज़ा है, उसके जाने के बाद दोनों में बहस शुरु हो गई जिसकी पांच रोटियां थी उसने कहा मैं पांच दरहम लुंगा और तुम्हें तीन दरहम दुंगा क्युंकी तुम्हारे पास तीन रोटियां ही थी तीन रोटि वाले ने कहा मैं आधे से कम हरगिज़ न लुंगा, यानी चार दरहम मेरे और चार दरहम तुम्हारे इन दोनों का झगडा इतना ज़ोर पकड गया के आख़िरकार अमिरुल मोमेनीन हज़रत अली رضي الله عنه. - [Shaitan ki 6 Kamzoriyan - शैतान की 6 कमजोरियाँ](https://barelvi.in/shaitan-ki-6-kamzori/): शैतान ने हुज़ूर ﷺ को अपनी 6 कमजोरी बताई एक बार रसुल ए करीम ﷺ ने शैतान को देखा जो बहुत लाग़र और कमज़ोर नज़र आ रहा था नबी ए करीम ﷺ ने शैतान से पुछा तेरा ये हाल कैसे हो गया..? - [Ramzaan Al Wadaa - माह-ए-रमज़ान अल-वदाअ़](https://barelvi.in/ramzaan-al-wadaa-maah-e-ramzaan-al-wada/): ऐ रब्ब-ए-काएनात ﷻ के मेहमान ! - [Meri Baat Ban Gai Hai Teri ﷺ Baat Karte Karte](https://barelvi.in/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%ac%e0%a4%a8-%e0%a4%97%e0%a4%88-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%ef%b7%ba-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4/): मुझे मौत आए आक़ा ﷺ ! - [Ya Ilahiﷻ Har Jagah Teri Ata Ka Saath Ho](https://barelvi.in/%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80-%ef%b7%bb-%e0%a4%b9%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%97%e0%a4%b9-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%bc%e0%a4%a4%e0%a4%bc/) - [हुज़ूर ﷺ ऐसा कोई इंतिज़ाम हो जाए-Huzoor ﷺ Aisa Koi Intizaam Ho Jae](https://barelvi.in/%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a5%9b%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%90%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%87%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a5%9b%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%9c/) - [x](https://barelvi.in/x-3/) - [x](https://barelvi.in/x-2/) - [x](https://barelvi.in/x/) - [Gyarvi Sharif in Hindi - ग्यारहवी शरीफ](https://barelvi.in/%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ab-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a4%a4-gyarvi-sharif-ki-hakikat/) - [मेहमान नवाज़ी के फायदे](https://barelvi.in/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a6%e0%a5%87/) - [कुर्बान माँ की दुआओं पर](https://barelvi.in/%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%86%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b0/): यह किस्सा है उस वक्त का जब एक दिन अल्लाह की बारगाह में हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने अर्ज किया की ए मेरे रब जब मैं जन्नत में आऊंगा उस वक्त वहां मेरे साथ कौन रहेगा या होगा? - [गुस्ताखो_से_तौबा_की_तौफीक_छीन_ ली_जाती_हैं](https://barelvi.in/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a5%8b_%e0%a4%b8%e0%a5%87_%e0%a4%a4%e0%a5%8c%e0%a4%ac%e0%a4%be_%e0%a4%95%e0%a5%80_%e0%a4%a4%e0%a5%8c%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%95_/): रिवायत में आता है कि एक दिन इब्लीस शैतान हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की बारगाह में हाज़िर हुआ और कहा कि रब से मेरी शिफारिश कर दीजिए मैं तौबा करना चाहता हूं,आपने उसके लिए दुआ फरमाई तो मौला फरमाता है कि ऐ मूसा इससे कह दो कि जाकर आदम की क़ब्र को सज्दा करले मैं इसे माफ कर दूंगा,ये बात जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने मलऊन को बताई तो खबीस कहने लगा कि जब मैंने उनको उनकी ज़िन्दगी में सज्दा नहीं किया तो अब उनकी क़ब्र को सज्दा करूंगा ये कहकर चला गया,यहां तक कि मौला उसको जहन्नम में 1 लाख साल जलाने के बाद निकालेगा और कहेगा कि अब भी आदम को सज्दा करले तो मैं तुझे माफ कर दूंगा इस पर वो इंकार करेगा और हमेशा के लिए जहन्नम में डाला जायेगा ? - [कलौंजी व शहद​](https://barelvi.in/%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%8c%e0%a4%82%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%b5-%e0%a4%b6%e0%a4%b9%e0%a4%a6%e2%80%8b/): शहद की मक्खी को अरबी में नहल कहते हैं जिसके नाम से क़ुर्आन में पूरी एक सूरह मौजूद है इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इंसानी ज़िन्दगी में शहद की क्या अहमियत होगी,अल्लाह عزوجل रब्बुल इज़्ज़त क़ुर्आन मुक़द्दस में इरशाद फरमाता है कि ​और तुम्हारे रब ने शहद की मक्खी को इल्हाम किया कि पहाड़ों में घर बना और दरख्तों में और छत्तों में.फिर हर क़िस्म के फल में से खा और अपने रब की राहें चल कि तेरे लिए नर्म और आसान हैं,उसके पेट से एक पीने की चीज़ रंग बिरंगी निकलती है जिसमे लोगों के लिए शिफा है बेशक उसमें निशानी है ध्यान करने वालों को​ (? - [कुत्ते की पैदाइश कैसे हुयी ?](https://barelvi.in/%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%88%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%af/): #कुत्ते की पैदाइश कैसे हुयी ? - [बीवी ने नमक़ तेज़ कर दिया था](https://barelvi.in/%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%ae%e0%a4%95%e0%a4%bc-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%9c%e0%a4%bc-%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/): #मिंया बीवी एक औरत से खा़ने में नमक़ तेज़ हो गया, शौहर खाने के लिऐ बैठा ! तो तेज़ नमक़ देखकर उसे गुस्सा आ गया !! - [अब्बू क्या आप मुझे क़त्ल करने_लगे हैं](https://barelvi.in/%e0%a4%85%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a5%82-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%aa-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%bc%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b2-%e0%a4%95/): #अब्बू क्या आप मुझे क़त्ल करने_लगे हैं..? - [हमल गीरा ने वालों के लीये अजा़ब](https://barelvi.in/%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%b2-%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%85/): #हमल गीराने वालों के लीये अजा़ब ?हुज़ुर ﷺ ने फरमाया के जो ह़मल दुनीया मे गीरा दीये गये होगें वोह कयामत मे बच्चों की शक्ल मैं आयेंगे और उनकी आवाज़ बीजली के कडाको जेसी होगी और वो फरयाद करेंगे के हम मज़लुम हैं ?फीर वो अपनी मां को ले कर हाज़ीर होंगें और कहेंगे के ?अे अल्लाह عزوجل मै अपनी मां से पुछता हुं के उसने मुजे कयुं मार दीया था? - [क़ब्रिस्तान जाने की सुन्नतें​](https://barelvi.in/%e0%a4%95%e0%a4%bc%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a5%8d/) - [पर्दा इज़्ज़त हैं बे इज़्ज़ती नही](https://barelvi.in/%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%a4-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a5%87-%e0%a4%87%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a5%8d/): पर्दा #_इज़्ज़त हैं बे इज़्ज़ती नही ➡आजकल कुछ इस्लाम के दुश्मन मुसलमान औ़रतों को ये कहकर बहकाया करते हैं कि इस्लाम ने औ़रतों को पर्दे में रख कर औ़रतों की बे इज़्ज़ती की हैं इसलिए औ़रतों को पर्दों से निकल कर हर मैदान में मर्दों के दोश बदोश खड़ी हो जाना चाहिए! - [तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं ?](https://barelvi.in/%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%87%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae/): तो फिर #इस्लाम एक बुरा धर्म हैं!!! - [अल्लाह सबसे बड़ा है](https://barelvi.in/%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%b8%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a5%9c%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/): * थोडा वक्त निकालकर किसी भी हाल में ईस पोस्ट को जरुर पढना * *क्या आप जानते हैं कि अल्लाहु अकबर यानी अल्लाह सबसे बड़ा है के हक़ीक़ी मायने क्या हैं..?* *अगर नहीं तो पढ़िए....* जिस ज़मीन पर हम रहते हैं वह एक आम आदमी के मुक़ाबले *20 अरब खरब (2000000000000000000000000)* गुना बड़ी है जबकि हमारा सूरज हमारी ज़मीन से भी *10 लाख (1000000)* गुना बड़ा है इसके मुक़ाबले में *ईटाकैरीनाई (Etacarinae)* नाम का मशहूर सितारा हमारे सूरज से भी *50 लाख (5000000)* गुना बड़ा है इसके बाद *बीटल जूस (Betel Geuse)* नाम के सितारे का नंबर आता है जो हमारे सूरज से *30 करोड़ (300000000)* गुना बड़ा है और फिर *वी.वाई.कैनिसमैजोरिस (V.Y. - [मेरी आँखों की ठंडक नमाज़ है](https://barelvi.in/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%81%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a0%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%95-%e0%a4%a8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a5%9b-%e0%a4%b9%e0%a5%88/): हज़रत बिलाल हब्शी रज़ियल्लाहु अन्हू को जब जलते हुए कोयलों पर लिटा कर कोड़े मारे जा रहे थे तब रास्ते से गुज़रते हुए किसी शख़्स ने उनसे कहा कि: "बिलाल बड़ी अजीब कहानी है, तुम कोयलों पर लेटे हो, वह कोड़े मार रहा है और तुम मुस्कुरा रहे हो" तो हज़रत बिलाल रज़ियल्लाहु अन्हू ने हंस कर फ़रमाया: "जब तुम बाज़ार जाते हो और कोई मिट्टी का बर्तन भी ख़रीदते हो तो उसको भी ठोक-बजा के देखते हो कि इसकी आवाज़ तो ठीक है? - [नबी ﷺ के गुस्ताखो के मुँह पे एक और तमाचा](https://barelvi.in/%e0%a4%a8%e0%a4%ac%e0%a5%80-%ef%b7%ba-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%81%e0%a4%b9-%e0%a4%aa/): नबी ﷺ के गुस्ताखो के मुँह पे एक और तमाचा अल्लाह फरमाता हैं : तर्जमा: और अगर तुम उनसे पुछो तो बेशक ज़रूर कहेंगे कि हम तो यूँही हंसी खेले में थे ,तुम ठटृा करते थे ,बहाने न बनाओ तुम काफिर हो चुके अपने ईमान के बाद |''' (पारा 10,सूरह तौबा ,रुकूअ 14). - [जिब्रईल अमीन और एक नुरानी तारा](https://barelvi.in/%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%88%e0%a4%b2-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80/): जिब्रईल अमीन और एक नुरानी तारा...`एक मर्तबा हुजुर ﷺ ने हजरत जिब्रईल अमीन अलैहीस्सलाम से दर्याफ्त फरमाया : ऐ जिब्रईल! - [चींटी का तवक्कुल](https://barelvi.in/%e0%a4%9a%e0%a5%80%e0%a4%82%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a4%b5%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%b2/): ह़ज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम ने एक चींटी से पूछा :तू एक साल में कितना खा लेती हैं अर्ज़ की : गेहूं का एक दाना ! - [हज़रत इमाम हुसैन रदि अल्लाहु तअ़ाला अन्हु](https://barelvi.in/%e0%a4%b9%e0%a5%9b%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%87%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%a8-%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a4%bf-%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be/): हजरते इमामे हुसैन रदि अल्लाहु तअ़ाला अन्हु का नामे मुबारक ‘हुसैन’ है। आपकी कुन्नियत ‘अबू अब्दुल्लाह’ और लक़ब ‘ज़की’, ‘शहीदे आज़म’, ‘सय्यिदे शबाबे अहलिल जन्नह’, ‘सिब्ते रसूल’, ‘रेहाने रसूल’ हैं। विलादत बा-सअ़ादतः हज़रत इमाम हुसैन रदि अल्लाहु तअ़ाला अन्हु की पैदाइशे मुबारक 5 शाबान सन् 4 हिजरी को मदीना मुनव्वरा में हुई। हुजू़र सल्लल्लाहु तअ़ाला अलैहि वसल्लम ने आपके दायें कान में अज़ान और बायें कान में इक़ामत (तकबीर) कही और आपके मुँह में लुआबे दहन डाला और आपके लिए दुआ फ़रमाई। फिर सातवें दिन आपका नाम ‘हुसैन’ रखा और अक़ीक़ा किया। आपके फ़ज़ाइल व मनाक़िबः हदीस:- हज़रत अली रदि अल्लाहु तअ़ाला अन्हु से मरवी है कि रसूले करीम सल्लल्लाहु तअ़ाला अलैहि वसल्लम ने हुसैन इब्ने अली रदि अल्लाहु तअ़ाला अन्हुमा के बारे में फ़रमायाः ‘‘जिसने इन (हज़रत इमामे हुसैन) से महब्बत की उसने मुझसे महब्बत की।’’ (मोजमुल कबीर) हदीस:- हज़रत अबू सईद से मरवी है कि रसूले करीम सल्लल्लाहु तअ़ाला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि हसन और हुसैन जन्नती जवानों के सरदार हैं। (मिशकात, बाबः फ़जाइले अहले बैत, दूसरी फ़स्ल) हदीस:- हज़रत इब्ने उमर से मरवी है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तअ़ाला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि हसन और हुसैन यह दोनों दुनिया में मेरे दो फूल हैं। (मिशकात, बाबः फ़जाइले अहले बैत, दूसरी फ़स्ल) हदीस:- हज़रत उम्मुल फ़ज़्ल बिन्ते हारिस यानी हुज़्ाूर अक़दस की चची, हज़रत अब्बास बिन अब्दुल मुत्तलिब की मुबारक बीवी एक दिन हुज़्ाूर की ख़िदमत में हाज़िर हुईं और अर्ज़ किया, ‘‘या रसूलल्लाह! - [40 हदीस-ए-नब्वी صلى-الله-عليه-وسلم- हिंदी में.](https://barelvi.in/40-%e0%a4%b9%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%b8-%e0%a4%8f-%e0%a4%a8%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82/): Hadees 1. तुम में बेहतरीन वह है जिनके अख़लाक़ अच्छे हो. तिरमिज़ी शरीफ़ – 5575 Hadees 2. जो खामोश रहा उसने नेजात पाई. तिरमिज़ी शरीफ़ – 2425 Hadees 3. - [शौहर और बीवी का एक वाकिया](https://barelvi.in/%e0%a4%b6%e0%a5%8c%e0%a4%b9%e0%a4%b0-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/): शौहर- क्या तुमने अस्र की नमाज़ अदा की? बीवी- नहीँ शौहर-क्यों? - [अज़ाने क़ब्र का सुबूत हिंदी मे](https://barelvi.in/%e0%a4%85%e0%a5%9b%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a5%98%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80/): क़ब्र पर बाद दफ़न अजान देना जाइज़ है! हदीस और फ़िक़हे इबारत से इसका सुबूत मिश्कात शरीफ किताबुल जनाइज़ बाब मा युकालु इन्दा मिन हाज़रेहिल मौत स. - [प्यारे नबीصلى الله عليه وسلمकी प्यारी बातें](https://barelvi.in/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%ac%e0%a5%80%d8%b5%d9%84%d9%89-%d8%a7%d9%84%d9%84%d9%87-%d8%b9%d9%84%d9%8a%d9%87-%d9%88%d8%b3%d9%84%d9%85%e0%a4%95%e0%a5%80/): (1) क़ुरान शरीफ की तिलावत से और शहद के इस्तेमाल करने की बरकत से आदमी बहुत बड़ी बिमारियों से बच जाता है. - [Wazifa For 42 Problem Solving In Hindi And Arabic](https://barelvi.in/wazifa-for-42-problem-solving-in-hindi-and-arabic/): हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अन्हु से मरखी है किः रसूले पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया। जब सुन्सान इलाक़े में तुम्हारी सवारी का जानवर बेकार हो जाये तो यह आवाज़ दो। या इबादल्लाहि! - [10 बीबी की कहानी | 10 BiBi Ki Kahani](https://barelvi.in/10-bibi-ki-kahani/): 10 BiBi Ki Kahani: दो भाई एक शहर में रहते थे। बड़ा भाई बहुत बड़ा रईस था और छोटा भाई बहुत नादार और मुफ़लिस और ग़रीब था । छोटा भाई अपनी मुफ़लिसी और नादारी की वजह से आजिज़ परेशान हो गया था। अपनी बीवी से कहने लगा, कि यहाँ पर हम कब तक भूख और मुहताजी की मुसीबत सहें। अब मैं परदेस जाता हूँ। शायद मुझको कहीं नौकरी मिल जाए और ये मुसीबत के दिन कट जाएं। यह कहकर वह शख्स अपनी बीवी से रुख़्सत (विदा) होकर शहर में तलाशे रोज़गार के लिए चला गया और उसकी बीवी हद से ज़्यादा परेशान थी। दिल में कहती, ऐ पालने वाले रब, तू ही रोजी देने वाला है। अब तो मेरा शौहर भी चला गया, अब मुझको खाना कौन देगा। ये मोमिना जब बहुत मजबूर हो गई तो अपने शौहर के बड़े भाई के यहाँ गई और रोकर कहने लगी-भाई, मैं क्या करूं और कहाँ जाऊँ? - [10 Bibi Ki Kahani Download Pdf In Hindi](https://barelvi.in/10-bibi-ki-kahani-download-pdf-in-hindi/) - [16 Syed Ki Kahani Book In Hindi PDF Download](https://barelvi.in/16-syed-ki-kahani-book-in-hindi-pdf-download/) - [16 सैयदों की कहानी | 16 Syed Ki Kahani](https://barelvi.in/16-syed-ki-kahani/): उसने बुढ़िया को पहचान लिया और आवाज़ दी। बुढ़िया ने भी उसे देखते ही पहचान लिया और अन्दर बुलाया तो लकड़हारे ने पूछा- "बड़ी अम्मा, क्या मैं पूछ सकता हूँ कि आपको इतनी दौलत किस तरह हाथ आई ?" - [Ayatul Kursi In Arabic English Hindi Gujarati](https://barelvi.in/ayatul-kursi-in-arabic-english-hindi-gujarati/): जिस घर में आयतल कुर्सी ( Ayatul Kursi ) पढ़ी जाए उस घर से शैतान एक माह तक और जादूगर चालीस दिन तक दूर रहते हैं. - [Durood E Ibrahim - Powerful Benefits of Recitation - दुरूद ए इब्राहिम के फ़ायदे](https://barelvi.in/durood-e-ibrahim/): Durood E Ibrahim हर नमाज के क़अदए अख़ीरह में तशह्ह्रुद (अत्तहियात) के बाद Durood Ibrahim पढ़ना सारे उलमा के नज़दीक सुन्नत है मगर इमाम शाफ़ई के नज़दीक दुरूद ए इब्राहिम पढ़ना फ़र्ज़ है. - [हुजूर की हुकूमत - Huzoor Ki Hukumat](https://barelvi.in/huzoor-ki-hukumat/): मदीना मुनव्वरा में एक मर्तबा बारिश नहीं हुई थी। कहत का-सा आलम था। लोग बड़े परेशान थे। एक जुमा के रोज़ हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जबकि वअज फ़रमा रह थे, एक आराबी उठा और अर्ज़ करने लगा या रसूलल्लाह! - [Surah Asr](https://barelvi.in/surah-asr/): Surah Asr, the 103rd chapter of the Quran, is a brief three-verse chapter that contains deep teachings for Muslims. - [Surah Humazah](https://barelvi.in/surah-humazah/): Surah Humazah, Commonly Known As "سورة الهمزة" In Arabic, Is The 104th Chapter (surah) Of The Quran, Islam's Holy Book. - [Surah Fil](https://barelvi.in/surah-fil/): Surah Fil, or "The Elephant," is the 105th chapter (Surah) of the Quran, Islam's sacred book. - [किस बात, किस चीज़ पर गुरूर है तुझे -ए आदम और हव्वा की औलाद](https://barelvi.in/%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%9a%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a4%bc-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%b9/): या फिर अपने से कमतर दिखने वालो का मज़ाक बनाते हो, ---? - [Surah Quraish](https://barelvi.in/surah-quraish/): Surah Quraish Is The 106th Chapter (Surah) Of Islam's Sacred Book, The Quran. It Is A Small Surah With Only Four Verses. - [Surah Maun](https://barelvi.in/surah-maun/): Surah Maun is the 107th chapter (surah) of the Quran, generally known as "The Small Kindnesses" or "The Small Acts of Kindness." - [Surah Kausar](https://barelvi.in/surah-kausar/): Surah Kausar is the 108th chapter (Surah) of Islam's sacred book, the Quran. - [ख़्वाहिशाते नफ़्सानी - Khahishate Nafsani](https://barelvi.in/khahishate-nafsani/): शहवात, बादशाहों को फ़क़ीर और सब्र फकीरों को बादशाह बना देता है। आपने हज़रते यूसुफ अलैहिस्सलाम और जुलैखा का किस्सा नहीं पढ़ा? - [Surah Kafirun](https://barelvi.in/surah-kafirun/): Surah Kafirun Is The 109th Chapter (Surah) Of The Quran, The Holy Book Of Islam. - [Surah Nasr](https://barelvi.in/surah-nasr/): Surah Nasr Is The 110th Chapter (surah) Of The Sacred Quran, Islam's Sacred Book. In English, It Is Also Known As "The Divine Support" Or "The Help." - [बीमारी और मुसीबत के वक्त सब्र](https://barelvi.in/beemaaree-aur-pareshaanee-ke-vakt-sabr/): जो शख्स यह चाहता है कि वह अज़ाबे इलाही से छूट जाए. - [Surah Lahab](https://barelvi.in/surah-lahab/): Surah Lahab is the 111th chapter (surah) of the holy Quran, Islam's sacred book. 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असग़र और नजासते हकीकिया कद्रे माने से यानी नजासत की वह मिकदार जिसके लगे रहने से नमाज़ न हो उससे पाक होना। उसके कपड़े और उस जगह का जिस पर नमाज़ पढ़ी नजासते हकीकिया कुद्रे माने से पाक होना (मोतून) हदसे अकबर यानी वो काम जिनसे गुस्ल फर्ज हो जाए और हदसे असगर यानी वो काम जिनसे वुजू जाता रहता है और उनसे पाक होने का तरीका गुस्ल का तरीका और वुजू का तरीका दोनों वेबसाइट पर मौजूद हैं आप वहां से मालूमात ले सकते हैं। इस पहली शर्तें नमाज का मतलब यह है कि इस कद्र नजासत से पाक होना है, कि बगैर पाक किये नमाज होगी ही नहीं मसलन ननासते गलीना यानी दलदार नजासत दिरहम से ज़्यादा और नजासते खफीफा कपड़े या बदन के उस हिस्से की चौथाई से ज्यादा जिस में लगी हो इसका नाम कद्रे माने है और अगर इससे कम है तो इस का ज़ाइल करना सुन्नत है। मसअला :- किसी शख्स ने अपने को बे-वुजू गुमान किया और उसी हालत में नमाज़ पढ़ ली बाद को ज़ाहिर हुआ कि बे-वुजू न था नमाज न हुई। (दुर्रे मुख्तार) मसअला :- मुसल्ली अगर ऐसी चीज़ को उठाए हो कि उसकी हरकत से वह भी हरकत करें अगर उसमें नजासत कद्रे मानेअ हो तो नमाज जाइज नहीं मसलन चाँदनी का एक सिरा ओढ़कर नमाज़ पढ़ी और दूसरे सिरे में नजासत है अगर रुकू व सुजूद व कियाम व कादा में उसकी हरकत से उस नजासत की जगह तक हरकत पहुँचती है तो नमाज़ न होगी वर्ना हो जायेगी। यूँही अगर गोद में इतना छोटा बच्चा लेकर नमाज पढ़ी कि खुद उसकी गोद में अपनी ताकत से न रुक सके बल्कि उसके रोकने से थमा हुआ हो और उसका बदन या कपड़ा बकद्रे माने नमाज़ नापाक है तो नमाज़ न होगी कि यही उसे उठाये हुए है और अगर वह अपनी ताकत से रुका हुआ है उसके रोकने का मुहताज नहीं तो नमाज़ हो जायेगी कि अब यह उसे उठाये हुये नहीं फिर भी बे-जरूरत कराहत से खाली नहीं अगर्चे उसके बदन और कपड़ों पर नजासत भी न हो। (दुर्रे मुख्तार, आलमगीरी, रजा) मसअला :- अगर नजासत कद्रे माने से कम है जब भी मकरूह है फिर नजासते ग़लीज़ा दिरहम के बराबर है तो मकरूहे तहर्री मी और उससे कम तो खिलाफे सुन्नत। (दुर्रे मुख्तार, आलमगीरी) मसअला :- छत, खेमा, शामियाने का ऊपरी हिस्सा अगर नजिस हो और मुसल्ली के सर से खड़े होने में लगे जब भी नमाज़ न होगी (रद्दल मुहतार) यानी अगर शामियाने वगैरह की नजिस जगह बक़द्रे मानेअ नमाजी के सर को बक़द्रे अदाये रुक्न लगे यानी इतनी देर जितनी देर तीन बार सुव्हानल्लाह कहने में लगे मतलब यह है कि अगर कद्रे माने नजासत से छुआ और फौरन हटा दिया कि इतना वक्त न होने पाया कि जितनी देर में तीन बार सुव्हानल्लाह कह ले तो नमाज हो जाएगी और अगर तीन तस्बीह के बराबर या ज्यादा देर की तो नमाज़ न होगी। (रजा) मसअला :- अगर नमाज़ी का कपड़ा या बदन नमाज के दरमियान में बकद्रे मानेअ नापाक हो गया और तीन तस्बीह का वक्फा हुआ नमाज़ न हुई और अगर नमाज शुरू करते वक्त कपड़ा नापाक था या किसी नापाक चीज़ को लिये हुए था और उसी हालत में शुरू कर ली और 'अल्लाहु अकबर' कहने के बाद जुदा किया तो नमाज़ मुनअकिद ही न हुई यानी शुरू ही नहीं हुई। (रद्दल मुहतार) मसअला :- मुसल्ली का बदन जुनुब या हैज़ व निफास वाली औरत के बदन से मिला रहा या उन्होंने उसकी गोद में सर रखा तो नमाज़ हो जायेगी।( दुर्रे मुख्तार ) मसअला :- मुसल्ली के बदन पर नजिस कबूतर बैठा नमाज़ हो जायेगी। (बहर) मसअला :- जिस जगह नमाज पढ़े उसके पाक होने से मुराद सज्दे व कदम रखने की जगह का पाक होना है जिस चीज पर नमाज पढ़ता हो उसके सब हिस्से का पाक होना सेहते नमाज़ के लिए शर्त नहीं। (दुर्रे मुख्तार) मसअला :- मुसल्ली के एक पाँव के नीच दिरहम से ज्यादा नजासत हो नमाज़ न होगी। यूँही अगर दोनों पाँव के नीचे थोड़ी-थोड़ी नजासत है कि जमा करने से एक दिरहम हो जायेगी और अगर एक कदम की जगह पाक थी और दूसरा कदम जहाँ रखेगा नापाक है उसने इस पौव को उठाकर नमाज पढ़ी हो गई। हाँ बे-जरूरत एक पाँव पर खड़े होकर नमाज़ पढ़ना मकरूह है। (दुर्रे मुख्तार) मसअला :- पेशानी पाक जगह है और नाक नजिस जगह तो नमाज हो जायेगी कि नाक दिरहम से कम जगह पर लगती है और बिला जरूरत यह भी मकरूह । (रद्दल मुहतार) मसअला :- सजदे में हाथ या घुटना नजिस जगह होने से सही मजहब में नमाज़ न होगी (रद्दल मुहतार) और अगर हाथ नजिस जगह हो और हाथ पर सजदा किया तो बिलइजमा यानी सब के नज़दीक नमाज़ न होगी। (दुर्रे मुख्तार) मसअला :- आस्तीन के नीचे नजासत है और उसी आस्तीन पर सजदा किया नमाज़ न होगी (रद्दल मुहतार) अगर्चे नजासत हाथ के नीचे न हो बल्कि चौड़ी आस्तीन के खाली हिस्से के नीचे हो यानी आस्तीन फासिल (आड़, रोक) न समझी जायेगी अगर्चे कपड़ा मोटा हो कि उसके बदन की ताबे है बखिलाफ और मोटे कपड़े के कि नजिस जगह बिछाकर पढ़ी और उसकी रंगत या बू महसूस न हो तो नमाज़ हो जायेगी कि यह कपड़ा नजासत व मुसल्ली में फासिल (रोक) हो जायेगा कि बदने मुसल्ली का तावे नहीं यूँही अगर चौड़ी आस्तीन का खाली हिस्सा सजदा करने में नजासत की जगह पड़े और वहाँ न हाथ हो न पेशानी तो नमाज हो जायेगी अगर्चे आस्तीन बारीक हो कि अब उस नजासत को बदने मुसल्ली से कोई ताल्लुक नहीं। (रजा) मसअला :- अगर सजदा करने में दामन वगैरा नजिस जमीन पर पड़ते हो तो मुजिर नहीं (नमाज़ में नुकसान नहीं)। (रद्दल मुहतार) मसअला :- अगर नजिस जगह पर इतना बारीक कपड़ा बिछा कर नमाज़ पढ़ी जो सत्र के काम में नहीं आ सकता यानी उसके नीचे की चीज झलकती हो नमाज़ न हुई और अगर शीशे पर नमाज़ पढ़ी और उसके नीचे नजासत है अगर्चे नुमायाँ (जाहिर) हो नमाज हो गई। (रद्दल मुहतार) मसअला :- अगर सजदा करने में दामन वगैरा नजिस जमीन पर पड़ते हों तो मुजिर नहीं (नमाज़ में नुकसान नहीं) । (रहुल मुहतार) मसअला :- अगर नजिस जगह पर इतना बारीक कपड़ा बिछा कर नमाज पढ़ी जो सत्र के काम में नहीं आ सकता यानी उसके नीचे की चीज झलकती हो नमाज़ न हुई और अगर शीशे पर नमाज़ पढ़ी और उसके नीचे नजासत है अगर्चे नुमायाँ (जाहिर) हो नमाज़ हो गई। (रद्दल मुहतार) सत्रे औरत यानी बदन का वह हिस्सा जिसका छुपाना फर्ज है उसको छुपाना है। अल्लाह तआला फ़रमाता है : तर्जमा : हर नमाज के वक्त कपड़े पहनो । तर्जमा : औरतें जीनत यानी जीनत की जगहों को ज़ाहिर न करें मगर वह कि ज़ाहिर हैं। ( कि उनके खुले रहने पर जाइज़ होने की वजह से आदत पड़ी हुई है ) हदीस में है जिस को इब्ने अदी ने कामिल में इब्ने उमर रदियल्लाहु तआला अन्हुमा से रिवायत किया कि फरमाते हैं सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम जब नमाज़ पढ़ो तहबंद बांध लो और चादर ओढ़ लो और यहूदियों की मुशाबहत न करो और अबू दाऊद व तिर्मिज़ी व हाकिम व इब्ने खुज़ैमा उम्मुल मोमिनीन सिद्दीका रदियल्लाहु तआला अन्हा से रावी कि फरमाते हैं सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम बालिग़ औरत की नमाज़ बगैर दुपट्टे के अल्लाह तआला कबूल नहीं फ़रमाता --- अबू दाऊद ने रिवायत की कि उम्मुल मोमिनीन उम्मे सलमा रदियल्लाहु तआला अन्हा ने अर्ज की क्या बगैर इज़ार यानी बिला पाजामा वग़ैरह पहने सिर्फ कुर्ते और दुपट्टे में औरत नमाज़ पढ़ सकती है। इरशाद फ़रमाया जब कुर्ता पूरा हो कि पुश्ते कदम को छिपा ले --- और दार कुतनी बरिवायते अम्र इब्ने शुऐब अन अबीहे अन जद्देही रावी कि फरमाते हैं सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम नाफ के नीचे से घुटने तक औरत है --- और तिर्मिजी ने अब्दुल्लाह इब्ने मसऊद रदियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत की फरमाते हैं सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम औरत औरत है यानी छुपाने की चीज़ है जब निकलती है शैतान उसकी तरफ झांकता है। मसअला :- सत्रे औरत हर हाल में वाजिब यानी फर्ज है ख़्वाह नमाज़ में हो या नहीं, तन्हा हो या किसी के सामने बिला किसी सही गरज के तन्हाई में भी खोलना जाइज़ नहीं और लोगों के सामने या नमाज़ में तो सत्र बिलइजमा फर्ज है यहाँ तक कि अगर अंधेरे मकान में नमाज पढ़ी अगर्चे वहाँ कोई न हो और उसके पास इतना पाक कपड़ा मौजूद है कि सत्र का काम दे और नंगे पढ़ी बिलइजमा नमाज़ न होगी मगर औरत के लिये तन्हाई में जबकि नमाज़ में न हो तो सारा बदन छुपाना वाजिब नहीं बल्कि सिर्फ नाफ से घुटने तक और महारिम के सामने पेट और पीठ का छुपाना भी वाजिब है और गैर महरम के सामने और नमाज़ के लिये अगर्चे तन्हा अंधेरी कोठरी में हो तमाम बदन सिवा पाँच उज्च के जिसका बयान आयेगा छुपाना फर्ज है बल्कि जवान औरत को ग़ैर मर्दो के सामने मुँह खोलना भी मना है। (दुर्रे मुख्तार, रद्दल मुहतार) मसअला :- इतना बारीक कपड़ा जिससे बदन चमकता हो सत्र के लिए काफी नहीं उससे नमाज पढ़ी तो न हुई (आलमगीरी) --- यूँही अगर चादर में से औरत के बालों की सियाही चमके नमाज़ न होगी (रजा) --- बाज़ लोग बारीक साड़ियाँ और तहबंद बांधकर नमाज़ पढ़ते हैं कि रान चमकती है उनकी नमाज़ें नहीं होतीं और ऐसा कपड़ा पहनना जिससे सत्रे औरत न हो सके अलावा नमाज़ के भी हराम है। मसअला :- दबीज़ (मोटा) कपड़ा जिससे बदन का रंग न चमकता हो मगर बदन से बिल्कुल ऐसा चिपका हुआ है कि देखने से उज्च की हैअत (बनावट) मालूम होती है ऐसे कपड़े से नमाज़ हो जायेगी मगर उस उज्व की तरफ दूसरों को निगाह करना जाइज़ नहीं ( रद्दल मुहतार) --- और ऐसा कपड़ा लोगों के सामने पहनना भी मना है और औरतों के लिए बदर्जा औला यानी और ज्यादा मुमानअत (मना है)। बाज़ औरतें जो बहुत चुस्त पाजामे पहनती हैं इस मसअले से सबक लें। मसअला :- नमाज़ में सत्र के लिए पाक कपड़ा होना जरूरी है यानी इतना नजिस न हो जिससे नमाज़ न हो सके तो अगर पाक कपड़े पर कुदरत है और नापाक पहनकर नमाज़ पढ़ी नमाज़ न हुई। (आलमगीरी) मसअला :- इसके इल्म में कपड़ा नापाक है और उसमें नमाज पढ़ी फिर मालूम हुआ कि पाक था नमाज़ न हुई। (दुर्रे मुख्तार) मसअला :- ग़ैर नमाज़ में (यानी जब नमाज में न हो) नजिस कपड़ा पहना तो हरज नहीं अगर्चे पाक कपड़ा मौजूद हो और जो दूसरा नहीं तो उसी को पहनना वाजिब है (दुर्रे मुख्तार, रद्दल मुहतार) --- यह उस वक़्त है कि उसकी नजासत खुश्क हो छूट कर बदन को न लगे वर्ना पाक कपड़ा होते हुए ऐसा कपड़ा पहनना मुतलकन मना है कि बिला वजह बदन नापाक करना है। (रजा) मसअला :- मर्द के लिए नाक के नीचे से घुटनों के नीचे तक औरत है यानी उसका छुपाना फर्ज है नाफ उसमें दाखिल नहीं और घुटने दाखिल हैं (दुर्रे मुख्तार, रद्दल मुहतार) --- इस ज़माने में बहुतेरे ऐसे हैं कि तहबंद या पाजामा इस तरह पहनते हैं कि पेडू का कुछ हिस्सा खुला रहता है अगर कुर्ते वगैरह से इस तरह छुपा हो कि जिल्द (चमड़े) की रंगत न चमके तो खैर वर्ना हराम है और नमाज़ में चौथाई की मिकदार खुला रहा तो नमाज़ न होगी और बाज बेबाक ऐसे हैं कि लोगों के सामने घुटने बल्कि रान तक खोले रहते हैं यह भी हराम है और इसकी आदत है तो फासिक है। मसअला :- आज़ाद औरतों और हिजड़ों के लिए सारा बदन औरत है सिया मुँह की टकली और हथेलियों और पाँव के तलवों के, उसके सर के लटके हुए बाल और गर्दन और कलाईयाँ भी औरत हैं उनका छुपाना भी फर्ज है। (दुर्रे मुख्तार) मसअला :- इतना बारीक दुपट्टा जिससे बाल की सियाही चमके औरत ने ओढ़ कर नमाज़ पढ़ी न होगी जब तक कि उस पर कोई ऐसी चीज न ओढ़े जिससे बाल वगैरह का रंग छुप जाए। (आलमगीरी) मसअला :- बांदी के लिए सारा पेट और पीठ और दोनों पहलू और नाफ से घुटनों से नीचे तक औरत है खुन्सा मुश्किल रकीक (गुलाम) हो तो उसका भी यही हुक्म है। (दुर्रे मुख्तार) मसअला :- बांदी सर खोले नमाज पढ़ रही थी, नमाज के दरमियान ही में मालिक ने उसे आज़ाद कर दिया अगर फौरन अमले कलील यानी एक हाथ से उसने सर छिपा लिया नमाज़ हो गई वर्ना नहीं ख़्वाह उसे अपने आज़ाद होने का इल्म हुआ या नहीं, हाँ अगर उसके पास कोई ऐसी चीज़ ही न थी जिससे सर छिपाये तो हो गई। (दुर्रेमुख्तार, आलमगीरी) मसअला :- जिन आज़ा का सत्र फर्ज़ है उनमें कोई उज्व चौथाई से कम खुल गया नमाज़ हो गई और अगर चौथाई उज्व खुल गया और फौरन छुपा लिया जब भी हो गई --- और अगर बकद्र एक रुक्न यानी तीन मर्तबा सुव्हानल्लाह कहने के खुला रहा या बिलक़स्द खोला (यानी जानबूझ कर ) अगर्चे फौरन छिपा लिया नमाज़ जाती रही। (आलमगीरी रद्दल मुहतार) मसअला :- अगर नमाज शुरू करते वक़्त उज़्व की चौथाई खुली है यानी उसी हालत पर अल्लाहु अकबर कह लिया तो नमाज शुरू ही न हुई। (रद्दल मुहतार) मसअला :- अगर चन्द आज़ा में कुछ कुछ खुला रहा, हर एक उस उज़्व की चौथाई से कम है मगर मजमूआ उनका उन खुले हुए आज़ा में जो सबसे छोटा है उसकी चौथाई की बराबर है नमाज़ न हुई मसलन औरत के कान का नवाँ हिस्सा और पिंडली का नवाँ हिस्सा खुला रहा तो मजमूआ दोनों का कान की चौथाई की कद्र ज़रूर है नमाज़ जाती रही। (आलमगीरी) मसअला :- औरते गलीज़ यानी कुब्ल व दुबुर (पाख़ाने और पेशाब का मकाम) और उनके आस पास की जगह और औरते खफीफा कि उनके अलावा और आजाए औरत हैं। इस हुक्म में सब बराबर हैं गिलजत व खिफ्फत बा एतिबारे हुरमते नज़र के है यानी ज्यादती और कमी देखने के एतिबार से हराम है कि गलीजा की तरफ देखना ज्यादा हराम है कि अगर किसी को घुटना खोले हुए देखे तो नरमी के साथ मना करे अगर बाज़ न आये तो उससे झगड़ा न करे और अगर रान खोले हुए है तो सख्ती से मना करे और बाज़ न आया तो मारे नहीं और अगर औरते ग़लीज़ा खोले हुए है तो जो मारने पर कादिर हो मसलन बाप या हाकिम वह मारे। (रद्दल मुहतार) मसअला :- सत्र के लिये यह जरूरी नहीं कि अपनी निगाह भी उन आज़ा पर न पड़े तो अगर किसी ने सिर्फ लम्बा कुर्ता पहना और उसका गिरेबान खुला हुआ है कि अगर गिरेबान से नज़र करे तो आजा दिखाई देते हैं नमाज़ हो जायेगी अगर्चे बिलकस्द (जानबूझ कर ) उधर नज़र करना मकरूहे तहर्रीमी है। (दुर्रे मुख्तार, आलमगीरी) मसअला :- औरों से सत्र फर्ज़ होने के यह मअना हैं कि इधर उधर से न देख सकें तो मआज अल्लाह अगर किसी शरीर ने नीचे झुक कर आज़ा को देख लिया तो नमाज़ न गई। (आलमगीरी) मसअला :- मर्द में आजाए औरत नौ हैं आठ अल्लामा इब्राहीम हलबी व अल्लामा शामी व अल्लामा तहतावी वग़ैरहुम ने गिने । 1. - [Beauty of ALLAH DP for WhatsApp](https://barelvi.in/beauty-of-allah-dp-for-whatsapp/): Are you searching for a way to express your Beauty of ALLAH DP for WhatsApp? 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AR-RAHMAN, IR-RAHIM. MAALIKI YAWMID-DEEN. 'IYYAAKA NA'BUDU WA 'IYYAAKA NASTA'EEN. 'IHDINAS-SIRATAL-MUSTAQEEM. - [Suhag Raat Ka Tarika](https://barelvi.in/suhag-raat-ka-tarika/): ..जब दुल्हा, दुल्हन कमरे में जाए और तन्हाई हो तो बेहतर यह है कि सबसे पहले दोनो वुज़ू कर ले! - [Camel Ki Zakat](https://barelvi.in/camel-ki-zakat/) - [Bakriyon Ki Zakat](https://barelvi.in/bakriyon-ki-zakat/): मसअला : साल ख़त्म के बाद मालिके निसाब ने निसाब ख़ुद हलाक कर दी तो ज़कात साकित न होगी मसलन जानवर को चारा पानी न दिया गया कि वह मर गया ज़कात देनी होगी, यूँहीं अगर इसका किसी पर कर्ज था और वह मकरूज (कर्जदार) मालदार है साल ख़त्म के बाद इसने माफ़ कर दिया तो यह हलाक करना है। लिहाज़ा ज़कात. - [Sona Chandi OR Tijarat Ke Maal Ki Zakat](https://barelvi.in/sona-chandi-or-tijarat-ke-maal-ki-zakat/): हदीस न. 4 : इमाम मालिक व अबू दाऊद उम्मुल मोमिनीन उम्मे सलमा रदियल्लाहु तआला अन्हा से रिवायत करते हैं फ़रमाती हैं मैं सोने के जेवर पहना करती थी मैंने अर्ज की या रसूलल्लाह क्या यह कन्ज़ है? - [Zakat](https://barelvi.in/zakat/): मुसलमानों पर शाक हुई (समझे कि चाँदी सोना जमा करना हराम है तो बहुत दिक्कत का सामना होगा) फारूके आज़म रदियल्लाहु तआला अन्हु ने कहा मैं तुम से मुसीबत दूर करूँगा। ख़िदमते अकदस सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम में हाज़िर हुए अर्ज की या रसूलल्लाह! - [31 Surah Luqman](https://barelvi.in/31-surah-luqman/): 31 सूरए लुक़मान - 31 Surah Luqman सूरए लुक़मान मक्के में उतरी, सिवाए दो आयतों के जो “वलौ अन्ना मा फ़िल अर्दें” से शुरू होती हैं. - [32 Surah Al Sajda](https://barelvi.in/32-surah-al-sajda/): 32 सूरए सज्दा - 32 Surah Al Sajda सूरए सज्दा मक्के में उतरी सिवाय तीन आयतों के जो “अफ़मन काना मूमिनन” से शुरू होती हैं. - [RoZa kholNe ki Dua](https://barelvi.in/roza-kholne-ki-dua/): हदीस न. 6 : इमाम अहमद व अबू दाऊद और तिर्मिज़ी व इब्ने माजा व दारमी सलमान इब्ने आमिर ज़बी रदियल्लाहु तआला अन्हु से रावी हुजूर अकदस सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फ़रमाते हैं जब. - [Roza OR Mahe Ramzan](https://barelvi.in/roza-or-mahe-ramzan/): ( 1 ) सन दो हिजरी में मूमिनों पर रोज़े फ़र्ज़ और सदक़ए फ़ित्र वाजिब हुआ. - [33 Surah Al Ahzab](https://barelvi.in/33-surah-al-ahzab/): 33 सूरए अहज़ाब - 33 Surah Al Ahzab सूरए अहज़ाब मदीने में उतरी. इसमें नौ रूकू, तिहत्तर आयतें, एक हज़ार दो सौ अस्सी कलिमे और पाँच हज़ार सात सौ नब्बे अक्षर हैं. - [Kanzul Iman Aala Hazrat Pdf Free Download](https://barelvi.in/kanzul-iman-aala-hazrat-pdf-free-download/): (1) और उसके हुक्म का विरोध न करो. - [Kab Roza Na Rakhne Ki Ijazat Hai](https://barelvi.in/kab-roza-na-rakhne-ki-ijazat-hai/): मसअला : नफ़्ल रोज़ा क़सदन शुरू करने से लाज़िम हो जाता है कि तोड़ेगा तो कज़ा वाजिब होगी और यह गुमान कर के कि उसके जिम्मे कोई रोज़ा है शुरू किया बाद को मालूम हुआ कि नहीं है अब अगर फौरन तोड़ दिया तो कुछ नहीं और यह मालूम करने के बाद न तोड़ा तो अब. - [Sehri Aur Iftar Ki Hadees In Hindi](https://barelvi.in/sehri-aur-iftar-ki-hadees-in-hindi/): हदीस न. 16 : इमाम अहमद व अबू दाऊद और तिर्मिज़ी व इब्ने माजा व दारमी सलमान इब्ने आमिर ज़बी रदियल्लाहु तआला अन्हु से रावी हुजूर अकदस सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फ़रमाते हैं जब. - [Roza Kis chij Se Toot Jata Hai](https://barelvi.in/roza-kis-chij-se-toot-jata-hai/) - [Roza kab Nahi tutata he](https://barelvi.in/roza-kab-nahi-tutata-he/) - [CHAAND DEKHNE KA MASLA OR BAYAN](https://barelvi.in/chaand-dekhne-ka-masla-or-bayan/): तर्जमा : ऐ महबूब ! - [Roze Ke Jaruri Masail](https://barelvi.in/roze-ke-jaruri-masail/): मसअला : रोजे की पाँच किस्में हैं 1. फ़र्ज़, 2. वाजिब, 3. नफ्ल, 4. मकरूहे तनज़ीही 5. - [Roze Ka Bayan](https://barelvi.in/roze-ka-bayan/): तर्जमा :- ऐ ईमान वालो! - [34 Surah Ash Sheba](https://barelvi.in/34-surah-ash-sheba/): 34 सूरए सबा - 34 Surah Ash Sheba सूरए सबा मक्का में उतरी सिवाय आयत “व यरल्लज़ीना ऊतुल इल्मो” (आयत -6). - [Islamic Maloomat Hindi Me - इस्लामी मालूमात](https://barelvi.in/islamic-maloomat-hindi-me/) - [Namaz Ka Bayan](https://barelvi.in/namaz-ka-bayan/): उन्होंने अर्ज़ की या रसूलल्लाह! - [35 Surah Fatir](https://barelvi.in/35-surah-fatir/): सूरए फ़ातिर मक्का में उतरी, इसमें 46 आयतें 5 रूकू हैं. - [36 Surah Yasin](https://barelvi.in/36-surah-yasin/): सूरए यासीन मक्का में उतरी, इसमें 83 आयतें और पांच रूकू हैं. - [37 Surah Al Saffat](https://barelvi.in/37-surah-al-saffat/): सूरए साफ़्फ़ात मक्का में उतरी, इसमें 182 आयतें, पाँच रूकू हैं. - [ALLAH Tala Ki Jaat Aur Uski Sifat Ke Baare Mein Akeede](https://barelvi.in/allah-tala-ki-jaat-aur-uski-sifat-ke-baare-mein-akeede/): अकीदा :- अल्लाह का इल्म, जुज्यात, कुल्लियात, मौजूदात (Existing Thing), मादूमात (Non Existing Thing), मुमकिनात (Posibilities) और मुहालात को मुहीत (घेरे हुए) है यानी सबको अज़ल में जानता था और अब भी जानता है और अबद ता. - [38 Surah As Sad](https://barelvi.in/38-surah-as-sad/): सूरए सॉद मक्का में उतरी, इसमें 88 आयतें, पांच रूकू हैं. - [Imaan kya hai - ईमान क्या है](https://barelvi.in/imaan-kya-hai/): ईमान सिर्फ कुर्ता पैजामा पहनने दाढ़ी रखने या टोपी लगाने का नाम नहीं है बल्कि ईमान सिर्फ और सिर्फ ये हैं कि अपने नबी ﷺ से अपनी जान से भी ज़्यादा मुहब्बत की जाये. - [46 Surah Al Ahquaf](https://barelvi.in/46-surah-al-ahquaf/): सूरए अहक़ाफ़ मक्का में उतरी, इसमें 35 आयतें, चार रूकू हैं. - [Astagfirullah Ki Fazilat Aur Dua](https://barelvi.in/astagfirullah-ki-fazilat-aur-dua/): तौबा का वुजूब आयाते . - [45 Surah Al Jathiah](https://barelvi.in/45-surah-al-jathiah/): सूरए जासियह मक्का में उतरी, इसमें 37 आयतें, चार रूकू हैं. पहला रूकू अल्लाह के नाम से शुरू जो बहुत मेहरबान रहमत वाला(1) (1) यह सूरए जासियह है. - [44 Surah Al Dukhan](https://barelvi.in/44-surah-al-dukhan/): सूरए दुख़ान मक्का में उतरी, इसमें 59 आयतें, तीन रूकू हैं. - [40 Surah Al Mumin](https://barelvi.in/40-surah-al-mumin/): सूरए मूमिन मक्का में उतरी, इसमें 85 आयतें, नौ रूकू हैं. - [41 Surah Ham'mim Sajda](https://barelvi.in/41-surah-hammim-sajda/): सूरए हामीम सज्दा मक्का में उतरी, इसमें 54 आयतें, 6 रूकू हैं. - [42 Surah Al Shura](https://barelvi.in/42-surah-al-shura/): सूरए शूरा मक्का में उतरी, इसमें 53 आयतें, 5 रूकू हैं. - [Allah Par Yaqine Kamil](https://barelvi.in/allah-par-yaqine-kamil/): "अगर इंसान का दिल हर तरह की दुनियावी ख्वाहिशात से पाक हो और उसका अल्लाह ﷻ पर यक़ीन कामिल हो तो कोई भी काम उसके लिए नामुमकिन नहीं - अल्लाह ﷻ कायनात का खालिक़ और मालिक है और तमाम मख्लूक़ का रिज़्क़ उसने अपने ज़िम्मे ले रखा है जब रिज़्क़ की ज़िम्मेदारी उसकी है तो फिर हम इस पर परेशानी में खुद को क्यूं मुब्तिला किए हुए हैं कि मैं फलां वक़्त क्या खाऊंगा- या फिर मेरा बच्चा क्या खाएगा- इसी सोच ने हमें मुख्तलिफ क़िस्म के वसवसों और फित्नों में मुब्तिला कर रखा है और इसी फिक्र में हम अल्लाह ﷻ से गाफिल हो गए हैं..!! - [43 Surah Al Zukhruf](https://barelvi.in/43-surah-al-zukhruf/): सूरए ज़ुख़रूफ़ मक्का में उतरी, इसमें 89 आयतें, सात रूकू हैं. - [Surya OR Chandra Grahan Ki Namaz](https://barelvi.in/surya-or-chandra-grahan-ki-namaz/): सूरज ग्रहण की नमाज़ सुऩ्नते मुअक्कदा और चाँद ग्रहण की नमाज़ मुस्तहब है । सूरज ग्रहणे की नमाज़ जमाअत से पढ़नी मुस्तहब हे । और तन्हा तन्हा भी हो सकती है । अगर जमाअत से पढ़ी जाये तो खुतबा के सिवा जुमा की तमाम शर्तें उसके लिए शर्त हैं । वही शख्स उसकी जमाअत काइम कर सकता है जो जुमा की जमाअत काइम कर सकता हो । अगर वह न हो तो लोग तन्हा तन्हा पढ़े चाहे घर में पढ़े या मस्जिद में । मसला - ग्रहण की नमाज़ नफ्ल की तरह दो रकअत लम्बी लम्बी सूरतों के साथ पढ़ें । फिर उस वक़्त तक दुआ मांगते रहें कि ग्रहण खत्म हो जाये । मसला : - ग्रहण की नमाज़ में न अज़ान है न इकामत |🎁 अज़ान का तरीका | न बुलन्द आवाज़ ( दुर्रे मुख्तार जि . - [Travih Ki Namaz Ka Bayaan](https://barelvi.in/travih-ki-namaz-ka-bayaan/): मसला : - मर्द व औरत सब के लिए तरावीह सुन्नते मुअक्कदा है । इसका छोड़ना जाइज़ नहीं । औरतें घरों में अकेले अकेले तरावीह पढ़ें । मस्जिदों में न जायें । ( दुर्रे मुख्तार जि . - [Istikhara Ki Namaz OR Tarika](https://barelvi.in/istikhara-ki-namaz-or-tarika/): जरूरी नही के आपको कोई सपना या द्रिशय या निशानी इत्यादि नजर आएंगे। अल्लाह ﷻ आपके दिल मे उस चीज़ को पूरा करने या नही करने की ओर झुकाव डाल देंगे इस्तिखारा कोई करिशमा या चमत्कार नही बल्कि कूदरती तरीका है जीसके जरिए अल्लाह ﷻ आपके फैसले मे बरकत देंगे. - [47 Surah Al Muhammad](https://barelvi.in/47-surah-al-muhammad/): अल्लाह के नाम से शुरू जो बहुत मेहरबान रहमत वाला(1) (1) सूरए मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) मदनी है. - [Mushafir Ki Namaz](https://barelvi.in/mushafir-ki-namaz/): जो शख्स तकरीबन 92 किलोमीटर की दूरी के सफर का इरादा करके घर से निकला और अपनी बस्ती से बाहर चला गया तो शरीअत में यह शख्स मुसाफिर हो गया । अब उस पर वाजिब है कि कसर करे । यानी जुहर व अस्त्र व इशा में चार रकअत वाली फ़र्ज़ नमाज़ों को दो ही रकअत पढ़े । क्योंकि उसके हक में दो ही रकअत पूरी नमाज है । ( दुर्रे मुख्तार स . - [48-Surah-Fatah](https://barelvi.in/48-surah-fatah/): सूरए फ़त्ह मदीने में उतरी, इसमें 29 आयतें, चार रूकू हैं. - [Fajr Ki Namaz Ka Tarika](https://barelvi.in/fajr-ki-namaz-ka-tarika/): सुन्नते मोअक्केदा. - [49-Surah Al-Huzuraat](https://barelvi.in/49-surah-al-huzuraat/): सूरए हुजुरात मदनी है, इसमें दो रूकू, अठारह आयतें, तीन सौ तैंतालीस कलिमे और एक हज़ार चार सौ छिहत्तर अक्षर हैं. - [Azan ka Tarika](https://barelvi.in/azan-ka-tarika/): मस्जिद के बाहरी हिस्से में ऊँची जगह पर क़िबला की तरफ़ मुह करके खड़ा हो और कानों के सुराखों में कलिमा की उंगलियां डाल कर बुलन्द आवाज़ से अल्लाहु अक्बर अल्लाहु अक्सर कहे फिर ज़रा ठहर कर अल्लाहु अक्बर अल्लाहु अक्बर कहे । फिर ज़रा ठहर कर दो मर्तबा अश् - हदु अल - लाइला – ह इल्लल्लाह कहे । फिर दो मर्तबा ठहर ठहर कर अश् - हदु अन्-न मुहम्मदर् - रसूलुल्लाह कहे । फिर दाहिने तरफ मुंह फेर कर दो मर्तबा हय्य अ़लस्सलाह कहे । फिर बायें तरफ मुंह करके दो मर्तबा हय्य अल् ल फ़लाह कहे । फिर क़िबला को मुंह कर ले और अल्लाह अक्बर कहे । फिर एक मर्तबा ला इला - ह इल्लल्लाह कहे । मसला : - फ़ज्र की अज़ान में 'हय्य अलल्फलाह के बाद दो मर्तबा अस्सलातु खैरुम् मिनन् नौम भी कहे कि मुस्तहब है । अज़ान के बाद पहले दुरूद शरीफ पढ़े फिर अज़ान पढ़ने वाला और अजान सुनने वाले सब यह दुआ पढ़ें - अज़ान का जवाब : - जब अज़ान सुने तो अज़ान का जवाब देने का हुक्म हैं । अज़ान के जवाब का तरीका यह है कि अज़ान कहने वाला जो कलिमा कहे सुनने वाला भी वही कलिमा कहे । मगर हय अलस्सलाह और हय्य अल़ल्फलाह के जवाब में ला हौ - ल व ला कुव्वतः इल्ला बिल्लाह कहे । और बेहतर यह है कि दोनों कहे और फ़ज्र की अज़ान में अस्सलातु ख़ैरुम् मिनन् नौम के जवाब में सदक् – त व बरर्-त व बिल् - हक़्कि नतक् - त कहे । मसला - जब मुअज्जिन अश् - हदु अन् - न मुहम्मदर् - रसूलुल्लाह कहे तो सुनने वाला दुरूद शरीफ़ भी पढे । और मुस्तहब यह है कि अंगूठों को बोसा देकर आंखों से लगाये । और कहे ) ( रघुलमुहतार जि . - [Juma ki Namaz Ka bayaan](https://barelvi.in/juma-ki-namaz-ka-bayaan/): जुमा फर्ज है और उसका फर्ज होना जुहर से ज्यादा मुअक्कद है । इसका मुन्किर काफ़िर है । ( दुर्रे मुख्तार जि . 1 स . - [Qaza Namazo Ka Bayaan](https://barelvi.in/qaza-namazo-ka-bayaan/): मसलाः - किसी इबादत को उस के मुकर्ररा वक़्त पर अदा करने को अदा कहते हैं । और वक़्त गुजर जाने के बाद अमल करने को कजा कहते हैं । मसलाः - फर्ज नमाजों की कजा फर्ज है । Namaz Ka Tarika |वित्र की कजा वाजिब है । फज्र की सुऩ्नत अगर फर्ज के साथ कजा हो और जवाल से पहले पढ़े तो फर्ज के साथ सुऩ्नत भी पढ़े । और अगर जवाल के बाद पढ़े तो सुऩ्नत की कजा नहीं । जुमा और जुहर की सुऩ्नतें कजा हो गई और फर्ज पढ़ लिया , अगर वक़्त खत्म हो गया तो उन सुऩ्नतों की कजा नहीं । और अगर वक़्त बाकी है तो उन सुऩ्नतों को पढ़े । और अफज़ल यह है कि पहले फर्ज के बाद वाली सुऩ्नतों को पढ़े फिर उन छूटी हुई सुऩ्नतों को पढ़े । ( दुर्रे मुख्तार जि , 1 स . - [Masjid Ke Aadaab OR Ahakaame Masjid](https://barelvi.in/masjid-ke-aadaab-or-ahakaame-masjid/): मस्जिद में अंदर जाते वक़्त भी दुआ पढ़े !और मस्जिद से बाहर आये तब भी मस्जिद masjid से बाहर आने की दुआ dua पढ़े ! - [50 Surah Al-Qaaf](https://barelvi.in/50-surah-al-qaaf/): 50 सूरए क़ाफ़ – 50 Surah Al-Qaaf सूरए क़ाफ़ मक्के में उतरी. इसमें तीन रूकू, पैंतालीस आयतें, तीन सौ सत्तावन कलिमे और एक हज़ार चार सौ चौरानवे अक्षर हैं. - [Tayammum Ka Tariqa](https://barelvi.in/tayammum-ka-tariqa/): तयम्मुम किन सूरतों में करना जाइज़ है ? - [Ghusl Ka Tarika](https://barelvi.in/ghusl-ka-tarika/): मसअला - जिनपर गुस्ल फ़र्ज़ है अगर उन्होने हाथ धोने से पहले किसी बाल्टी या टब में हाथ डाल दिया बल्कि सिर्फ नाखून ही डुबो दिया तो सारा पानी मुशतमिल हो गया अब उससे गुस्ल या वुज़ू कुछ नहीं हो सकता,इस बात का खयाल रखें अगर कोई गुस्ल खाने मे बरहना होकर नहाता है और नहाने से पहले या बाद को कुल्ली करता और नाक में पानी चढ़ा लेता है,उसका गुस्ल हो गया और जिसने गुस्ल कर लिया उसका वुज़ू भी हो गया. - [51 Surah-Al-Zariyat](https://barelvi.in/51-surah-al-zariyat/): अल्लाह के नाम से शुरू जो बहुत मेहरबान रहमत वाला(1) (1) सूरए ज़ारियात मक्की है इसमें तीन रूकू, साठ आयतें, तीन सौ साठ कलिमे और एक हज़ार दो सौ उन्त्तालीस अक्षर हैं. - [kanzul iman](https://barelvi.in/kanzul-iman/): आला हजरत इमाम अहमद रज़ा खां रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फाजिले बरेलवी ने मजहब-ए-इस्लाम को कन्जुल ईमान (कुरान का अनुवाद) के रूप में एक अहम तोहफा अता किया। सन 1911 ई. - [गौस पाक की करामात - Ghous Pak Ki Karamat](https://barelvi.in/%e0%a4%97%e0%a5%8c%e0%a4%b8-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4-ghous-pak-ki-karamat/): आप फरमाते हैं कि मुरीद को हर हाल में अपने पीर की तरफ ही रुजू करना चाहिये ! अगर चे वो करामत से खाली भी हुआ तो क्या हुआ मैं तो खाली नहीं हूं ! - [52-Surah At-Tur](https://barelvi.in/52-surah-at-tur/): 52 सूरए तूर – 52 Surah At-Tur सूरए तूर मक्की है इस में दो रूकू, उनचास आयतें, तीन सौ बारह कलिमे और एक हज़ार पाँच सौ अक्षर हैं. - [AAKHIRAT AUR HASHR KA BAYAN - आख़िरत और हश्र का बयान](https://barelvi.in/aakhirat-aur-hashr-ka-bayan/): अच्छे बुरे कामों का हिसाब होगा हिसाब किताब हक़ है और हर अच्छे बुरे कामों का हिसाब होगा | जो हिसाब का इन्कार करे वह काफ़िर है किसी से इस तरह हिसाब लिया जायेगा कि उससे चुपके से पूछा जायेगा कि तूने यह काम किया और यह काम किया | अ़र्ज़ करेगा ऐ रब यहाँ तक कि तमाम गुनाहों का इकरार लेलेगा अब यह अपने दिल में समझेगा कि अब गये फ़रमायेगा कि हम ने दुनिया में तेरे ऐब छुपाये और अब बख़्शते हैं | और किसी से सख्ती के साथ एक बात पूछी जायेगी | जिससे इस तरह सवाल होगा उसकी हलाकत सामने है | अल्लाह तआला किसी से पूछेगा कि ऐ फुलाने क्या मैंने तुझे इज्ज़त न दी क्या तुझे सरदार न बनाया _? - [53 Surah Al-Najm](https://barelvi.in/53-surah-al-najm/): 53 सूरए नज्म – 53 Surah Al Najm सूरए नज्म मक्की है, इसमें तीन रूकू, बासठ आयतें, तीन सौ साठ कलिमें, एक हज़ार चार सौ पाँच अक्षर हैं. ## Pages - [Shorts](https://barelvi.in/shorts/) - [Singl Post](https://barelvi.in/singl-post/) - [Successful payment](https://barelvi.in/successful-payment/) - [Donate](https://barelvi.in/donate/) - [Barelvi Namaz, Roza, Zakat, Hajj, Quran, Hadees, Naat](https://barelvi.in/) - [Categories](https://barelvi.in/categories/): Ahmad Raza Khan (33) Ahmed Raza Khan Barelvi (32) ala hazrat (32) a zakat meaning (4) kalamur rahman pdf (33) kanzul iman ala hazrat pdf free download (33) kanzul iman hadees (32) kanzul iman hindi dawateislami (32) kanzul iman hindi pdf (40) kanzul iman meaning in urdu (32) Kin Cheezon Ke Karne Se Roza Toot Jata (4) meaning of ज़कात (4) meaning of ज़कात in hindi (4) Namaz (7) Namaz Ka Tarika (6) quran download (32) quran in arabic (32) quran in english and arabic (32) quran in hindi (41) quran surah (32) quran tafseer in hindi pdf download (32) quran translation in urdu (32) read quran (32) Surah 107 (5) Zakat Ada Karne Ka Asan Tareeqa (4) zakat al mal (4) zakat a tax (4) zakat bayan (4) zakat benefits (4) zakat dene ka tarika (4) zakat details (4) zakat for gold (4) zakat gold (4) zakat hadith (4) zakat hindi (4) zakat i islam (4) zakat images (4) zakat in hindi (4) zakat in islam (4) zakat in urdu (4) zakat meaning (4) zakat on gold (4) zakat rules (4) और किसको देनी चाहिये ? - [Privacy](https://barelvi.in/privacy/): आप Barelvi.in की सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं तो Barelvi.in आपकी और आपके परिवार की निजी जानकारियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. - [privacy-2](https://barelvi.in/privacy-2/) - [Gallery](https://barelvi.in/gallery/) - [Contact Us](https://barelvi.in/contact-us/): The Feedback has been submitted successfully! 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